मैंग्रोव की स्टिल्ट जड़ों का अवलोकन करते छात्र
- फोटो : Dr Priyamvada Bagaria
पेड़ या पंछियों के बारे में जानने की कोशिश
इन ग्रुप्स पर, आप अपने आस-पास के पेड़ या पंछी के तस्वीर प्रेषित कर, जानकारों की मदद से उनकी विषय में जान सकते हैं और अपने ज्ञान और रुचि में वृद्धि कर सकते हैं। इसके अलावा, कई एंड्राइड एप्प हैं जिनमें केवल तस्वीर अपलोड करने पर आप पेड़ों पंछियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रणाली में, 'गूगल लेंस, भी अत्यंत आसान और उपयुक्त तरीका है अपनी प्राकृतिक जानकारी को बढ़ाने का। किसी भी फूल, पौधे या जीव की छवि को अपलोड करने पर, उससे जुड़ी सारी जानकारी उपलब्ध हो जाती है।
उपर्युक्त विधियों को अपनाने के बाद, यदि आप अपनी रुचि को एक कदम और आगे लेकर जाना चाहते हों, तो कई तरह के प्राकृतिक शिक्षा के ट्रेनिंग और वर्कशॉप भी आयोजित किए जाते हैं, जिनसे जुड़कर आप अपनी प्राकृतिक जानकारी में इजाफ़ा कर सकते हैं। उदहारण के तौर पर, मुंबई स्थित 'बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी', 'सैंक्चुअरी एशिया फाउंडेशन', 'स्प्राउट्स एनवायरनमेंट ट्रस्ट', अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन 'वर्ल्डवाइड फण्ड फॉर नेचर', मैसूर स्थित 'नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन', दिल्ली स्थित 'सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन', तथा कई स्वतंत्र फ्रीलांसर, प्राकृतिक शिक्षा प्रदान करने में अपना सहयोग देते हैं।
अपने अपने शहर में इन शिक्षा प्रणालियों से जुड़कर, आप प्राकृतिक ज्ञान का लाभ ले सकते हैं। इन दिनों स्कूलों में भी प्राकृतिक और पर्यावरण शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
भले यह औपचारिक रूप से बच्चों के पाठ्यक्रम का हिस्सा न हो, किन्तु विद्यालयों में पाठकों के लिए अतिरिक्त पाठ्यक्रम में प्राकृतिक और पर्यावरण शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम अवश्य निहित होते हैं। यदि आपके बच्चों के स्कूल में इस तरह के अतिरिक्त पाठ्यक्रम हैं, तो आप अपने बच्चों को अवश्य प्रोत्साहित करें, और यदि न हो तो, स्कूल प्रबंधन से अनुरोध कर प्रकृति की शिक्षा अवश्य शामिल करवाएं।
अगली छुट्टियों में, बच्चों को मॉल ये सिनेमा की जगह, नजदीकी अभ्यारण्य दिखाएं और सामान्य प्राकृतिक जानकरी की ओर उत्सुकता बढ़ाएं। प्राकृतिक शिक्षा प्राप्त समाज और प्राकृतिक जगरूकता रखने वाला समाज, एक बेहतर कल की ओर बढ़ने की अधिक सम्भावना रखेगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।