वसंत पंचमी 2022: ऋतु परिवर्तन का आरंभ और प्रकृति के श्रंगार का दिन
- फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी का महत्व
वसंत पंचमी के दिन गंगा एवं अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाने का भी विशेष महत्व है। इस दिन देश विदेश से श्रद्धालु गंगा स्नान करने प्रयाग और उत्तराखण्ड जाते हैं। इलाहाबाद के संगम तट पर इस दिन श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है। स्नान के अलावा लोग तटों पर पूजा आरती इत्यादि भी करते हैं।
सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंघ का जन्म भी वसंत पंचमी के दिन ही हुआ था इसलिए येत्यौहार सिखों के लिए भी महत्व पूर्ण ह। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु का लाहौर नमक जगह पर जो कि सिखों का एक पवित्र तीर्थ स्थल है, इस दिन भव्य मेले का आयोजन होता है।
हिमाचल प्रदेश में श्रद्धालु तत्पनी में एकत्र होते हैं और गर्म पानी के झरनों में स्नान करते हैं वहीं बंगाल प्रांत में ढाक की थाप के बीच देवी की आराधना होती है। कुल मिलाकर यह समस्त भारत में अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है।
वसंत पंचमी के दिन किसी नए काम का आरंभ करना शुभ माना जाता है। ऐसी आस्था है कि वसंत पंचमी के दिन किसी नए व्यवसाय इत्यादि का आरंभ करने से सब मंगलमय होता है। विवाह के लिए भी वसंत पंचमी का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है।
क्या सिखाती है वसंत पंचमी?
वसंत पंचमी से ही वसंत ऋतु का आगमन होता है। वसंत ऋतु यानी के पतझड़ के खालीपन के बाद पेड़ पौधे एक बार फिर फूल-पत्तों से लद जाती है। पेड़ों पर लगी नयी पत्तियां मानों सोने की बनी हों, दूर से ही चमकती हैं। ये कोंपलें ये फूल पेड़-पौधों पर ऐसे जंचते हैं कि मानो प्रकृति ने नया नया शृंगार किया हो। आजकल की भाषा में कहें तो वसंत प्रकृति का सालाना 'मेकओवर' होता है।
वसंत पंचमी बस एक उत्सव ही नहीं बल्कि एक सीख भी है। वसंत पंचमी सिखाती है कि पुराने के अंत के साथ ही नए का सृजन भी होता है। असल में अंत और शरुआत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
वसंत ऋतु के आने से पहले पतझड़ का उदास मौसम होता है, लेकिन वसंत पंचमी के साथ ही वसंत ऋतु भी दस्तक देती है और वसंत ऋतु में पतझड़ से खाली हुए पेड़ पौधों में फिर से एक चमक, एक सुंदरता उतर आती है। जीवन का दस्तूर भी कुछ ऐसा ही है। पतझड़ की तरह खालीपन आता है लेकिन सब्र का दामन ना छोड़ें तो वसंत की बहार भी आती है। जीवन भी एक उत्सव है जम के इसका आनंद उठाएं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।