अयोध्या में राम मंदिर बनाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट में चले लंबे मुकदमे के बाद आया निर्णय है।
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बोर्ड और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के कारण ही 6 दिसम्बर को बाबरी मस्जिद ढहाई गई, तब न मस्जिद गिरती न आज मंदिर का यूं निर्माण शुरू होता। उनके ऐसे ही बयानों ने देश में बाबरी मस्जिद के खिलाफ माहौल तैयार कर दिया था।
भाजपा को हिन्दूू मुसलमान की राजनीति करने का मौका मिला गया जिसके कारण 6 दिसम्बर की घटना हुई। अस्सी के दशक में इन उग्र मुस्लिम संस्थाओं के कारण देश में जो माहौल बना उससे आने वाले खतरे को हमारे लखनऊ के मुस्लिम धर्मगुरू अली मियां ने भाप लिया था।
अली मियां अकेले ऐसे मुस्लिम धर्मगुरू थे जिनकी सभी फिरके के मुसलमान इज्जत करते थे। मुझे याद है बाबरी मस्जिद का मुद्दा जब पूरे उफान पर था और मस्जिद तब टूटी नहीं थी। तब उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘कारवां ए जिन्दगी’ में लिखा था- ‘मैंने खुली आंख से ये देख रहा हूं बाबरी मस्जिद आंदोलन जिस तरह से चलाया गया उसने बहुसंख्यकों के दिलों में हिन्दू जागृति का जोश पैदा कर दिया है।" उन्होंने आगे कहा-"जो बड़े से बड़े हिन्दू पेशवा और प्रचारक पैदा नहीं कर पाए थे।
इस्लामी लिहाज से ये नासमझी और अंधापन ही नहीं मुसलमानों के लिए ये खुदकुशी की तरह है। आपकी करतूतों से पड़ोसी समुदाय में अपने धार्मिक जागरण का खानदानी और दुश्मनी से भरा जोश पैदा हो जाए जो किसी मस्जिद या मरदसे और इस्लामी जीवन शैली के खिलाफ हो।
इनकी ना-अक्ली और ना-समझी इस समस्या का समाधान नहीं होने देगी." सतो अली मियां की सलाह नहीं मानी और आज राम जन्म भूमि मंदिर की नींव पड़ गई। अगर मुस्लिम संगठन अभी हागिया सोफिया जैसे उदाहरण देते रहेंगे तो हालात और बिगड़ेंगे।
ये वक्त है मुस्लिम संगठन धैर्य से काम लें और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें। और ऐसे बयान न दें जिससे दोनों समुदाय में नफरत की खाई और गहरी हो।
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