UP Election Result: बड़ी जीत के करीब भाजपा
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मुस्लिम मतदाताओं का हाल
यहां सबसे महत्वपूर्ण और गौर करने वाली बात ये है कि मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग इस चुनाव में मतदान केंद्र पर नहीं पहुंचा है। मेरे अवलोकन में हमने पाया कि तमाम मुस्लिम सऊदी अरब,कुवैत,दुबई और मुंबई जैसी जगहों पर अपनी रोजी की जुगत कर रहे हैं।
ताज्जुब ये है कि कि मेरे अवलोकन में पूर्वी उत्तर प्रदेश में ऐसे मुस्लिम मतदाता, कुल मुस्लिम मतदाताओं का 25 से 30 प्रतिशत है। दूसरी तरफ इस चुनाव में तमाम विधानसभा क्षेत्रों में ये देखने को मिला कि बसपा ने ऐसे प्रत्याशियों को टिकट दिया जिन्होंने अप्रत्यक्ष सपा के वोट काटे और इस तरह भाजपा को उसका लाभ मिला।
हालांकि कांग्रेस भी लगभग इसी भूमिका में थी और उसके प्रत्याशी ऐसे थे जो अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा गठबंधन के वोट में सेंधमारी कर सकें लेकिन वे ज्यादा प्रभाव डालने में नाकाम रहे।
पूरे क्षेत्र सर्वेक्षण में हमने पाया कि उत्तर-प्रदेश के लोकतंत्र में एक नई जाति का उभार हुआ है जिन्हें हम लेवता (लाभार्थी) कह सकते हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर मिलने वाली सुविधाओं के आलोक में और अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के अभाव भाजपा का दामन थामा और यह कृत्रिम जाति या वर्ग इस चुनाव में निर्णायक साबित हुआ है।
मुद्दों को भुनाने में नाकाम विपक्ष
इस चुनाव में एक प्रमुख और प्रभावकारी मुद्दा आवारा पशुओं का था जिससे जनता काफी प्रभावित थी लेकिन विपक्ष समय से और व्यवस्थित तरीके से इसे भुनाने में नाकाम रहा, क्योंकि मोदी जैसे बड़े नेता ने 10 के बाद एक स्थायी समाधान का वादा किया और विपक्ष यह नहीं बता पाया कि वह इस समस्या का क्या समाधान देगा।
लोग भ्रमित थे कि वो समाधान के तौर पर बूचड़खानों पुनः बहाली देंगे, इस कारण हिन्दू मानसिकता के लोग अखिलेश से खुद को जोड़ नहीं पाए।
महिलाओं ने भी इस चुनाव में बड़ी भूमिका निभाई है और महिलाओं ने उज्ज्वला गैस योजना गैस योजना, महिला स्वयं सहायता समूह आदि योजनाओं के प्रभाव में सत्ताधारी पार्टी को समर्थन दिया। दूसरी तरफ सुरक्षा के नाम पर नवयुवतियों ने भाजपा को एकमात्र विकल्प के तौर पर देखा।
इन सबके साथ उत्तेजक दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थक युवकों ने अयोध्या,काशी और मथुरा के नाम पर योगी-मोदी की जोड़ी को बनाये रखने का फैसला किया। साथ ही समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी पार्टियों के समर्थकों द्वारा बेहतर नीतियों पर भाजपा के समर्थन पर भी अंधभक्त कहकर कई बार पढ़े लिखे और समझदार लोगों पर कटाक्ष भी नकारात्मक रहा है।
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