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बंगाल में सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता संदेशखाली

सार

इस मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा हो चुका है। इसके बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी समेत भाजपा के छह विधायकों को इस सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। लेकिन बवाल थमने की बजाय तेज ही हो रहा है। इस महीने के आखिर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता के दौरे पर आएंगे।
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में संदेशखाली सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। उत्तर 24-परगना जिले में बांग्लादेश की सीमा के करीब बसे इस गांव की महिलाओं ने तृणमूल कांग्रेस नेताओं के कथित यौन उत्पीड़न और अत्याचारों के खिलाफ जो आंदोलन शुरू किया था उसकी आंच तो अब काफी हद तक धीमी पड़ने लगी है। लेकिन इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच छिड़ा घमासान लगातार तेज हो रहा है। अब यह मुद्दा धीरे-धीरे राज्य बनाम केंद्र में भी बदलने लगा है।

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बीते सप्ताह महिलाओं का आंदोलन शुरू होने के बाद भाजपा, कांग्रेस और माकपा के तमाम प्रतिनिधिमंडल इलाके में पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उनको बीच रास्ते में ही रोक दिया जा रहा है। वैसे, अनुसूचित जाति आयोग, महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग के अलावा राज्य सरकार की एक 10-सदस्यीय टीम लगातार इलाके का दौरा कर रही है। शायद ही कोई ऐसा दिन बीत रहा है जब कोई न कोई आयोग या जांच टीम गांव के दौरे पर नहीं हो।

शुक्रवार को पुलिस ने भाजपा सांसदों की एक केंद्रीय टीम को भी इलाके तक नहीं पहुंचने दिया। यह इलाका कालिंदी नदी के किनारे बसा है। गांव तक पहुंचने के लिए नदी पार करना ही एकमात्र उपाय है। लेकिन रास्ते में 19 जगह धारा 144 लागू है और सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए गए हैं।
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दूसरी ओर, इस मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा हो चुका है। इसके बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी समेत भाजपा के छह विधायकों को इस सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। लेकिन बवाल थमने की बजाय तेज ही हो रहा है। इस महीने के आखिर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता के दौरे पर आएंगे। इसके बाद मार्च  पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बंगाल दौरे की कोशिशें चल रही हैं।

पार्टी के नेता उत्तर 24-परगना जिला मुख्यालय में उकी एक सभा आयोजित कर बड़े पैमाने पर संदेशखाली में महिलाओं पर कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाने की कवायद में जुटे हैं। उधर, लोकसभा की प्रिविलेज कमेटी ने भी मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक समेत तीन अधिकारियों को अपने समक्ष हाजिर होने का समन भेजा है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम पहले ही इलाके का दौरा कर चुकी है। लेकिन अब वह दोबारा गांव के दौरे पर आने वाली है। इस बार टीम के सदस्य मुख्य सचिव और पुसि  महानिदेशक से भी मुलाकात करेंगे। राष्ट्रीय जनजाति आयोग की टीम ने तो इलाके के दौरे के बाद दिल्ली लौट कर राष्ट्रपति को सौंपी अपनी रिपोर्ट में राज्य में धारा 356 का इस्तेमाल करने की सिफारिश की है।

संदेशखाली मामले में न्याय दिलाने की सरकार की मंशा पर सवाल - फोटो : ANI
यह पूरा मामला बीते महीने राशन घोटाले के सिलसिले में तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख के घर ईडी के छापे से शुरू हुआ था। तब कथित पार्टी समर्थकों के हमले में ईडी के तीन अधिकारी घायल हो गए थे। शाहजहां उसी दिन से फरार है। उसके जिन दो शार्गिदों पर यौन उत्पीड़न और जमीन पर जबरन कब्जे के आरोप लगे हैं उनमें से एक उत्तम सर्दार को तो गिरफ्तारी के बाद पार्टी से निलंबित किया गया है। लेकिन दूसरा शिव प्रसाद हाजरा भूमिगत है।

