अच्युत पोतदार का हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी तीनों भाषाओं पर उनका समान अधिकार था।
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
करीब 40 साल तक सिनेमा और टेलीविजन में रहे सक्रिय
करीब चार दशक तक रंगमंच, सिनेमा और टेलीविजन में सक्रिय रहे अच्युत पोतदार ने दर्शकों के सम्मुख अपनी बहुमुखी प्रतिभा के नए आयाम पेश किए। उन्होंने हिन्दी और मराठी की 125 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में थ्री इडियट्स (2009) के अलावा दबंग-2 (2012) फरारी की सवारी (2012) भूतनाथ (2008) और लगे रहो मुन्ना भाई (2006) परिणीता (2005) आदि को गिना जा सकता है।
हाल के वर्षों में उन्हें दर्शकों ने सईद अख्तर मिर्जा की एक ठो चांस (2009) प्रभु देवा की आर राजकुमार (2013) और रवींद्र गौतम की इक्कीस तोपों की सलामी (2014) में देखा।
अच्युत पोतदार को सूरज बड़जात्या (हम साथ साथ हैं) महेश मांजरेकर (वास्तव) इंद्र कुमार (इश्क) प्रकाश झा (मृत्युदंड) राम गोपाल वर्मा (रंगीला) राजकुमार संतोषी (दामिनी) राजीव मेहरा (चमत्कार) अजीज मिर्जा (राजू बन गया जेंटलमैन) और एन चंद्रा (तेजाब और नरसिम्हा) सरीखे सुधि निर्देशकों की फिल्मों में निभाए गए किरदारों की खातिर भी याद रखा जाएगा।
नाना पाटेकर, ऋषि कपूर, असरानी और सतीश कौशिक जैसे अभिनेताओं द्वारा निर्देशित फिल्मों- प्रहार, आ अब लौट चलें, उड़ान तथा कर्ज में भी उनके अभिनय को सराहना मिली। नाना पाटेकर अभिनीत युग पुरुष और यशवंत में अच्युत पोतदार ने बेहद संजीदा रोल अदा किए।
नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा निर्मित और दिलीप चित्रे निर्देशित गोदाम (1983) में उनके गंभीर अभिनय की उम्दा झलक देखने को मिली थी। कुछ साल बाद सई परांजपे के निर्देशन में बनी दिशा (1990) में उन्होंने एक बीड़ी कारखाने के मालिक का किरदार अदा किया था, जो कर्ज में डूबी महिला श्रमिकों के शोषण के लिये उद्यत रहता है।
सामानांतर फिल्मों के दौर की इन महत्वपूर्ण फिल्मों में अच्युत पोतदार का मंजा हुआ अभिनय उन्हें समकालीन सशक्त अभिनेताओं में स्थान दिलाता है। तीन-चार दशक पुरानी ये फिल्में आज भी ओटीटी प्लेटफार्म पर आसानी से देखी जा सकती है।
अच्युत पोतदार ने आशिक आवारा, हस्ती, शतरंज, एलान, दिलवाले, ये दिल्लगी, सुरक्षा, आन्दोलन, गुंडाराज, अग्नि साक्षी, शस्त्र, सनम, शपथ, औजार, कीमत, न्यायदाता, दाग: द फायर, गैर, दहक, खौफ, आगाज, फर्ज, हम हो गये आपके, दिल है तुम्हारा, रिश्ते, धुंद, ये दिल, क़यामत, पुलिस फोर्स, वादा, पहचान और तीसरी आंख जैसी औसत व्यावसायिक फिल्मों में भी काम किया, लेकिन इससे उन्हें अभिनेता के रूप में कोई ख़ास पहचान नहीं मिल सकी।
