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हनुमान जी की चारित्रिक प्रेरणा और ऑपरेशन सिंदूर: पवनपुत्र के साहस और बुद्धिमत्ता का अद्वितीय संगम

सार

ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से साहस और बुद्धिमत्ता का अद्वितीय संगम देखने को मिला है। हनुमान जी ने लंका दहन करते समय केवल बल का नहीं, रणनीति का भी प्रयोग किया था। इसी तरह ऑपरेशन सिंदूर में भी भारतीय सेना ने केवल ताकत का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि एक स्पष्ट संदेश दिया की भारत शांति की आशा करता है, मगर कमजोर नहीं है।
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डीजीएमओ की प्रेस वार्ता में सैन्य अधिकारी। - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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देश में जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, तो यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, यह वीर हनुमान जी के साहस, निष्ठा और रणनीतिक कौशल का जीवंत स्वरूप था। ऑपरेशन सिंदूर हनुमान जी की प्रेरणा का प्रतीक है, हनुमान जी द्वारा माता सीता को अपनी भक्ति दर्शाने के लिए जो सिंदूर लगाया गया था उसी तरह से आज ऑपरेशन सिंदूर देश की सुरक्षा में लगे सैनिकों के मस्तक पर गर्व से दमक रहा है। इस ऑपरेशन द्वारा भारतीय सेना ने न केवल देश की रक्षा की, बल्कि उस धर्म की पुनः पुष्टि की, जिसके लिए हनुमान जी ने समर्पण का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया था।

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देशवासियों को यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला की जैसे वीर हनुमान ने प्रभु श्रीराम के लिए हर कार्य को अपना कर्तव्य समझा, वैसे ही हमारे देश की सेना ने देश के लिए समर्पण भाव से ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। जिसमें न कोई स्वार्थ, न कोई निजी चाह थी और लक्ष्य था तो एक मात्र वह भी राष्ट्र की रक्षा, मां भारती की सुरक्षा।

ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से साहस और बुद्धिमत्ता का अद्वितीय संगम देखने को मिला है। हनुमान जी ने लंका दहन करते समय केवल बल का नहीं, रणनीति का भी प्रयोग किया था। इसी तरह ऑपरेशन सिंदूर में भी भारतीय सेना ने केवल ताकत का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि एक स्पष्ट संदेश दिया की भारत शांति की आशा करता है, मगर कमजोर नहीं है।
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शत्रु के विनाश में भी धर्म का पालन किया गया था। जैसे हनुमान जी ने केवल अधर्म के विनाश का व्रत लिया था, वैसे ही ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य केवल आतंक के अड्डों को खत्म करना था, आतंक के आकाओं का अंत करना था, निर्दोषों पर प्रहार करना नहीं था।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना और भारत ने हनुमान जी के आदर्श का पालन करते हुए उस मंत्र का प्रयोग किया था जिसे अशोक वाटिका उजाड़ते समय हनुमान जी ने किया था। अशोक वाटिका उजाड़ते समय हनुमान जी ने कहा था कि- जिन्ह मोहि मारा ते मैं मारे। ठीक इसी प्रकार भारतीय सेना ने भी मात्र उन्हीं पर प्रहार किया जिन्होंने देश के मासूमों को मारा था। इसे किसी तरह का कोई अपराध नहीं कहा जा सकता है। यह तो क्रिया की प्रतिक्रिया का प्राकृतिक सिद्धांत है। जिसे भारतीय सेना ने अपना मंत्र बनाकर देश सेवा का कार्य पूर्ण किया है।

ऑपरेशन की सफलता के बाद जब एयर मार्शल एके भारती ने मीडिया के सामने श्रीरामचरितमानस की चौपाई के माध्यम से संदेश दिया की "विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति॥ तो यह केवल एक रामचरितमानस का वाक्य नहीं था, यह भारत की नीति का उद्घोष भी था। इस चौपाई में छिपा संदेश स्पष्ट है। जब बार-बार विनम्रता का उत्तर छल और हिंसा से मिले, तब रघुकुल की परंपरा केवल धैर्य नहीं, न्यायिक कोप भी सिखाती है।

जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, तो हर हिंदुस्तानी की आंखों में वही तेज चमका, जो उस दिन चमका था जब हनुमान जी ने लंका को धधकती मशाल बना दिया था। यह कोई सामान्य सैन्य ऑपरेशन नहीं था। यह पराक्रम की परंपरा का पुनर्जागरण था। एक ऐसा पराक्रम जो त्रेतायुग में हनुमान जी के लंका दहन से शुरू होकर, 21वीं सदी में देश में आतंक के अंत तक पहुंचा है।

