सोशल मीडिया के एक पक्षीय और उथली सूचनाओं ने मानसिक रूप से नई पीढ़ी में एक अलग तरह की दिव्यांगता को जन्म दे दिया है।
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सोशल मीडिया के एक पक्षीय और उथली सूचनाओं ने मानसिक रूप से नई पीढ़ी में एक अलग तरह की दिव्यांगता को जन्म दे दिया है। अगर समय रहते इसका शमन नही किया गया तो भविष्य बहुत खतरनाक होगा। वह स्पष्ट रूप से कहते है कि गीता औऱ गांधी ही भारत का भविष्य है। इसलिये वह दोनों के आग्रह को लेकर चल रहे हैं। कभी अपनी सख्त पुलिसिया छवि के लिए मशहूर रहे राजाबाबू सिंह आजकल बेहद ही सहज और सरल इंसान की तरह 6 जिलों में पुलिस का चेहरा बदलने में भी लगे हैं।
वे लगातार मैदानी दौरे पर रहते है व्यापारियों, विद्यार्थियों, किसानों,जेल में निरुद्ध कैदियों,जुबेनाइल केंद्रों, हॉस्टल्स में सम्पर्क और संवाद करने का मौका नहीं छोड़ते हैं ताकि आमोखास में पुलिस की डरावनी छवि को बदला जा सके। पुलिस अक्सर पीड़ित से इसलिए दूरी बनाकर चलती है क्योंकि उसे लगता है पीड़ित के मन में पुलिस के प्रति गुस्सा होता है लेकिन राजाबाबू इस धारणा को भी बदलने में जुटे हैं।
पुलिस की सामाजिक छवि को तराशने के लिए वह लगातार ऐसे प्रकल्पों को अंजाम दे रहे है ताकि खाकी आवरण में समाज के दूसरे रंग भी समाहित नजर आएं। ग्वालियर विश्वविद्यालय परिसर में उनके द्वारा चलाया गया सफाई अभियान इसी का हिस्सा है।
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