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बजट 2025: पश्चिम बंगाल में बजट पर मिली-जुली प्रतिक्रिया और टीएमसी का नजरिया

सार

तृणमूल कांग्रेस सांसद और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि भाजपा सरकार के बीते दस साल के शासनकाल के दौरान बंगाल को केंद्रीय बजट में कुछ भी नहीं मिला है। बीते साल जुलाई में पेश बजट में भी बिहार और आंध्र प्रदेश को जमकर सौगात दी गई थी। 

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बजट 2025 - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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शनिवार को संसद में पेश केंद्रीय बजट पर पश्चिम बंगाल में मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इसे गहरी साजिश' बताया है। पार्टी ने इसमें बंगाल की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इसे 'बिहार का बजट' करार दिया है। दूसरी ओर, मध्यवर्ग ने आयकर छूट की सीमा बढ़ाए जाने पर संतोष तो जताया है लेकिन साथ ही उनका कहना है कि महंगाई कम होती तो ज्यादा राहत मिलती।

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राज्य के पूर्व वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आर्थिक सलाहकार अमित मित्र का कहना था कि बीमा के क्षेत्र में सौ फीसदी विदेशी निवेश का रास्ता तो खोल दिया गया है। लेकिन प्रीमियम की रकम पर 18 फीसदी जीएसटी वसूली जा रही है। क्या विदेशी निवेशकों की सहूलियत के लिए ही ऐसा किया गया है।


प्रीमियम पर जीएसटी खत्म करने की मांग

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अलावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी प्रीमियम पर जीएसटी खत्म करने की मांग कर चुकी हैं। लेकिन इसे खत्म नहीं किया गया है। अमित मित्र का कहना था कि आयकर में छूट भले दी गई है लेकिन भारत में कितने लोगों की मासिक कमाई एक लाख रुपए है?  आम लोगों से जुड़े मुद्दों को बजट में कोई तरजीह नहीं दी गई है।

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तृणमूल कांग्रेस सांसद और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि भाजपा सरकार के बीते दस साल के शासनकाल के दौरान बंगाल को केंद्रीय बजट में कुछ भी नहीं मिला है। बीते साल जुलाई में पेश बजट में भी बिहार और आंध्र प्रदेश को जमकर सौगात दी गई थी। इस साल भी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बिहार की झोली भर दी गई है।

केंद्रीय नहीं , बिहार का बजट

पार्टी के महासचिव कुणाल घोष कहते हैं कि यह आम लोगों का बजट नहीं है। सरकार ने 12 लाख तक आयकर में छूट भले दी है लेकिन इतनी कमाई कितने लोगों की होती है। ऐसे लोगों के लिए यह छूट बेमानी है। सीधे कहें तो यह केंद्रीय नहीं बल्कि बिहार का बजट है।

कोलकाता में एक सरकारी कर्मचारी नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं कि आयकर में छूट की उम्मीद तो कई साल से थी। लेकिन वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद यह कितना प्रभावी रहेगा, यह समझना मुश्किल है. केंद्र सरकार को इसके साथ ही महंगाई कम करने की दिशा में बी ठोस पहल करनी चाहिए।

आयकर छूट से रोजमर्रा के जीवन पर कोई असर नहीं

बर्दवान जिले की एक गृहिणी सुनंदा सेनगुप्ता कहती है कि सरकार को दैनिक उपयोग की चीजें और रसोई गैस की कीमतों में कटौती पर ध्यान देना चाहिए था। हर महीने बढ़ने वाली महंगाई से घर का बजट बिगड़ा ही रहता है। इसके अलावा हम लोग कर के दायरे में नहीं आते। इसलिए आयकर छूट से हमारे रोजमर्रा के जीवन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

आसनसोल में अदरक का कारोबार करने वाले आदित्य घराई कहते हैं कि हमारी साल में 12 लाख कमाई ही नहीं है तो कर छूट से हमें क्या फायदा। हमें तो अपने उत्पाद की बेहतर कीमत मिलनी चाहिए।

बढ़ती महंगाई सबसे बड़ा सिरदर्द

बांकुड़ा में एक सरकारी कर्मचारी प्रमोद कुमार पाल कहते हैं कि आयकर में छूट के बाद अब अगले साल वो इसके दायरे से बाहर निकल जाएंगे यानी अब आयकर का भुगतान नहीं करना होगा। लेकिन  दिन-ब-दिन बढ़ती महंगाई और स्कूल फीस से लेकर तमाम वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है।

कोलकाता के एक खुदरा व्यापारी दीपक मंडल कहते हैं कि इस बजट से एक खास वर्ग के लोगों को ही फायदा हुआ है। राज्य में ज्यादातर लोगों की आय साल में 10 लाख से कम ही है. उनको आयकर में छूट से कोई फर्क नहीं पड़ता। इस बजट में राज्य के आम लोगों के लिए कुछ नहीं है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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