मसलन साइबर अटैक सेबचाव की पुख्ता व्यवस्था के साथ यूक्रेन से आने वाले शरणार्थियों के लिए भी उचित व्यवस्था शुरू हो चुकी है।
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वहीं, ब्रिटेन ने स्वीडन को यह आश्वस्त कर दिया है कि अगर रूस उस पर हमला करता है तो ब्रिटेन सहायता करेगा। स्वीडन के हितैषियों की सूची में जल्द ही कुछ और देशों के नाम भी जुड़ने की उम्मीद है। दूसरे पड़ोसी देश भी अब खुलकर रूस के खिलाफ अपनी एकजुटता दिखाएंगे और जरूरत पड़ने पर स्वीडन की मदद करेंगे।
बहरहाल, आम जनता इस खबर से घबराई हुई जरूर है। पिछले एक हफ्ते के अंदर स्वीडन और फिनलैंड की जनता के बीच एक सर्वे कराया गया कि कितने लोग इन दोनों देशों के नाटो में शामिल होने के पक्ष धर हैं। यह पता चला कि रूस के रूख को देखते हुए देश की बहुसंख्यक आबादी नाटो में शामिल होने की पक्षधर है। माना जा रहा है कि रूसी लड़ाकू विमानों का स्वीडिश सीमा में घुसना एक सुनियोजित घटना है। रूस यह संदेश देना चाहता है कि स्वीडन का यूक्रेन के साथ खड़े रहना उसे पसंद नहीं है। स्वीडन से यूक्रेन को मिल रही आर्थिक सहायता और सैन्य मदद रूस को नागवार गुजर रहा है। आपको बता दूं कि स्वीडन ने 1939 के बाद पहली दफा किसी देश को युद्ध में सैन्य सहायता दे रहा है। शायद यही वजह है कि रूस, स्वीडन से नाराज चल रहा है।
वस्तुस्थिति को भांपते हुए स्वीडन की प्रधानमंत्री माग्देलना एंडरसन ( Magdalena Andersson) ने भी सेना को शस्त्र सज्जित रहने का इशारा कर दिया है। एक सांझा प्रेस कांफ्रेंस कर स्वीडन और फिनलैंड की प्रधानमंत्री ने यह बताया है कि दोनों देश अपने सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करेंगे। साथ ही नाटो के साथ बातचीत को भी मजबूत बनाया जाएगा। फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मरीन (Sanna Marin) ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था और भी चौकस करने की जरूरत है। इसी दिशा में दोनों देशों के प्रधानमंत्री और शीर्ष अधिकारी बातचीत कर रहे है। वहीं स्वीडन की प्रधानमंत्री मैगदेलेना एंडरसन (Magdalena Andersson) ने कहा कि उनकी फिनलैंड यात्रा दोनों देशों के बीच तालमेल बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
उन्होंने कहा कि वेस्वीडन पर तत्काल सैन्य खतरे को नहीं देख रही हैं। जबकि फिनलैंड की प्रधानमंत्री में भी तत्काल किसी सैन्य खतरे से इंकार कर दिया। लेकिन भविष्य की आशंकाओं को देखकर किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार रहने की ओर इशारा जरूर किया है। यह भी महत्वपूर्ण है कि इन सब के बीच स्वीडन में नगरपालिकाओं को आपातकालीन प्रबंधन के लिए तैयार भी किया जा रहा है। मसलन साइबर अटैक से बचाव की पुख्ता व्यवस्था के साथ यूक्रेन से आने वाले शरणार्थियों के लिए भी उचित व्यवस्था शुरू हो चुकी है। वहीं, स्वीडिश मीडिया युद्ध की स्थिति बनने पर नागरिकों के लिए जरूरी जानकारी, तैयारी और नियम कायदे के बारे में निरंतर लिखना भी शुरू कर चुकी है। यह आम नागरिकों को मानसिक रूप से विपरीत परिस्थितियों के लिए तैयार करने का प्रयास माना जा सकता है।
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