भाजपा ने माकपा छोड़ कर पार्टी में शामिल होने वाली रिंकू नस्कर को यहां टिकट दिया है।
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यहां से हार गए थे बुद्धदेव भट्टाचार्य
वर्ष 2011 में बदलाव की लहर पर सवार होकर पूर्व मुख्य सचिव मनीष गुप्ता ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को यहां 16 हजार वोटों को अंतर से पराजित किया था। लेकिन पांच साल बाद ही वे माकपा के सुजन चक्रवर्ती से 15 हजार वोटों के अंतर से हार गए थे। तृणमूल कांग्रेस ने इस बार यहां पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट देवब्रत मजुमदार को मैदान में उतारा है जो चार बार कोलकाता नगर निगम के पार्षद रह चुके हैं।
मजुमदार कहते हैं, “20 साल तक पार्षद रहने के दौरान मैंने इलाके में कई विकास योजनाएं लागू की हैं। स्थानीय लोगों से मेरा नजदीकी संबंध हैं। मुझे अपने काम के आधार पर जीत का भरोसा है।” दूसरे इलाकों की तरह जादवपुर में भी पार्टी अपनी सरकार की तमाम योजनाएं और उपलब्धियां गिना रही हैं। उनका कहना है कि पहले जो लोग इलाके में माकपा के साथ थे वही अब भाजपा में शामिल हो गए हैं। वाम अब यहां राम हो गया है। लोग उसका चाल-चरित्र समझ चुके हैं।
भाजपा ने माकपा छोड़ कर पार्टी में शामिल होने वाली रिंकू नस्कर को यहां टिकट दिया है। रिंकू कहती हैं-“बंगाल के लोगों ने इस बार बदलाव का मन बना लिया है। मैं इस इलाके में दस साल तक पार्षद रही हूं। लोग मेरा काम जानते हैं।” उनका कहना है कि इन चुनावों में बेरोजगारी और विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा है। राज्य में नए उद्योग नहीं लग सके हैं और सरकारी नौकरियों के लिए लोगों को मोटी कट मनी देनी पड़ती है।
पांच साल से विपक्ष का विधायक होने की वजह से इलाके में विकास परियोजनाओं की गति धीमी हुई है और लोगों को पेय जल जैसी कई गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। यही वजह है कि इलाके के वोटरों में माकपा के प्रति सहानुभूति साफ झलकती है।
जादवपुर विश्वविद्यालय के सामने फुटपाथ पर एक स्टाॅल चलाने वाले मनोज दास कहते हैं, “सुजन चक्रवर्ती ने लॉकडाउन के दौरान इलाके के लोगों की काफी सहायता की थी। उस दौरान पार्टी की ओर से शुरू की गई श्रमजीवी कैंटीन के जरिए गरीबों को मामूली कीमत पर भरपेट भोजन मुहैया कराया गया था।” एक रिटार्यड शिक्षक मोहन दलुई कहते हैं, “वाममोर्चा सरकार के दौर में इलाके में तेजी से विकास हआ था। खुद मुख्यमंत्री इस सीट से विधायक थे। लेकिन बीते एक दशक से तमाम परियोजनाएं या तो ठप हैं या फिर बहुत धीमी गति से चल रही हैं।
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