दुबई में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का सेमीफाइनल मंगलवार को भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जाएगा। मैच से 36 घंटे पहले कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा के वजन और प्रदर्शन को लेकर एक अनावश्यक टिप्पणी कर माहौल गरमा दिया है। हालांकि, तत्काल उनकी टिप्पणी से कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने न केवल पार्टी की ओर से किनारा किया, बल्कि शमा मोहम्मद की टिप्पणी को सोशल मीडिया से हटवाया भी।
निश्चित ही, शमा मोहम्मद ने पार्टी को संकट में डाला है। रोहित शर्मा के परफार्मेंस को लेकर शमा मोहम्मद की चिंता एकबार को जायज ठहराई जा सकती है, लेकिन उनके वजन को लेकर बोलना कतई उचित नहीं कहा जा सकता। रोहित की कप्तानी में टीम इंडिया निरंतर अच्छा खेल रही है।
आईसीसी टूर्नामेंट्स के पिछले 22 मुकाबलों में 21 में टीम इंडिया ने रोहित के नेतृत्व में जीत हासिल की है। संभव है कि चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट को अलविदा भी कह दें।
38 वर्ष के होने जा रहे रोहित शर्मा जून 2007 से इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं। वो अब तक 264 वनडे में 11064 रन, 159 टी-20 में 4231 रन और 67 टेस्ट में 4301 रन बना चुके हैं। उन्होंने तीन फार्मेट में 49 शतक और 107 अर्धशतक लगाए हैं। वो दुनिया के सर्वाधिक छक्के लगाने वाले खिलाड़ी भी हैं। उन्होंने तीनों फॉर्मेट में 633 छक्के लगाए हैं।
वनडे में वो तीन बार दोहरा शतक लगाने वाले एकमात्र इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं। वनडे में बतौर ओपनर वो सबसे तेज 9000 रन बनाने वाले खिलाड़ी भी हैं। जब रोहित पिच पर खड़े होते हैं तो विपक्ष बॉलर्स की टांगें कांप रही होती हैं। वनडे में रोहित ने अब तक 140 मैचों की कप्तानी की है, जिसमें 102 मैच जीते हैं, जबकि 33 में हार, 3 ड्रॉ और 1 मैच टाई रहा है। उनका जीत का प्रतिशत 70 से अधिक है।
कुल मिलाकर रोहित के बतौर कप्तान प्रदर्शन में कोई समस्या नहीं है। हालांकि, रोहित की पिछली 9 पारियों को देखें तो उन्होंने केवल एक शतक लगाया है। बाकी आठ मैचों में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। यहां शमा की आलोचना ठीक नजर आती है।
वजन के कारण फिटनेस पर असर?
अब जरा रोहित के वजन पर नजर डालते हैं। क्या अधिक वजन के कारण उनकी फिटनेस पर असर पड़ रहा है? शायद बहुत नहीं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) एक प्रोफेशनल संस्था है, जो खिलाड़ियों की फिटनेस का पूरा ध्यान रखती है। अनफिट खिलाड़ी को टीम में जगह नहीं मिलती, भले वो कप्तान ही क्यों न हो?
एक समय जब टीम इंडिया के खिलाड़ियों को कठिन यो-यो टेस्ट पास करना पड़ता था, तब भी रोहित उसे पास करते थे। टीम इंडिया के फिटनेस कोच का तो यहां तक कहना था कि रोहित उतने ही फिट हैं, जितने विराट कोहली। रोहित 50 ओवर टीम के लिए फील्डिंग करते हैं और बतौर बल्लेबाज कभी एक रन चुराने से चूकते नहीं हैं। रोहित के वजन को लेकर उनकी फिटनेस पर सवाल खड़ा करना सही नहीं है।
इंटरनेशनल क्रिकेट में यदि मोटे और वजन वाले क्रिकेटर्स की बात करें तो श्रीलंका के पूर्व कप्तान अर्जुन राणातुंगा को कौन भूल सकता है। 1996 के क्रिकेट वर्ल्ड कप के दौरान भारी पेट के साथ वो पिच के बीच रन लेने के लिए तेजी से दौड़ा करते थे। उन्होंने श्रीलंका को न केवल वर्ल्ड कप जीताया, बल्कि वो देश के सबसे सफल कप्तान भी रहे।
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम-उल-हक की भी वजन को लेकर आलोचना होती थी, लेकिन उन्होंने लंबे समय अपनी टीम का नेतृत्व किया, बल्कि उनकी बल्लेबाजी से विरोधी टीमें डरा करती थीं। शमा मोहम्मद को रोहित शर्मा के वजन को लेकर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। विशेषकर चैंपियंस ट्रॉफी के बीच में तो बिल्कुल नहीं। वैसे भी नेताओं को खिलाड़ियों पर अनावश्यक बोलने से पहले थोड़ा सोचना चाहिए। कप्तान का आकलन टीम के प्रदर्शन से होना चाहिए, न की उसके अपने वजन से।
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