भाजपा मंथन कर रही है कि ममता बनर्जी से किन मुद्दों पर सामना करे
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भाजपा के राज्यसभा सदस्य स्वप्न दासगुप्ता ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में मुख्यामंत्री के नाम की घोषणा पहले होने चाहिए वहीं पश्चिमी बंगाल भाजपा अध्यक्ष का कहना है कि चुनाव के बाद ही इसका एलान किया जाना चाहिए।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार में हम केवल सीएए और एनआरसी के मुद्दे के भरोसे नहीं रहेंगे। अगर सरकार में आना है तो हमें विकल्प के तौर पर दूसरे मुद्दों को भी साथ लेकर चलना होगा। लेकिन प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि तृणमूल कार्यकर्ताओं को दिल्ली में भाजपा की हार को लेकर उत्साहित होने की जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि दिल्ली चुनावों के नतीजों का बंगाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बंगाल के लोगों ने राज्य में सत्ता परिवर्तन का मन बना लिया है औऱ लोगों का भरोसा भाजपा पर ही है।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी औऱ उनकी सरकार के काट के लिए भाजपा अब उनके हथियार को ही अपनाने का फैसला किया है। इसके तहत हेल्पलाइन के तौर पर जल्दी ही कुछ टोल-फ्री नंबर जारी करेगी जहां लोग सरकार के खिलाफ अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। ध्यान रहे कि बीते साल शुरू हुआ दीदी के बोलो कार्यक्रम काफी हिट साबित हुआ है और इससे मुख्यमंत्री और सरकार की छवि सुधारने में काफी सहायता मिली है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि राज्य के किसी भी कोने से लोग इन नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं या फिर सुझाव दे सकते हैं।
पार्टी का एक गुट ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ रणनीति बदलने की वकालत कर रहा है। एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि दिल्ली के नतीजों से सबक लेकर बंगाल में पार्टी की रणनीति में बदलाव जरूरी है। यहां सीएएऔर एनआरसी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों की बजाय हमें सरकार के कुशासन, भ्रष्टाचार औऱ वैकल्पिक नीतियों पर ज्यादा जोर देना होगा। लेकिन दिलीप घोष की दलील है कि ऐसे किसी बदलाव से कार्यतकर्ताओं और समर्थकों में गलत संदेश जाने का अंदेशा है।
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