विशेषज्ञों ने चेताया है कि विधानसभा चुनाव खत्म होने पर बंगाल में कोरोना संक्रमण नया रिकॉर्ड बना सकता है।
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स्वास्थ्य विभाग के महामारी विशेषज्ञ अनिर्वाण दलुई कहते हैं, “बीते साल 24 मई को 208 मामले सामने आए थे। संक्रमितों की संख्या में दस गुनी वृद्धि में तब दो महीने से ज्यादा का समय लगा था। लेकिन अब चार मार्च से चार अप्रैल तक यानी ठीक एक महीने में ही इसमें दस गुनी वृद्धि हुई है। अगर हमने तुरंत इस पर अंकुश लगाने के उपाय नहीं किए तो इस महीने के आखिर तक दैनिक मामलों की संख्या छह से सात हजार तक पहुंचने की आशंका है।”
विशेषज्ञों ने चेताया है कि विधानसभा चुनाव खत्म होने पर बंगाल में कोरोना संक्रमण नया रिकॉर्ड बना सकता है। उनका कहना है कि आठ चरणों तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया कोरोना के लिहाज से भारी साबित हो सकती है। तमाम राजनीतिक दलों की रैलियों और चुनाव अभियान के दौरान न तो कहीं किसी के चेहरे पर मास्क नजर आता है और न ही सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन हो रहा है।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट बी.एन. चौधरी कहते हैं, “लॉकडाउन नहीं होना, कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन और चुनावी रैलियों में बिना किसी सुरक्षा के बढ़ती भीड़ ही तेजी से बढ़ते संक्रमण की प्रमुख वजहें हैं। आठ चरणों में होने वाले चुनावों की वजह से रोजाना किसी न किसी पार्टी की रैली या सभाएं हो रही हैं। वहां जुटने वाली भीड़ में सामाजिक दूरी का पालन संभव ही नहीं है, ज्यादातर लोग बिना मास्क के होते हैं। ऐसे में अभी दूसरी लहर का चरम आना बाकी है।”
द ज्वाइंट फोरम ऑफ डाक्टर्स—वेस्ट बंगाल नामक डाक्टरों के एक समूह ने चुनाव आयोग को पत्र भेज कर चुनाव अभियान के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल की सरेआम धज्जियां उड़ने पर गहरी चिंता जताते हुए उससे हालात पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।
इस मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तेजी से बढ़ते संक्रमण पर गहरी चिंता जताई है।
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कोरोना के बीच चुनाव पर सवाल
इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल किया है कि पूरे देश में दोबारा संक्रमण बढ़ रहा है। क्या ऐसी परिस्थिति में तीन या चार चरणों में ही मतदान कराना उचित नहीं होता? लेकिन प्रदेश बीजेपी के महासचिव सायंतन बसु दलील देते हैं कि कोरोना के बीच अगर बिहार में चुनाव हो सकते हैं तो बंगाल में क्यों नहीं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कुणाल सरकार कहते हैं, “चुनाव आयोग बंगाल में चुनाव अभियान के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल को लागू करने में नाकाम रहा है। तमाम राजनीतिक दल बिना मास्क पहने सामाजिक दूरी के नियमों का पालन किए बिना हजारों लोगों के साथ रैलियां कर रहे हैं।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव आयोग को रैलियों और चुनाव अभियान के दौरान लोगों की तादाद तय कर देनी चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो हालात बेकाबू होने का अंदेशा है।
इस मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तेजी से बढ़ते संक्रमण पर गहरी चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने में नाकाम रहने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। खंडपीठ का कहना था कि समाज के अन्य सदस्यों के जीवन को खतरे में डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाने वालो के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।