वार्ता और कूटनीति साथ-साथ, 2 हफ्ते में बदली परिस्थितियां
2 साल की तनातनी के बीच 2 हफ्ते के घटनाक्रम से परिस्थितियां काफी हद तक बदलीं। एक तरफ कमांडर स्तर की वार्ता तो दूसरी तरफ भारत की चौतरफा कूटनीति से चीन की सेना बैकफुट पर है। एससीओ समिट में मोदी-जिनपिंग के बीच वातचीत के कयास की कूटनीतिक वजहें भी हैं। इसी सितंबर के पहले हफ्ते (1 से 7 सितंबर के बीच) रूस में वोस्तोक संयुक्त सैन्य अभ्यास हुआ। रूस की धरती पर वोस्तोक सैन्य अभ्यास से भारत और चीन जुड़े। इससे पश्चिमी देश अमेरिका और जापान नाराज हुए। वोस्तोक संयुक्त सैन्य अभ्यास से रूस-चीन-भारत करीब आए। एससीओ समिट के दौरान भी मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय बातचीत तय है।
युक्रेन से युद्ध के बाद दोनों की आमने-सामने पहली बार बात होगी। इससे पहले पुतिन से मोदी वर्चुअल शांति की अपील कर चुके हैं। वोस्तोक में सैन्य अभ्यास से कूटनीतिक और सामरिक नजरिये से चीन के साथ रिश्ते की भी नई जमीन तैयार हुई। इस वोस्तोक सैन्य अभ्यास से नाराज जापान के चलते भारत को नौसेना सामुद्रिक अभ्यास से पीछे कदम खींचना पड़ा, लेकिन भारत ने जापान के साथ 8 सितंबर को टु प्लस टु वार्ता के दौरान यह नाराजगी दूर कर ली।
दोनों के बीच सुरक्षा-सहयोग पर फिर से सहमति बनी। भारत-जापान वायु सैन्य अभ्यास के लिए अब रजामंद हो चुके हैं। हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता के बीच दोनों देशों ने अपनी-अपनी प्रतिबद्धताएं भी दोहराईं। इसी बीच, गत 2 सितंबर को भारत ने आईएनएस विक्रांत के स्वदेशी अवतार के जरिये दुनिया को सामुद्रिक सुरक्षा व ताकत का भी अहसास कराया।
जाहिर है, एससीओ समिट में पुतिन से प्रस्तावित द्विपक्षीय मुलाकात और पिछले हफ्ते जापान के साथ टु प्लस टु वार्ता के साथ-साथ वोस्तोक में संयुक्त सैन्य अभ्यास के जरिए भारत-चीन के बीच बातचीत का माहौल बनता नजर आ रहा है, इसलिए भले आधिकारिक तौर पर अभी भी मोदी-जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता को लेकर संशय के बादल हैं लेकिन 2 हफ्ते के घटनाक्रम से दोनों के बीच हाय-हैलो (द्विपक्षीय वार्ता) के हालात बन गए हैं, जैसा दोकलम के बाद हुआ था।
सीमा विवाद निपटारे की दिशा में मोदी-जिनपिंग के बीच यदि बातचीत की परिस्थितियां बन रही हैं तो यह शुभ संकेत है। उम्मीद की जाए कि एससीओ समिट के बहाने दोनों के बीच फिर से कुछ बात बन जाए...। हां- हां बात बन जाए।
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