स्थानीय महिलाओं ने शाहजहां शेख और उसके दो सहयोगियों—शिव प्रसाद उर्फ शिबू हाजरा और उत्तम सर्दार पर स्थानीय लोगों की जमीन जबरन हड़पने और महिलाओं के साथ अत्याचार और बलात्कार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। अपनी मांग के समर्थन में महिलाएं लगातार प्रदर्शन कर रही हैं।

सरकार की ओर से गठित 10-सदस्यीय जांच समिति ने भी गांव का दौरा कर महिलाओं से बातचीत की है। बारासात रेंज के डीआईजी सुमित कुमार ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि अब तक मिली चार शिकायतों में से किसी में रेप का कोई आरोप नहीं हैं। अब तक ऐसी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने भरोसा दिया कि ऐसी कोई शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस नेताओं के कथित अत्याचार और यौन उत्पीड़न के साथ ही महिलाओं का आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है।  तमाम विपक्षी दलों ने इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी को कठघरे में खड़ा करते हुए संदेशखाली अभियान शुरू किया है। लेकिन किसी को भी इलाके में नहीं जाने दिया गया है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार कहते हैं कि संदेशखाली की घटना से पता चलता है कि बंगाल में अपराध का किस कदर राजनीतिकरण हो चुका है। सरकार पूरे मामले की लीपापोती का प्रयास कर रही है ताकि हकीकत सामने नहीं आ सके। इसलिए विपक्षी नेताओं को वहां जाने से रोका जा रहा है। पार्टी के एक नेता के मुताबिक, भाजपा तो इस मुद्दे पर सिंगूर और नंदीग्राम की तर्ज पर आंदोलन खड़ा करने की कवायद में जुट गई है।
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भाजपा महिला कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन। - फोटो : एक्स/पश्चिम बंगाल भाजपा
सीपीएम के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम का कहना है कि इस घटना से साफ है कि तृणमूल कांग्रेस में अपराधियों की भरमार है। वहां की महिलाएं अब तृणमूल कांग्रेस के समर्थन वाले गुंडों के अत्याचारों के खिलाफ खुल कर सामने आ गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर चौधरी ने भी बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति शासन की मांग उठाई है।

महिलाओं की बगावत से शुरुआती दौर में असमंजस में पड़ी तृणमूल कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की कवायद के तहत पार्टी के एक नेता उत्तम सर्दार को पुलिस के हाथों गिरफ्तार कराया और उसे छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया। लेकिन विपक्ष की ओर से लगातार बढ़ते दबाव के बाद अब पार्टी जवाबी हमले पर उतरते हुए ऐसे आरोपों को बंगाल विरोधी प्रचार बता रही है।

तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि इलाके में महिलाओं के हवाले बलात्कार और न उत्पीड़न के जिन आरोपों की बात कही जा रही है वह निराधार हैं। उसका कहना है कि पुलिस की विशेष टीम और राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने वाली किसी भी महिला ने ऐसे आरोप नहीं लगाए हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा अपने बयान में संदेशखाली की घटना के लिए ईडी, आरएसएस और भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप था कि विपक्षी दल मौके पर हिंसा को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस के नेता और स्थानीय पुलिस भले रेप और शारीरिक अत्याचार के आरोपों को निराधार बता रहे हों, महिलाएं अपनी बात पर अड़ी हैं। स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि तृणमूल नेताओं की इस तिकड़ी ने गांव वालों को डरा-धमका कर कौड़ियों के मोल उनकी जमीन खरीद ली है। कई मामलों में तो उनके पैसे भी नहीं दिए गए हैं। इसके साथ ही गांव के लोगों को तृणमूल नेताओं की जमीन और खेत पर काम कराया जाता है लेकिन मजदूरी या तो नहीं दी जाती या फिर नाममात्र की दी जाती है। पैसे मांगने पर उनकी पिटाई की जाती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष इस मुद्दे को लपकने का प्रयास कर रहा है। यही वजह है कि तृणमूल कांग्रेस और राज्य सरकार अब पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में नजर आ रही है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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