संदेशखाली मामले में न्याय दिलाने की सरकार की मंशा पर सवाल
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यह पूरा मामला बीते महीने राशन घोटाले के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख के घर ईडी के छापे से शुरू हुआ था। तब कथित पार्टी समर्थकों के हमले में ईडी के तीन अधिकारी घायल हो गए थे। शाहजहां उसी दिन से फरार है। उसके जिन दो शार्गिदों पर यौन उत्पीड़न और जमीन पर जबरन कब्जे के आरोप लगे हैं उनमें से एक उत्तम सर्दार को तो गिरफ्तारी के बाद पार्टी से निलंबित किया गया है। लेकिन दूसरा शिव प्रसाद हाजरा भूमिगत है।
स्थानीय महिलाओं ने शाहजहां शेख और उसके दो सहयोगियों—शिव प्रसाद उर्फ शिबू हाजरा और उत्तम सर्दार पर स्थानीय लोगों की जमीन जबरन हड़पने और महिलाओं के साथ अत्याचार और बलात्कार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। अपनी मांग के समर्थन में महिलाएं लगातार प्रदर्शन कर रही हैं।
सरकार की ओर से गठित 10-सदस्यीय जांच समिति ने भी गांव का दौरा कर महिलाओं से बातचीत की है। बारासात रेंज के डीआईजी सुमित कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अब तक मिली चार शिकायतों में से किसी में रेप का कोई आरोप नहीं हैं। अब तक ऐसी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने भरोसा दिया कि ऐसी कोई शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस नेताओं के कथित अत्याचार और यौन उत्पीड़न के साथ ही महिलाओं का आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। तमाम विपक्षी दलों ने इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी को कठघरे में खड़ा करते हुए संदेशखाली अभियान शुरू किया है। लेकिन किसी को भी इलाके में नहीं जाने दिया गया है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार कहते हैं कि संदेशखाली की घटना से पता चलता है कि बंगाल में अपराध का किस कदर राजनीतिकरण हो चुका है। सरकार पूरे मामले की लीपापोती का प्रयास कर रही है ताकि हकीकत सामने नहीं आ सके। इसलिए विपक्षी नेताओं को वहां जाने से रोका जा रहा है। पार्टी के एक नेता के मुताबिक, भाजपा तो इस मुद्दे पर सिंगूर और नंदीग्राम की तर्ज पर आंदोलन खड़ा करने की कवायद में जुट गई है।
भाजपा महिला कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन।
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सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम का कहना है कि इस घटना से साफ है कि तृणमूल कांग्रेस में अपराधियों की भरमार है। वहां की महिलाएं अब तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वाले गुंडों के अत्याचारों के खिलाफ खुल कर सामने आ गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने भी बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति शासन की मांग उठाई है।
महिलाओं की बगावत से शुरुआती दौर में असमंजस में पड़ी तृणमूल कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की कवायद के तहत पार्टी के एक नेता उत्तम सर्दार को पुलिस के हाथों गिरफ्तार कराया और उसे छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया। लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार बढ़ते दबाव के बाद अब पार्टी जवाबी हमले पर उतरते हुए ऐसे आरोपों को बंगाल विरोधी प्रचार बता रही है।
तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि इलाके में महिलाओं के हवाले बलात्कार और न उत्पीड़न के जिन आरोपों की बात कही जा रही है वह निराधार हैं। उसका कहना है कि पुलिस की विशेष टीम और राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने वाली किसी भी महिला ने ऐसे आरोप नहीं लगाए हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा अपने बयान में संदेशखाली की घटना के लिए ईडी, आरएसएस और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप था कि विपक्षी दल मौके पर हिंसा को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस के नेता और स्थानीय पुलिस भले रेप और शारीरिक अत्याचार के आरोपों को निराधार बता रहे हों, महिलाएं अपनी बात पर अड़ी हैं। स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि तृणमूल नेताओं की इस तिकड़ी ने गांव वालों को डरा-धमका कर कौड़ियों के मोल उनकी जमीन खरीद ली है। कई मामलों में तो उनके पैसे भी नहीं दिए गए हैं। इसके साथ ही गांव के लोगों को तृणमूल नेताओं की जमीन और खेत पर काम कराया जाता है लेकिन मजदूरी या तो नहीं दी जाती या फिर नाममात्र की दी जाती है। पैसे मांगने पर उनकी पिटाई की जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष इस मुद्दे को लपकने का प्रयास कर रहा है। यही वजह है कि तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार अब पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में नजर आ रही है।
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