आज जब विश्व भारत की ओर देखता है, तो वह केवल तकनीकी या सैन्य शक्ति नहीं देखता वह देखता है एक ऐसे राष्ट्र को, जो अंजनीपुत्र की तरह निष्ठावान, पराक्रमी और धर्मनिष्ठ है। ऑपरेशन सिंदूर उस मर्यादा का प्रतीक, जो भारत ने लंबे समय तक निभाई।

जब पड़ोसी देश लगातार उल्लंघन करते हैं, जब निर्दोष नागरिकों की शांति को बार-बार छिन्न-भिन्न किया जाता है, तब वह धैर्य, जो हमारी ताकत था, एक बिंदु पर आकर निर्णय की मांग करता है। ऑपरेशन सिंदूर श्रीराम जी के उसी निर्णय की तरह है कि जब विनय असफल हो जाए, तो शक्ति का प्रयोग धर्म बन जाता है।

श्रीराम जी का क्रोध, केवल युद्ध का आदेश नहीं था, बल्कि यह भी एक चेतावनी थी कि प्रेम, संवाद, और शांति की नींव केवल एकतरफा विनम्रता पर नहीं टिक सकती। जब सामने वाला केवल हठ और छल समझे, तब भय एक आवश्यक तत्त्व बन जाता है। ऑपरेशन सिंदूर इसी चेतना का आधुनिक रूप है। यह एक राष्ट्र की वह चेतावनी है, जो शांति चाहती है, परंतु उसकी कीमत अपनी अस्मिता पर नहीं चुकाना चाहती।

ऑपरेशन सिंदूर हमें रामायण के कालखंड की याद दिलाता है जब मर्यादा और मूक सहिष्णुता को भ्रमित नहीं किया जाता था। आज भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन वह राम की उस चौपाई को नहीं भूला है भय बिनु होइ न प्रीति। यही कारण है कि जब-जब सीमाओं पर अनुनय-विनय असफल होता है, तब-तब सिंदूर जैसी कार्रवाइयाँ अपरिहार्य हो जाती हैं। हनुमान जी ने कहा था की राम काज कीन्हें बिनु, मोहि कहां विश्राम, और इसी मंत्र पर चलते हुए आज भारतीय सेना कह रही है कि राष्ट्र काज कीन्हें बिनु, हमहिं कहां विश्राम।

दो देशों के बीच चल रही यह लड़ाई आतंक के खिलाफ विचारों की है। भारतीय सेना द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर न केवल एक सैन्य ऑपरेशन था बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक गाथा का भी एक मौन उद्घोष था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें यह सिखने को मिला की धर्म और न्याय के लिए युद्ध को भी स्वीकार करना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब हमारे सैनिक सीमाओं के पार जाकर अपने देश की अस्मिता की रक्षा कर रहे थे तो यह कार्य केवल सैन्य साहस तक सीमित नहीं था। बल्कि ‘धर्म रक्षार्थ युद्धाय’ की भावना का भी परिचायक बन गया था।

ठीक वैसे ही जैसे राम ने रावण से युद्ध केवल व्यक्तिगत अपमान के लिए नहीं, बल्कि अधर्म के उन्मूलन और धर्म की स्थापना हेतु किया था। आपरेशन सिंदूर ने दुनिया भर को बता दिया कि युद्ध केवल बल का नहीं, बुद्धि, नीति और आदर्शों का भी संघर्ष होता है। भारत की आत्मा तब सबसे प्रबल होती है जब शस्त्र (सैन्य शक्ति) और शास्त्र (सांस्कृतिक चेतना) एक साथ चलते हैं। ऑपरेशन सिंदूर और रामचरितमानस दोनों हमें यही सिखाते हैं कि युद्ध तभी न्यायसंगत है जब उसका उद्देश्य अधर्म का अंत और लोक कल्याण की भावना के लिए समर्पित होता है।

इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा की इस ऑपरेशन के दौरान जब देश के सैनिक सीमाओं पर आतंक के खिलाफ लड़ रहे थे तब उनके पीछे राम की नीति, हनुमान की भक्ति, और भारत की अस्मिता साथ देखने को मिल रही थी। ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की वीरता, भाजपा का संकल्प और वीर हनुमान जैसी शक्ति की त्रिमूर्ति है। जो सिद्ध करती है कि जब रणनीति, नेतृत्व और प्रेरणा का मेल होता है, तब असंभव को भी संभव किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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