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मौसम 2026: नए साल में और सता सकती है गर्मी

Sun, 28 Dec 2025 06:28 AM IST
लव गौर अजीत निरंजन

सार

अनुमानों के अनुसार, 2024 की तुलना में 2026 थोड़ा ठंडा जरूर रहेगा, फिर भी 2026 के, 1850 के बाद चार सबसे गर्म वर्षों में शामिल होने की आशंका है।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले साल धरती का तापमान पूर्व औद्योगिक स्तर की तुलना में 1.4 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ सकता है, क्योंकि जीवाश्म ईंधन से होने वाला उत्सर्जन धरती को लगातार गर्म कर रहा है और चरम मौसमी घटनाएं बढ़ा रहा है। ब्रिटेन के मौसम विभाग का अनुमान है कि 2024 की तुलना में 2026 थोड़ा ठंडा जरूर रहेगा, फिर भी 2026 के, 1850 के बाद से दर्ज चार सबसे गर्म वर्षों में शामिल होने की आशंका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 2026 में तापमान 1850-1900 की तुलना में 1.34 से 1.58 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकता है।
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इस पूर्वानुमान का नेतृत्व करने वाले मौसम विभाग के जलवायु वैज्ञानिक एडम स्केफ ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में वैश्विक तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा है, और आशंका है कि 2026 लगातार चौथा साल होगा, जब ऐसा होगा। इससे पहले, वैश्विक तापमान कभी 1.3 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा नहीं था।
लगभग 10 साल पहले पेरिस जलवायु बैठक में दुनिया के नेताओं ने वादा किया था कि इस सदी के अंत तक वैश्विक तापमान बढ़ोतरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित किया जाएगा। इस लक्ष्य को पाना अब भी वैज्ञानिक रूप से मुमकिन है।
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मौसम विभाग के जलवायु वैज्ञानिक निक डंस्टन ने कहा कि 2024 में पहली बार तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा देखने को मिला, और 2026 में ऐसा दोबारा हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह दर्शाता है कि हम अब पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री सेल्सियस वाले लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच रहे हैं।

यूरोपीय संघ के वैज्ञानिकों ने बताया कि 2025 रिकॉर्ड के अनुसार, दूसरा या तीसरा सबसे गर्म साल हो सकता है, और यह विश्व मौसम संगठन के अनुमानों की भी पुष्टि करता है। अल नीनो जैसी गर्म प्राकृतिक स्थितियों ने 2023 और 2024 में तापमान बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई, जबकि 2025 में कमजोर ला नीना के कारण यह बढ़ोतरी थोड़ी कम रही। बिजलीघरों, गाड़ियों और बॉयलरों से निकलने वाली गैसें धरती को गर्म कर रही हैं, और जंगलों के नष्ट होने से हवा से कार्बन सोखने की प्राकृतिक क्षमता भी घट रही है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले साल वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर अब तक का सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। विशेषज्ञों को यह चिंता भी है कि धरती के प्राकृतिक कार्बन सिंक, यानी वे हिस्से जो हवा से कार्बन सोखते हैं, भविष्य में ठीक से काम करना बंद कर सकते हैं।
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