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जीवन धारा: संघर्ष और दुखों से घबराना कैसा, वही आपको आपकी असली ताकत से मिलाता है

अब्राहम लिंकन Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 15 Jul 2026 07:23 AM IST

सार

जैसे शांत समुद्र यह नहीं बताता कि जहाज कितना मजबूत है, बल्कि तूफान उसकी परीक्षा लेते हैं। वैसे ही, जिस मनुष्य ने जीवन में कभी मुश्किलों का सामना नहीं किया, वह अपनी शक्ति को नहीं जान सकता।
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जीवन धारा - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


मैंने देखा है कि सबसे अंधेरी रातों में भी उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं होती। वह धीरे से कहती है-एक कदम और चलो। और, कई बार वही एक कदम मनुष्य के पूरे जीवन की दिशा बदल देता है। आगे वही बढ़ता है, जो कांपते हुए भी सही काम करने की गांठ बांध लेता है। मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति उसका कठोर होना नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बाद भी मानवीय बने रहना है। जब तुम्हें लगे कि तुम्हारे प्रयास व्यर्थ जा रहे हैं, तब अपने चरित्र को देखो। सफलता और सम्मान देर से मिल सकती है, लेकिन चरित्र उसी क्षण बनता है, जब तुम कठिन समय में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ते। यही वह संपत्ति है, जिसे कोई तुमसे छीन नहीं सकता। और, यदि कभी लगे कि तुम्हारा संघर्ष बहुत बड़ा है, तो याद रखना कि इतिहास में किसी भी महान परिवर्तन का जन्म सुविधाओं से नहीं हुआ। स्वतंत्रता व मानव गरिमा की कीमत किसी न किसी ने अपने दुख से चुकाई है। यदि तुम्हारा संघर्ष किसी ऊंचे उद्देश्य के लिए है, तो वह व्यर्थ नहीं जाएगा, चाहे संसार उसे तुरंत समझे या नहीं।


यदि संघर्ष से सीखने को तैयार हो, तो वह तुम्हें उस मनुष्य में बदल देगा, जिसकी कल्पना तुमने भी कभी नहीं की थी।  इसलिए, संघर्ष और दुखों से घबराना कैसा? उनसे भागोगे, तो केवल भय साथ रहेगा। उनका सामना करोगे, तो संभव है कि अंत में तुम स्वयं को पहले से कहीं अधिक साहसी, विनम्र व मानवीय पाओ।
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