रूस-यूक्रेन युद्ध के दुष्प्रभाव
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अमेरिका में बेबी फॉर्मूला संकट की शुरुआत तो पिछले साल नवंबर से ही हो गई थी लेकिन हाल में यह स्थिति विकराल हो गई है। हालत यह है कि देश के कई स्टोर्स में बेबी फॉर्मूला का स्टॉक खत्म हो गया है। कई कंपनियों ने इसे खरीदने की लिमिट भी लगा दी है।
दूध तक के लिए तरस रहे हैं बच्चे
दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका में आजकल बच्चों को भरपेट दूध नसीब नहीं हो रहा है। एक साल से कम उम्र के बच्चे को फॉर्मूला मिल्क पिलाया जाता है। जब किसी समस्या की वजह से मां की ब्रेस्ट में दूध नहीं बन पाता या मां स्तनपान नहीं करवा पाती है, तो शिशु को फॉर्मूला मिल्क पिलाया जाता है। लेकिन अमेरिका में इसकी भारी कमी हो गई है। कई बड़ी कंपनियों ने इसकी बिक्री सीमित कर दी है।
हाल के दिनों में कंपनियों ने फॉर्मूला मिल्क कैन खरीदने के सीमा तय कर दी है। यानी कस्टमर तय सीमा से ज्यादा कैन नहीं खरीद सकते हैं। टॉप ब्रांड बनाने वाली कंपनी एबॉट (Abbott) ने फरवरी में अपने फॉर्मूला मिल्क प्रोडक्ट्स को वापस बुला लिया है। इसमें बैक्टीरिया मिलने के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया था। साथ ही इसे बनाने वाली फैक्ट्री को भी बंद कर दिया गया था। इससे देश में फॉर्मूला मिल्क का संकट बढ़ गया।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक बाइडेन सरकार पर जल्दी से जल्दी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दबाव बढ़ रहा है। कई रिपब्लिकन सांसदों ने इसे राष्ट्रीय संकट बताते हुए सरकार से इस पर ध्यान देने की अपील की है।
डेमोक्रेटिक रिप्रजेंटेटिव रोसा डीलॉरो ने भी इस मुद्दे पर फूड एंड ड्रग एडिमिनिस्ट्रेशन के सुस्त रवैये की आलोचना की है। कई प्रांत गरीब महिलाओं और बच्चों को बेबी फॉर्मूला देने के प्रोग्राम चला रहे हैं और एबॉट इसमें मुख्य सप्लायर है।
कंपनी का कहना है कि वह मिशिगन में बंद पड़ी अपनी फैक्ट्री को फिर से चालू कराने के लिए रेग्युलेटर्स के साथ काम कर रही है। साथ ही आयरलैंड में कंपनी के प्लांट से अतिरिक्त खेप मंगाई जा रही है।
कंपनी का फॉर्मूला मिल्क लेने के बाद चार बच्चों के बीमार होने की खबर आई थी। इनमें से दो बच्चों की मौत हो गई थी। अभी इस मामले की जांच चल रही है।
बुरे दौर से गुजर रही है दुनिया
अमेरिका के 11 हजार स्टोर्स पर नजर रखने वाली रिसर्च फर्म Datasembly के मुताबिक देश में फॉर्मूला मिल्क की कमी पिछले साल से हो होने लगी थी। सप्लाई चेन की बाधा और दूसरे कई कारणों से ऐसा हुआ। पिछले महीने स्थिति और विकराल हो गई जब लोगों ने इसे स्टॉक करना शुरू कर दिया था।
24 अप्रैल को एवरेज आउट ऑफ स्टॉक रेट उछलकर 40 फीसदी पहुंच गया जो कुछ हफ्ते पहले 30 फीसदी था। नवंबर में यह 11 फीसदी था।
देश के 26 प्रांतों में आउट ऑफ स्टॉक रेट 40 फीसदी से अधिक है जबकि तीन हफ्ते पहले यह संख्या सात थी। देश की बड़ी फार्मेसी चेन Walgreens ने एक बयान में कहा कि बढ़ती मांग और सप्लायर की कई चुनौतियों के कारण देशभर में बेबी फॉर्मूला पर काफी दबाव है।
हम ग्राहकों की मांग को पूरा करने के लिए अपने सप्लायर पार्टनर्स के साथ दिनरात काम पर जुटे हैं। Walgreens के स्टोर्स पर केवल तीन कैन फॉर्मूला मिल्क खरीदा जा सकता है। कई दूसरे रिटेलर्स ने भी यह लिमिट लगाई है।
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