रितेश ने मुख्य काम जो किया वह बहुत मूल्यवान और एक तरह से रिकॉर्ड है।
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क्या बदलाव किए रितेश ने
रितेश ने मुख्य काम जो किया वह बहुत मूल्यवान और एक तरह से रिकॉर्ड है। रितेश और उनके साथ की टीम ने टिमरनी के सरकारी स्कूल में बच्चों का ड्राप आउट कम करने और पाठ्यक्रम को रोचक बनाने के लिए कक्षा पहली से आठवी तक के सम्पूर्ण पाठ्यक्रम के 124 अध्यायों को का जिंगल बनाया और सभी विषयों को इसमें जोड़ा।
इसका फायदा यह हुआ कि बच्चे मध्यान्ह भोजन के लालच में स्कूल आते थे और खाना खाकर भाग जाते थे परन्तु संगीत से पढ़ाई होने के कारण शुरुआत में उन्हें यह मनोरंजक लगा और बाद में धीरे-धीरे वे सीखने सिखाने में रुचि लेने लगे।
रितेश ने दूसरा काम किया 5 हजार आदिवासी महिलाओं को कार्यात्मक साक्षरता सिखाने का किया और इस दौरान उनके साथ ग्राम विकास और महिला सशक्तिकरण का का काम भी जमकर किया। शिक्षा के काम के दौरान टिमरनी और आसपास के 16 गांवों के 112 बच्चों को सीधे स्कूल से जोड़ा जो हर शनिवार को शनि महाराज बनाकर भिक्षावृत्ति में संलग्न थे।
यही नहीं इसके बाद में युवाओं के साथ काम किया जिसमे उन्होंने युवाओं को एक वर्ष की फेलोशिप दी और सालभर में 40 दिन की यात्राएं निकालकर जागृति का काम किया। इसमें युवा ना मात्र संविधानिक मूल्यों को सीखते थे, बल्कि अपने जीवन में उतारकर अच्छे नागरिक बनने का प्रयास करते थे।
सन् 2017 से शेडो ने अपने कामों में मूल्यों पर ध्यान देना शुरू किया और यह पाया कि काम की प्रक्रियाएं ही हमें संज्ञानात्मक व्यवहार को प्रभावित करती हैं। रितेश कहते हैं- “हमारा मानना है कि यह व्यवहार हमारे खुलेपन, सबको समानता से देखने और बराबरी का व्यवहार करने से विकसित होता है सशक्त होता है।
इसका अर्थ यह है कि हम अपने पुराने ज्ञान और अनुभव से नई परिस्थति में निर्णय लेते हैं, इस ज्ञान और अनुभव को मिलाकर निर्णय जब भी लेते हैं तो वह काफी उपयोगी और सबके लिए सबके हित में होता है इस तरह से हम युवाओं को तैयार करते हैं, ताकि वे जागरूक नागरिक बनकर समाज में जिम्मेदार नागरिक बनें. आज शेडो संस्था टिमरनी की दो बस्तियों में, 16 गांवों में तथा हरदा में काम कर रही हैं।
बच्चों के बीच काम करते हुए रितेश।
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संगीत की प्रतिभाओं को दिखाया रास्ता
रितेश कहते हैं- काम के दौरान फंड का दबाव हमेशा होता है और यदि डोनर एजेंसी के दबाव और अजेंडे पर काम नहीं करना है तो अपना रेवेन्यु मॉडल विकिसत करना पड़ता है और इसके लिए उन्होंने अपने शौक संगीत को एक बार पुन: माध्यम बनाया और टिमरनी में छोटा सा संगीत का स्टूडियो बनाया।
शुरुआत में यह बहुत कम संसाधनों के साथ शुरू किया, परन्तु धीरे-धीरे आज यह इस क्षेत्र का बड़ा महत्वपूर्ण स्टूडियो है। इसमें रितेश ने वो सभी संसाधन जुटाए हैं जो एक अच्छे संगीत और रिकॉर्डिंग के लिए आवश्यक होते हैं।
वे कहते हैं “गांवों में और आदिवासी इलाकों में कम करते हुए हमने पाया कि शिक्षा तो महत्वपूर्ण है ही परन्तु हमारी संस्कृति खत्म हो रही है, हमारा लोक संगीत और लोक वाद्य यंत्र भी खत्म हो रहे हैं, लोक गायकों को कोई स्थान या प्लेटफॉर्म नहीं है, तकनीकी रूप से वे इतने दक्ष नहीं कि वे अपनी बात गीत और लोक परमपराएं आम लोगो तक पहुंचा सकें, तो उन्होने “लोक विधान” फेलोशिप आरंभ की जिसमे स्थानीय ग्रामीण युवाओं को एक वर्ष तक वे सिखाते हैं।
उनके गीत आदि जो वाचिक परम्परा में है- को रिकॉर्ड करते है, सीडी आदि बनवाते हैं और उन्हें फिर स्वतंत्र रूप से अपना बैंड बनाने में सहायता करते हैं। यह फेलोशिप नगद ना होकर व्यक्ति की न्यूनतम आवश्यकताओं पर बातचीत करके दी जाती है।
मसलन हिमांशु कौशल नामक एक युवा ने बातचीत में बताया कि उसे उसके व्यक्तिगत खर्च के लिए साल भर में मात्र छब्बीस हजार रुपयों की आवश्यकता होगी तो उन्होंने उसे दो किश्तों में ये राशि दी और आज हिमांशु बेहतरीन गायक है, देश में प्रसिद्ध हो रहे हैं और वे जगह-जगह निकलने वाली कबीर यात्राओं में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
इस तरह लोक विधान फेलोशिप के तहत अभी तक 20 लोक गायक युवाओं को सपोर्ट किया गया है और यह क्रम जारी है। “अब हमें किसी से फंड के लिए निर्भर नहीं रहना पड़ता चाहे सामाजिक काम हो या संगीत का, हमारा स्टूडियो हमें इतना कमाकर दे देता है कि हम अपनी पसंद का काम कर सकें, लोगों की आर्थिक रूप से मदद कर सकें और हमारे रिकॉर्डिंग के भाव भी व्यवसायिक नहीं है, न्यूनतम पांच सौ रूपये में भी हम अच्छी गुणवत्ता का रिकॉर्डिंग करके देते हैं जो बड़ी बात है– सब लोग अपनी पसंद का काम करते है, हमारा स्टूडियो टिमरनी ही नहीं बल्कि आसपास के इलाके के लिए सीखने सिखाने का अड्डा है, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास और संगीत खासकरके लोक संगीत पर बड़ा काम हो रहा है।
हम गणगौर से लेकर स्थानीय लोक जीवन की अच्छी और वैज्ञानिक मान्यताओं को प्रमोट कर रहें हैं, कबीर सिंगाजी और सूफी परम्परा के संगीत को तरजीह दे रहें हैं। इस तरह काम नया है हमारे इरादे बड़े है और हम लगे हुए है कि कुछ अच्छा कर पाएं” रितेश कहते है जिनके साथ पांच युवाओं की सशक्त टीम है और कोई बॉस नहीं है।
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