कोरोना की पहली वैक्सीन भी पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट में बनी जिसमें ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक शामिल थे।
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चुनौतियों के बीच भारत
कोरोना की चुनौतियों से हर मोर्चे पर लड़ते हुए भारत ने इस दिशा में दुनिया को हमेशा एक स्पष्ट राय दी। प्रकृति के साथ ही मनुष्य का विकास निहित है। प्रकृति का दोहन आखिरकार हमारे लिए विनाशकारी सिद्ध होगा। अब यह परिणाम नजर भी आने लगे हैं। इसलिए कोरोना महामारी की विभीषिका झेल चुकी दुनिया शायद इस बात को अब बेहतर तरीके से समझ रही होगी।
याद करिए जब कोरोना वैक्सीन आई तो अमेरिका सहित विकसित देशों ने टीका पर एकाधिकार सा कर लिया था। उन्होंने करोड़ों डोज पहले ही खरीद ली थी। गरीब देशों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया था। ऐसी स्थिति में भारत ने उन्हें मुफ्त वैक्सीन बांटी। जब प्राण संकट में हों तब कोई मददगार आपकी जान बचा ले तो उसका अहसान व्यक्ति जीवन भर नहीं भूलता। भारत का यह कदम ये देश भी कृतज्ञता से स्वीकारते हैं।
अब कोरोना की एक और लहर से दुनिया जूझ रही है। यह संभवत: पिछली लहर की तरह विनाशकारी सिद्ध न हो लेकिन इतना तो तय है कि इस महामारी के जख्मों से उबरने में दुनिया को काफी वक्त लग जाएगा। साथ ही कोरोना पश्चात यह विश्व एक बड़े बदलाव से गुजरेगा इसकी पूरी संभावना है। यह दुनिया पहले जैसी नहीं रह जाएगी। कोरोना महामारी ने भारत को भी काफी कुछ सिखाया।
महामारी से पहले सर्जिकल मास्क तक बाहर से आते थे लेकिन अब देश का हर राज्य मास्क, पीपीटी किट और ऑक्सीजन प्लांट जैसी मेडिकल सुविधाओं के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है। भारत ने कोरोना महामारी की स्वदेशी वैक्सीन भी बनाई। भारत बायोटेक द्वारा बनाई गई यह स्वदेशी वैक्सीन बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने वाला साबित हुई।
कोरोना की पहली वैक्सीन भी पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट में बनी जिसमें ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक शामिल थे। इस तरह से दुनिया की जान बचाने वाली वैक्सीन के निर्माण में भारत का योगदान बहुत बड़ा रहा। भारत ने जिस तेजी से मेडिकल सुविधाओं में खुद को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया है यह आने वाले दिनों में हेल्थकेयर के क्षेत्र में भारत के वैश्विक केंद्र बनने का शंखनाद है।
वर्तमान में भी दुनिया भर से मरीज भारत आते हैं अच्छे और सस्ते इलाज के लिए। लेकिन अब भारत विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ही नहीं बल्कि योग और आयुर्वेद के वैश्विक केंद्र के तौर पर दुनिया भर में दोबारा स्थापित होगा और शीर्ष पर जाएगा। यह भारत के विश्वगुरू बनने का एक बहुत बड़ा अवसर साबित होगा। भारत को कोरोना काल के बाद वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाना होगा।
कोरोना महामारी ने अमेरिका की लाचारी और चीन की साजिश को दुनिया के सामने लाकर रख दिया है।
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दुनिया के सामने साफ हुए चीन के इरादे
कोरोना महामारी ने अमेरिका की लाचारी और चीन की साजिश को दुनिया के सामने लाकर रख दिया है। चीन की बाजारवाद की नीति में निहित उसकी साम्राज्यवादी सोच और कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर उठाए जा रहे सवाल ने उसकी वैश्विक साख को जोरदार धक्का पहुंचाया है। अब चीन के प्रति हर देश के मन में संशय है।
चीन ने न सिर्फ प्रकृति बल्कि अपने मानव संसाधनों का भी पर्याप्त दोहन किया है। कोरोना महामारी के दौरान चीन में कितने लोगों की जान गई इस पर ही कई सारे सवाल हैं। ऐसे में चीन के वैश्विक लीडर बनने के मंसूबों पर यह करारी चोट साबित होगी। कोरोना महामारी के पश्चात वैश्विक लीडर बनने के चीन के इरादों के खिलाफ दुनिया के कई देश आगे आ गए हैं। यह भविष्य में होने वाले संघर्षों की पूर्व पीठि का भी साबित हो सकता है।
भारत के लिए यह परिस्थिति काफी बेहतर है। वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति एक सदभावना स्थापित हुई है। कोरोना महामारी के दौरान भारत ने अमेरिका को रैमडिसिवर दवाएं मुहैया कराई तो मंगोलिया को कोरोना वैक्सीन भी बांटी। इस महामारी ने भारत को भी कुछ जरूरी सबक सिखाए हैं। भारत अपना सबक सीख कर मजबूती से आगे बढ़ेगा।