हालांकि उन्होंने सामानांतर फिल्मों के तमाम अग्रणी कलाकारों- ओम पुरी, अमरीश पुरी, नसीरुद्दीन शाह, कुलभूषण खरबंदा, के.के. रैना, पंकज कपूर, सदाशिव अमरापुरकर, मोहन अगाशे, स्मिता पाटिल, शबाना आजमी समेत कमर्शियल फिल्मों के अमिताभ, धर्मेन्द्र, राजेश खन्ना, विनोद खन्ना, हेमा मालिनी, रेखा, डिम्पल कपाड़िया, मिथुन चक्रवर्ती, सनी देओल, संजय दत्त, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, नाना पाटेकर, मिनाक्षी शेषाद्री, माधुरी दीक्षित, रवीना टंडन, जूही चावला, उर्मिला मातोंडकर, मनीषा कोइराला, काजोल, प्रीति जिंटा, विद्या बालन, शाहरुख़, सलमान, आमिर, अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, सैफ अली खान, गोविंदा, अजय देवगण, शाहिद कपूर, सोनाक्षी सिन्हा, कादर खान, अनुपम खेर, परेश रावल आदि के साथ काम करने के अवसरों का पूरा लुत्फ उठाया।
मराठी रंगमंच में भी योगदान
अच्युत पोतदार ने मराठी रंगमंच को भी समृद्ध किया। सत्यदेव दुबे, विजया मेहता, सुलभा देशपांडे जैसे दिग्गज रंगकर्मियों के साथ उनकी खूब बनती थी। जिन टीवी धारावाहिकों में उनकी भूमिका प्रमुखता से रेखांकित हुई, उनमें ‘भारत एक खोज’ ‘वागले की दुनिया’ ‘प्रधान मंत्री’ ‘ये दुनिया गजब की’ ‘ऑल द बेस्ट’ ‘आहत’ ‘आन्दोलन’ ‘मिसेज तेंदुलकर’ ‘माझा होशील ना’ ‘अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजो’ ‘शुभ मंगल सावधान’ आदि शामिल हैं।
‘प्रधान मंत्री’ और ‘आन्दोलन’ नामक टीवी धारावाहिकों में उन्होंने लोक नायक जय प्रकाश नारायण का किरदार निभाया था। उन्होंने दो दर्जन से अधिक नाटकों में काम किया और ढेर सारी एड फिल्में भी की।
इन्दौर में साहित्यिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली अग्रणी संस्था 'सानंद न्यास' ने वर्ष 2015 में स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित समारोह में अच्युत पोतदार को 'सानंद जीवन गौरव सम्मान' से सम्मानित किया था। 2021 में उन्हें जी मराठी चैनल द्वारा ‘जीवन गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। इंडियन आयल में उनके मातहत काम कर चुकीं लेखिका, फिल्म और रंगमंच अभिनेत्री विभा रानी के अनुसार हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी तीनों भाषाओं पर पर उनका समान अधिकार था।
उनकी आवाज, उच्चारण, मुस्कान और विट को याद करते हुए वे कहती हैं- “दफ्तर के कार्यक्रमों में वे कमाल की एंकरिंग करते थे। उनकी अनुपस्थिति में ही मुझे एंकरिंग के लिये बुलाया जाता था। सादगी, समर्पण और अभिनय के प्रति जुनून के लिए अच्युत पोतदार को हमेशा याद किया जाएगा।”
अपने स्टूडेंट्स से झल्लाकर “अरे, तुम कहना क्या कहते हो..” पूछने वाला कलाकार वास्तविक जीवन में युवा पीढ़ी का सबसे बड़ा हमदर्द था। नये उभरते हुए कलाकारों की मदद के लिये अच्युत पोतदार सदैव तत्पर रहे। उन्होंने हिंदी व मराठी सिनेमा, टीवी और रंगमंच पर जो अमिट छाप छोड़ी है, वह आने वाले समय में भावी पीढ़ी को सदैव प्रेरित करती रहेगी।
(लेखक वरिष्ठ फिल्म अध्येता और सिने समीक्षक हैं)
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