युवा किसी भी देश में जनसंख्या का सबसे महत्वपूर्ण और गतिशील वर्ग है। इसका कारण यह है कि किसी भी राष्ट्र का विकास भावी पीढ़ी में निहित है। हम निस्संदेह कह सकते हैं कि आज के युवा कल के नवप्रवर्तक, निर्माता और नेता हैं। किन्तु वो आज निराश हैं, वह क्या करे? पहले शिक्षा के लिए संघर्ष किया, फिर रोजगार के लिए संघर्ष। हमारी सरकारी नीतियां इतनी लचर क्यों हैं? नेताओं के पास इस देश के युवाओं के लिए कोई विजन नहीं है क्या?
वर्तमान नीतिगत उपायों और कृत्रिम बौद्धिकता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को सरंक्षण देने के कारण यह आशंका प्रबल है कि जिस अनुपात में बेरोजगारी है, उस तुलना में नए रोजगारों का सृजन केंद्र या राज्य सरकारों के वश की बात रह ही नहीं गई है।
निजी क्षेत्रों में भी यही हाल है, एक सर्वे के अनुसार खोई हुई सभी नौकरियों में से 35% वापस नहीं आएगी। कोविड के बाद काम का तौर तरीका तो बदलने ही जा रहा है. कंपनियां ज्यादा से ज्यादा काम अब टेंपरेरी स्टाफ से करवाएंगी, पक्की नौकरियां कम से कम होती जाएंगी ।
माता-पिता की जीवन की सारी पूंजी, बच्चों को शिक्षित करने में खर्च हो जाती है। मध्यम वर्ग का युवा अनेक परेशानियों से घिरा है। उसके परिवार पर टैक्स का बोझ है, उसके टैक्स से रेवडियां बांट दी जाती हैं।
आज के युवा व्यवस्था, अनुशासन एवं पारदर्शिता को पसन्द करते हैं और वे न केवल उसका पालन करते हैं, बल्कि यदि सिस्टम ढंग से काम न करे तो सवाल भी करते हैं। शिक्षित बेरोजगार युवाओं की तुलना में इनकी योग्यता के अनुसार रोजगार उप्लब्ध नहीं हो पाना आज की एक सबसे बड़ी समस्या है।
भारतीय युवा और हमारा समाज
भारतीय युवाओं में जिस मनोविज्ञान का निर्माण हुआ है अथवा किया गया है, उसके केन्द्र में नौकरी है, उद्यम नहीं। युवाओं को भी सुविधा के क्षेत्र (कंफर्ट जोन) से बाहर निकलना होगा। कठिन व जोखिम भरे क्षेत्रों में रोजगार व स्वरोजगार तलाशने होंगे।
आज, भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है, जिसकी 62% से अधिक आबादी कामकाजी आयु वर्ग (15-59 वर्ष) में है, और इसकी कुल आबादी का 54% से अधिक 25 वर्ष से कम आयु का है। यह समय मल्टी स्किल का है इसीलिए स्किल, रीस्किल और फ्यूचर स्किल पर ध्यान दें।
करियर के लिहाज से कई क्षेत्रों में नए विकल्प जैसे बिजनेस मॉडल की पुनर्खोज, ई-एजुकेशन, हेल्थकेयर मैनेजमेंट, फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर, ई-कॉमर्स , डाटा साइंस, डिजिटल मार्केटिंग, कृषि तकनीक, रिस्क इन्शुरन्स, यूटूबर, एनजीओ, आर्गेनिक फार्मिग, आईटी एडमिनिस्ट्रेटर, कस्टमर सर्विस स्पेशलिस्ट, डिजिटल मार्केटियर, आईटी सपोर्ट या हेल्प डेस्क, डेटा एनालिस्ट, फ़ाइनेंशियल एनालिस्ट और ग्राफिक्स डिजाइनर वर्तमान में सामने दिख रहे हैं।
युवाओं को इस दिशा में भी सोचना व बढ़ना होगा। अगले 25 साल देश के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत 2047 में आजादी के 100 साल पूरे कर लेगा। बहुत कठिन है नया रास्ता खोजना, लेकिन केवल यही एक उपाय है, हमें प्लान ए , प्लान बी और प्लान सी तक रुकना नही है क्योंकि हमारे पास प्लान जेड तक विकल्प है।