62.6 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं अधिक गति से गाड़ी चलाने के कारण होती हैं।
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सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण
भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कई कारण हैं, जो सीधे तौर पर दुर्घटनाओं की संख्या और मौतों में वृद्धि का कारण बन रहे हैं। एनसीआरबी को राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाएं अत्यधिक गति, मोबाइल फोन का उपयोग, शराब और नशीली दवाओं का सेवन कर वाहन चलाने, गलत साइड या लेन पर वाहन चलाने, अनुशासनहीनता, लाल बत्ती पार करने, हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करने, वाहनों की स्थिति, मौसम की स्थिति, सड़क की स्थिति आदि जैसे अनेक कारणों से होती हैं।
मसलन लापरवाही दुर्घटनाओं के लिए सबसे बड़ा कारण है। कई चालक यातायात नियमों का पालन नहीं करते। जैसे कि गति सीमा को दरकिनार करना, हेलमेट या सीट बेल्ट का उपयोग न करना, सिग्नल जंप करना और शराब पीकर गाड़ी चलाना।
देश में कई स्थानों पर सड़कों का बुरा हाल है। खराब सड़क डिजाइन भी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक ट्रैफिक और अव्यवस्थित पार्किंग के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती हैं। चालकों का अति-आत्मविश्वास, थकावट, और ध्यान की कमी से भी दुर्घटनाएं होती हैं।
धुंध, बारिश और अन्य मौसम संबंधी कारण भी सड़क दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। 62.6 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं अधिक गति से गाड़ी चलाने के कारण होती हैं, जिनमें 1,00,726 मौतें और 2,71,661 लोग घायल होते हैं।
इसके बाद दूसरी बड़ी वजह है, लापरवाही से वाहन चलाना और ओवरटेक करना, जो 24.7 प्रतिशत दुर्घटनाओं का कारण बनता है और इसके परिणामस्वरूप 45,161 लोगों की मृत्यु और 1,00,901 लोग घायल होते हैं। इसके अलावा, 2.2 प्रतिशत दुर्घटनाएं खराब मौसम की स्थिति के कारण होती हैं, जैसे बारिश, धुंध या अन्य प्रतिकूल मौसम।
असामयिक मौतें और उनकी सामाजिक-आर्थिक क्षति
सड़क दुर्घटनाओं में असामयिक मौतों के परिणामस्वरूप न केवल व्यक्तियों का जीवन समाप्त हो जाता है, बल्कि यह समाज और देश की आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डालता है। असामयिक ही व्यक्ति का जीवन उस उम्र में समाप्त हो जाता है, जब वह परिवार का मुख्य आर्थिक कर्ता होता है।
इस प्रकार की मौतें परिवारों के लिए अत्यधिक मानसिक और आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और दुर्घटनाओं के कारण होने वाले नुकसान का मूल्य बहुत बड़ा होता है।
यह सिर्फ मानव जीवन का नुकसान नहीं होता, बल्कि यह स्वास्थ्य देखभाल, उपचार और बचाव कार्यों पर होने वाले खर्चों में भी वृद्धि करता है। इसके अलावा, दुर्घटनाओं के कारण यातायात में होने वाली देरी, व्यापारिक नुकसान, और उत्पादकता में कमी जैसे आर्थिक नुकसानों का भी सामना करना पड़ता है।
सड़कों की गुणवत्ता में सुधार और बेहतर डिजाइनिंग से भी सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
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भारत में सड़क सुरक्षा के उपाय और उनके प्रभाव
भारत में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें प्रमुख रूप से सड़क सुरक्षा माह का आयोजन शामिल है। इसका उद्देश्य लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना और यातायात नियमों के पालन की आदत डालना है। सड़क सुरक्षा के उपायों में सख्त यातायात नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है।
सड़कों की गुणवत्ता में सुधार और बेहतर डिजाइनिंग से भी सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। नई तकनीकों जैसे जीपीएस ट्रैकिंग, ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम, और इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम के इस्तेमाल से दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है।
सड़क दुर्घटनाओं में असामयिक मौतों की समस्या अब एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन चुकी है। बढ़ती दुर्घटनाएं और इनसे होने वाली मौतों ने सरकार, समाज और प्रत्येक नागरिक को सड़क सुरक्षा के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।
सड़क सुरक्षा माह एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ ही हमें निरंतर जागरूकता फैलाने, यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने, और सड़क सुधार के प्रयासों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
यह केवल सरकार का दायित्व नहीं है, बल्कि यह सभी नागरिकों का सामूहिक प्रयास होना चाहिए, ताकि हम सड़क दुर्घटनाओं में असामयिक मौतों की संख्या को कम कर सकें और एक सुरक्षित सड़क परिवहन प्रणाली का निर्माण कर सकें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।