पश्चिम बंगाल में छह अप्रैल को तीसरे चरण में मुकाबला युवा और अनुभवी चेहरों के बीच है। पहले दो चरणों में तमाम निगाहें नंदीग्राम और जंगलमहल इलाके पर टिकी थीं, लेकिन तीसरे दौर में हावड़ा, हुगली और दक्षिण 24-परगना जिले की 31 सीटें भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। इस दौर में जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सामने अपना सबसे मजबूत गढ़ बचाने की चुनौती है, वहीं ममता के भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी के लिए भी यह दौर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
टीएमसी का गढ़़ और चुनौती
दक्षिण 24-परगना को अब भी तृणमूल का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। बीते विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से यह बात साफ हो जाती है। तब तृणमूल ने इनमें से 29 सीटों पर कब्जा जमाया था। बाकी दो में से एक-एक सीट कांग्रेस और लेफ्ट को मिली थी। बीते लोकसभा चुनावों में पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा उसके वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब नहीं हो सकी थी।
पहले दो चरणों के दौरान जिन 60 सीटों के लिए वोट पड़े हैं, वहां तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के स्टार उम्मीदवारों की तादाद ज्यादा था, लेकिन तीसरे दौर में तस्वीर कुछ अलग है। इस चरण में पापिया और तनुश्री जैसे नए चेहरों के साथ कांति गांगुली और विमान बनर्जी जैसे अनुभवी उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
तीसरे चरण में जिन सीटों पर सबकी निगाह रहेगी, उनमें दक्षिण 24-परगना जिले की बारुईपुर पश्चिम सीट शामिल है। यहां विधानसभा अध्यक्ष विमान बनर्जी तृणमूल के टिकट पर मैदान में हैं। इसी जिले की रायदीघी सीट पर सीपीएम ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कांति गांगुली को एक बार फिर मैदान में उतारा है।
कांति वर्ष 2011 और 2016 में तृणमूल की उम्मीदवार अभिनेत्री देवश्री राय से मुंहकी खा चुके हैं, लेकिन इस बार देवश्री को टिकट नहीं मिला है। इसलिए कांति गांगुली दोबारा इस सीट पर कब्जे का प्रयास कर रहे हैं।
तारकेश्वर में भी अबकी मुकाबला दिलचस्प
हुगली जिले के तारकेश्वर में भी अबकी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने यहां राज्यसभा के पूर्व सदस्य स्वपन दासगुप्ता को मैदान में उतारा है। उनका मुकाबला तृणमूल के रमेंदु सिंह राय से है। यहां मैदान में उतरने की वजह से दासगुप्ता को अपनी सांसदी से इस्तीफा देना पड़ा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके समर्थन में इलाके में रैली कर चुके हैं। हावड़ा जिले की उलुबेड़िया सीट पर राज्य के पूर्व मंत्री निर्मल मांजी तृणमूल के टिकट पर मैदान में हैं। उधर, इसी जिले की आमता सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार असित मित्र भी जीत की हैट्रिक लगाने का दावा कर रहे हैं। बंगाल में कांग्रेस की बदहाली के बावजूद असित वर्ष 2011 और 2016 में इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं।
वर्ष 2016 से 2019 के बीच इस चरण की सभी 31 सीटों पर भाजपा को मिलने वाले वोटों में बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2019 की भाजपा लहर के बावजूद इन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के वोट भी बढ़े हैं। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस जहां वर्ष 2019 के नतीजों को बरकरार रखने का प्रयास करेगी, वहीं भाजपा की उम्मीदें वोटों पर वर्ष 2016 के बाद तेजी से होने वाली वृद्धि पर टिकी हैं।