बजट में महात्मा बुद्ध के जन्मभूमि समेत बुद्ध से जुड़े ऐसे 52 पर्यटन स्थलों को भी विकसित करने की घोषणा की गई है।
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इस बाबत सरकार की पचास हजार पर्यटन स्थलों को बेहतर बनाने की योजना है। बजट में महात्मा बुद्ध के जन्मभूमि समेत बुद्ध से जुड़े ऐसे 52 पर्यटन स्थलों को भी विकसित करने की घोषणा की गई है। बताते चलें कि बिहार में महात्मा बुद्ध से जुड़े अधिकतर ऐतिहासिक स्थल हैं। इसका मकसद भी है स्थानीय स्तर रोजगार को बढ़ावा देना है। बिहार में एक नया ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाने के साथ ही बिहटा हवाई अड्डे को ब्राउन फील्ड एयर पोर्ट के रुप में विकसित करने की घोषणा भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया है।
बिहार के लिए एक और पैकज की घोषणा इस बजट में की गई है। वह है बिहार मखाना बोर्ड की स्थापना। यह प्रयास किसी सरकार की ओर से पहली बार हुआ है। इससे अब तक उपेक्षित पड़े मखाना किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण जगी है। इससे मखाना को अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध हो जाएगा। बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में मखाने की बड़े पैमाने पर खेती होती है। इसका मकसद भी स्थानीय स्तर पर बिना किसी ख़ास निवेश के रोजगार का सृजन करना ही है। बिहार के लिए इन तमाम घोषणाओं की वजह से विपक्ष मोदी सरकार के इस बजट को पूरे देश की बजाय बिहार का बजट बता रहे हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्रों में होने वाले अनुसंधानों और नवाचारों को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश में आईआईटी संख्या की बढ़ाने की भी घोषणा की है। शहरी विकास के लिए एक लाख करोड़ का इंतजाम किया गया है। साथ ही केवाईसी की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की घोषणा भी इस बजट में की गई है।
हर बजट से देश के मध्यवर्ग को और खासकर नौकरी पेशा वाले वर्ग को कुछ खास उम्मीदें होती हैं। बहुत हद तक मोदी सरकार के इस तीसरे कार्यकाल के पहले आम बजट में मध्य वर्ग के लिए बड़ी राहत की घोषणा की गई है। पहली बार 12 लाख की आय को आयकर सीमा से मुक्त किया गया है। इस एक छूट से 12 लाख की आमदनी पर मिली राहत से 12 लाख के सालाना आमदनी पर 80 हजार रुपए 18 लाख की आमदनी पर 90 और जिनकी आमदनी 25 लाख से ज्यादा होगी उन्हें 1 लाख 10 हजार रुपए का मुनाफा होगा।
सरकार की इस घोषणा को भी विपक्ष चार दिनों बाद दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों के नफा - नुकसान चश्में से ही देख रहे हैं। ऊपरी स्तर पर यह बजट सब को कुछ न कुछ खास देते हुए लग रहा है। यह बजट मोदी सरकार के उस मंशा के अनुकूल ही कहा जा सकता है कि आम जनता इस सरकार से किसी तरह के मुफ्त स्कीम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
सरकार का काम है मुफ्तखोरी को बढ़ावा देना नहीं , ऐसी सुविधाओं का निर्माण करना है, ताकि आमजन अपनी मेहनत, कौशल और हुनर से अपने विकास के लिए नये क्षितिज का आविष्कार करे और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें। बढ़ती मंहगाई और किसानों की घटती आमदनी को ध्यान में रखते हुए इस बजट में किसानों को सरकार से उम्मीद थी कि किसान सम्मान निधि में शायद इस बजट में वृद्धि हों, जो नहीं हुआ।
अन्तरर्राष्ट्रीय स्तर कच्चे तेल का भाव लगातार कम हो रहा है। पर उस लिहाज से डीजल -पेट्रोल के कीमत में कोई कमी नहीं की गई। हालांकि, इसकी काफी गुंजाइश थी। देश की जियो और बीपी जैसी निजी कंपनियां डीजल और पेट्रोल पर कच्चे तेल के भावों में आई कमी का फ़ायदा अपने उपभोक्ताओं को दे भी रहे हैं। अगर ऐसा होता, तो किसानों और छोटे - बड़े उद्योगों के लिए यह बड़ी राहत की बात होती। सरसरी निगाह से देखा जाए तो इस बजट को संतुलित बजट कहा जा सकता है। जिसमें आमदनी चवन्नी खर्चा रुपैया के अतिरेक से बचने की कोशिश भी दिखाई देती है। इस साल के बजट में पिछले साल की तुलना में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को भी साधने की कोशिश दिखती है। बताते दें कि पिछले साल राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 4।8 % रखा गया था और इस साल 4।4% रखा गया है।
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