वार्ता के लिए उल्फा (स्वाधीन) के प्रमुख परेश बरुआ और असम सरकार के बीच जारी अनौपचारिक संवाद के बीच संगठन की नई भर्ती अभियान से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। वार्ता के लिए उल्फा ने एकतरफ संघर्ष विराम लागू कर रखा है, लेकिन इसके साथ ही संगठन में नए युवकों को शामिल करने का अभियान जारी है।
उल्फा (स्वाधीन) शांति के नाम पर एकतरफा संघर्ष विराम के नाम पर अपने संगठन को मजबूत करने के लिए नई भर्ती कर रहा है, जबकि असम सरकार ने उल्फा (स्वाधीन) के प्रमुख परेश बरुआ से वार्ता में शामिल होने का आह्वान किया है। पिछले कुछ माह से उल्फा में कई युवा शामिल हुए हैं। जिनमें गुवाहाटी की दो युवतियां भी शामिल हैं। इस बात की पुष्टि असम के पुलिस महानिदेशक भास्कर ज्योति महंत ने भी की है।
क्या अल्फा (स्वाधीन) प्रमुख परेश बरुआ क्या सचमुच शांति के प्रति गंभीर हैं या संगठन को नए सिरे से संगठित करने के लिए किसी रणनीति पर काम कर रहे हैं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि औपचारिक वार्ता के लिए दोनों पक्षों के बीच अनौपचारिक तरीके से संवाद जारी है और वार्ता की मुख्य शर्त का आदर करने के लिए कोई नया रास्ता तलाशा जा रहा है।
इस बात को उल्फा नेता परेश बरुआ भी मानते हैं और उन्हें भरोसा है कि असम के मुख्यमंत्री वार्ता की राह तलाश कर लेंगे। उन्हें मुख्यमंत्री की बात पर भरोसा है। लेकिन ऐसे में अल्फा (स्वाधानी) का नया भर्ती अभियान जारी है। इसलिए अलगाववादी नेता परेश बरुआ की बात पर संदेह हो रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिश्व शर्मा ने गत 2 मई को शिवसागर जिले की यात्रा के दौरान परेश बरुआ से नई भर्ती रोकने का आह्वान किया है। मुख्यमंत्री नहीं चाहते हैं कि कोई व्यक्ति अपने परिवार को छोड़कर उल्फा में शामिल हो। किसी युवक के उल्फा में जाने से उसके परिवार के सामने गंभीर संकट उठ खड़ा हो रहा है।
बच्चे अपने पिता के लिए, पत्नी अपने पति के लिए और बूढ़े मां-बाप अपनी संतान के लिए तड़प रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह भी कहना है कि परेश बरुआ खुद इस बारे में पहल करें और बच्चे, पत्नी तथा बूढ़े मां-बाप को छोड़कर अल्फा में शामिल होने से मना करें।
मुख्यमंत्री चाहते हैं कि परेश बरुआ बोहाग बिहू मे मौसम में शांति वार्ता आरंभ करें, ताकि असम में स्थाई शांति की वापसी हो सके और अल्फा में शामिल होने का अध्याय ही बंद हो जाए, क्योंकि असम के लोग अब शांति और विकास चाहते हैं। विकास के लिए शांति जरूरी है।