इस सवाल का जवाब खोजने के लिए मेरी टीम वायरसों के इतिहास से मिले सबक का विश्लेषण कर रही है। हमने वायरसों का एक कैटलॉग भी तैयार किया है, जिससे पता लगाया जा सकता है कि कौन-सा वायरस कितना खतरनाक है। दरअसल, महामारियां कई तरह की होती हैं, लेकिन हाल में सबसे बड़ी वजह ऐसे वायरस रहे हैं, जिनके जीनोम आरएनए से बने होते हैं, न कि डीएनए से। हमने वायरसों की जो सूची बनाई है, उसमें शामिल दो-तिहाई वायरसों के मामले में संक्रमित व्यक्ति से संक्रमण फैलने की संभावना बहुत कम होती है। इन्हें जूनोटिक वायरस कहा जाता है, यानी जानवरों से इन्सानों में फैलने वाला वायरस। जैसे कि रेबीज। ज्यादा खतरा उन वायरसों से है, जिनमें पहले से ही एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने की क्षमता है, जैसा कि सार्स-कोविड के कई वैरिएंट्स के मामले में देखा गया था। हालांकि, ऐसे वायरस भी हैं, जो इन्सानों के बीच फैलने में सक्षम हैं, पर अब तक उनसे संक्रमण के सीमित मामले ही सामने आए हैं। हमारी सूची में शामिल कुछ दुर्लभ वायरस अब जाने-पहचाने हो चले हैं। इनमें से एक है एंडीज हंतावायरस, जो हाल ही में एक जहाज पर फैले संक्रमण के लिए जिम्मेदार माना गया। दूसरा है बुंडिबुग्यो इबोला वायरस, जो अभी मध्य अफ्रीका में फैल रहा है। हमारा डाटा यह अनुमान लगाने में भी मदद करता है कि भविष्य में महामारी फैलाने वाला वायरस, जिसे कभी-कभी ‘डिजीज-एक्स’ कहा जाता है, कैसा हो सकता है।
एंडीज और बुंडिबुग्यो एक जरूरी सबक भी सिखाते हैं, वह यह कि दोनों ही वायरस पता चलने से पहले हफ्तों तक फैलते रहे थे। कोविड के साथ भी ऐसा ही हुआ था। नए वायरस का तेजी से पता लगाने और उन्हें समझने से अगली महामारी को शुरुआती बढ़त नहीं मिलेगी और इससे नुकसान को कम किया जा सकता है।
-द कन्वर्सेशन