दूसरा पहलू: बर्फीले अंटार्कटिका का अनोखा राज, हवा में मौजूद गैसों की थोड़ी-सी मात्रा भी जीवन के लिए उपयोगी
Mon, 07 Sep 2026 11:24 AM IST
ज्योति भास्कर
योंगयी पेंग, साथ में राय हॉलैंड (द कन्वर्सेशन)
सार
वैज्ञानिकों ने सूक्ष्मजीवों के जीवित रहने की एक अनोखी रणनीति का पता लगाया है। इनकी खासियत यह है कि वे एक-दूसरे के साथ जीन का आदान-प्रदान करते हैं। अंटार्कटिका की हवा में मौजूद गैसों की थोड़ी-सी मात्रा भी जीवन के लिए उपयोगी बन जाती है। सूक्ष्मजीव मृत कोशिकाओं से वातावरण में मौजूद डीएनए ग्रहण कर सकते हैं या वायरस के माध्यम से नए जीन हासिल कर सकते हैं।
अंटार्कटिका धरती की सबसे सूखी और ठंडी जगहों में से एक है। यहां के मुश्किल हालात में बहुत कम जीव ही जिंदा रह पाते हैं। इसके बावजूद बर्फ की चादरों के आसपास मौजूद मिट्टी में सूक्ष्मजीवों के विविध समुदाय जीवित हैं। वैज्ञानिकों ने अब उनके जीवित रहने की एक अनोखी रणनीति का पता लगाया है। इनकी खासियत यह है कि वे एक-दूसरे के साथ जीन का आदान-प्रदान करते हैं।
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एक नए शोध में 676 सूक्ष्मजीव प्रजातियों के जीनोम का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं को लगभग 98 प्रतिशत प्रजातियों में दूसरे सूक्ष्मजीवों के साथ जीन साझा करने के प्रमाण मिले। शोध में पाया गया कि ऊर्जा उत्पादन से जुड़े जीनों का आदान-प्रदान विशेष रूप से अधिक हुआ। इनमें वे जीन भी शामिल हैं, जो सूक्ष्मजीवों को वायुमंडल में मौजूद बेहद कम मात्रा वाली गैसों, जैसे हाइड्रोजन व कार्बन मोनोऑक्साइड, से ऊर्जा प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं। इस प्रक्रिया को एरोट्रॉफी कहा जाता है।
अंटार्कटिका में संसाधनों की कमी इतनी अधिक है कि हवा में मौजूद गैसों की थोड़ी सी मात्रा भी जीवन के लिए उपयोगी बन जाती है। सूक्ष्मजीव मृत कोशिकाओं से वातावरण में मौजूद डीएनए ग्रहण कर सकते हैं या वायरस के माध्यम से नए जीन हासिल कर सकते हैं। हालांकि, हर नया जीन लंबे समय तक टिक नहीं पाता।
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यदि कोई जीन नए सूक्ष्मजीव को जीवित रहने में लाभ देता है, तो प्राकृतिक चयन उसे बनाए रखता है। जो जीन उपयोगी नहीं होते, वे धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। ये सूक्ष्मजीव अंटार्कटिका के पारिस्थितिक तंत्र में पोषक तत्वों व ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंटार्कटिका के भीतर ऐसे सूक्ष्मजीवी संसार मौजूद हैं, जो पृथ्वी की सबसे कठोर परिस्थितियों में भी जीवन को संभव बनाए हुए हैं। ये जानकारियां हमें यह समझने में मदद कर सकती हैं कि जीव दूसरे कठोर वातावरण में कैसे जिंदा रह सकते हैं, जिसमें भविष्य के स्पेस मिशन या पृथ्वी से दूर बर्फीली दुनियाएं भी शामिल हैं।