आत्मनिर्भर भारत की अगुवाई में दुनिया के देश खतरा महसूस नहीं करेंगे। यह भारत की वैश्विक स्वीकार्यता को स्थापित करेगा। भारत कभी भी विस्तारवादी नीति का पहरूआ नहीं रहा है। दुनिया को अब एक ऐसे ही अगुवा की जरूरत है जो किसी दूसरे देश के लिए खतरा न साबित हो।
आज भारत के युवा दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियों में सबसे बड़े पदों पर हैं। गूगल से लेकर माइक्रोसॉफ्ट तक का मुखिया भारतीय है। ट्विटर की कमान भी एक भारतीय के ही हाथों में है। भारत ने दुनिया के बेहतरीन सीईओ तो पैदा कर रहा है लेकिन उसे विश्वगुरू बनने के लिए वैश्विक कंपनियां भी भारत में स्थापित करनी होगी।
सरकारों को वह माहौल बनाना होगा जिससे युवा भारत में ही स्टार्टअप शुरू करें और उसे दुनिया की शीर्ष कंपनियों में शामिल कराएं। सरकार ने इसका बुनियादी ढांचा तो बना दिया है लेकिन इस क्षेत्र में युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। भारतीय दिमाग दुनिया भर की टॉप कंपनियों को आगे बढ़ा रहे हैं सोचिए अगर उचित अवसर और माहौल बना दिया गया तो ये युवा भारत को कहां से कहां तक पहुंचा सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि भारत इस ऐतिहासिक मौके को गंवाए नहीं। भारत इस युगधर्म से मुंह न चुराए। भारत की तरफ दुनिया उम्मीद की नजरों से देख रही है। कोरोना महामारी के झटके के बाद भारत दोबारा उठ खड़ा हुआ है।
भारत की चाल में वहीं रवानी होनी चाहिए जो इसकी युवा आबादी की चाल में है। भारत को दुनिया से कदमताल करने के लिए पूरी तरह कमर कस लेना होगा। वरना इस ऐतिहासिक मौके को चूकने के बाद भारत के पास सिवाय अफसोस करने के कोई और विकल्प शेष नहीं बचेगा।
चीन की बढ़ती ताकत और उसकी विस्तारवादी नीति का शिकार भारत को आज नहीं तो कल होना ही पड़ेगा। इसलिए जरूरी है कि भारत कोरोना काल के बाद के अवसरों और चुनौतियों को ठीक-ठीक पहचान ले और उसके अनुरूप रणनीति तैयार कर ले।
कोरोना महामारी के बाद दुनिया में बदलाव आने अवश्यंभावी हैं। भारत के पास उस जीवन दर्शन की थाती मौजूद है जो प्रकृति को मां मानते हुए विकास करना जानती है। भारत ने आध्यात्मिक तौर पर दुनिया को सदियों से राह दिखाई है। राम,कृष्ण,बुद्ध और गुरूनानक से होता हुआ यह सिलसिला स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी तक आता है।
अब वक्त है कि भारत अपने आध्यात्मिक और नैतिक बल से संचालित होकर वैश्विक नेता बनने की दिशा में प्रयास करे। कोरोना महामारी ने यूं तो हमसे बहुत कुछ छीन लिया है लेकिन हर आपदा बहुत कुछ सिखा कर भी जाती है।
कोरोना ने भारत को बहुत कुछ सिखाया है। जैसे कि हम आपातकालीन सेवाओं और दवाईंयों के लिए दूसरे देशों के मोहताज नहीं रह सकते। यह भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एक जरूरी सबक साबित होगा। कोरोना महामारी ने भारत के वैश्विक लीडर बनने की भूमिका भी लिख दी है।
अब यह भारत पर है कि वह इस मौके को यूं ही जाने देता है या आपदा को अवसर बनाकर देश और दुनिया की तकदीर बदलता है। यह भारत से अधिक दुनिया के लिए जरूरी है कि उसे भारत की दृष्टि मिले। विश्वकल्याण से संचालित भारत जैसी महाशक्ति ही दुनिया के बिगड़ते संतुलन को बचा सकती है। कोरोनाकाल में बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार हुए हैं, कई बच्चों की पढ़ाई छूट गई है।
भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना पड़ेगा कि देश की बड़ी युवा आबादी में निराशा न घर कर जाए। युवाओं के लिए कार्यक्रम प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी देश के लिए इतनी बड़ी युवा आबादी वरदान है। जरूरी यह है कि हम इस बेशकीमती मानवसंसाधन का समुचित प्रयोग करें।
कोरोना महामारी के पश्चात बदली हुई वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए यह सुनहरा अवसर है। भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनना होगा जिसकी दिशा में हो रहे प्रयासों पर हमने नजर डाली। आत्मनिर्भर भारत की सफलता में ही विश्व का भी मंगल समाया हुआ है। कोरोना महामारी के सबकों को सीखते हुए अगर भारत सही दिशा में और तेजी और मजबूती से बढ़ता है तो यह कहने में कोई संशय नहीं है कि 21वीं सदी में यह कोरोनाकाल भारत की अगुवाई के शंखनाद के तौर पर याद रखा जाएगा।
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