फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Samosa Journey: अजब-गजब है समोसा और भारत में इसकी विकास यात्रा

सार

समोसा दरबार से निकलकर कब आम आदमी का नाश्ता बन गया, यह किसी को पता नहीं चला। इसका कवर मुख्य रूप से मैदा का होता है। अगल-अलग स्थानों पर इसमें अलग-अलग सामग्री भरकर तेल या घी में तला जाता है।
विज्ञापन
समोसा। - फोटो : Adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वर्ष 1997 में फिल्म आई थी 'मिस्टर एंड मिसेस खिलाड़ी'। फिल्म में एक गाना है, 'जब तक रहेगा समोसे में आलू...'। फिल्म और गाना, दोनों हिट हुए थे, पर हम आज फिल्म नहीं समोसे की चर्चा कर रहे हैं। समोसे के आकार और कीमत को लेकर गोरखपुर से भाजपा सांसद एवं अभिनेता रवि किशन ने नई बहस छेड़ दी है।

विज्ञापन


सांसद महोदय ने संसद में एक चर्चा के दौरान कहा कि समोसे का आकार और कीमत फिक्स होनी चाहिए। हालांकि, हम आज चर्चा सांसद रवि किशन की मांग की नहीं, समोसे और भारत में इसकी लोकप्रियता की कथा की कर रहे हैं। 

समोसे की भारतीय कहानी बड़ी दिलचस्प है। इतिहासकारों के अनुसार समोसे की उत्पत्ति मध्य एशिया और मध्य पूर्व में हुई। वहां इसे संभूसक, संबूसा या संभूसा नाम से जाना जाता था। 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच फारसी और अरबी ग्रंथों में समोसे का उल्लेख मिलता है।
विज्ञापन


उस समय यह एक छोटा तिकोना आकार का मीट या सूखे मेवों से भरा पेस्ट्री स्नैक होता था, जिसे घी में तला जाता था। भारत में यह 13वीं या 14वीं शताब्दी में मुस्लिम व्यापारी, सूफी संत और फारसी भाषी शासकों द्वारा लाया गया। प्रसिद्ध विद्वान अमीर खुसरो और इतिहासकार इब्र बतूता ने अपनी किताबों में समोसे का उल्लेख किया है। 

समोसा दरबार से निकलकर कब आम आदमी का नाश्ता बन गया, यह किसी को पता नहीं चला। इसका कवर मुख्य रूप से मैदा का होता है। अगल-अलग स्थानों पर इसमें अलग-अलग सामग्री भरकर तेल या घी में तला जाता है। जहां उत्तर भारत में इसे समोसा, वहीं बिहार में झारखंड में इसे सिंघाड़ा कहते हैं।

पश्चिम बंगाल में यह शिंगाड़ा हो जाता है। गुजरात में इसे पटोड़ी समोसा कहते हैं। इंदौर में त्रिकोण आकार की पेटीज को भी बिना तला समोसा कह देते हैं। बिहार के कुछ जिलों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में समोसे पर सरसों का तेल डालकर खाने का चलन है।

पश्चिम बंगाल में समोसे में फूलगोभी व मूंगफली भरी जाती है और नींबू निचोड़कर इसे खाया जाता है। दक्षिण भारत में समोसे का आकार थोड़ा छोटा होता है। इसमें नारियल और सब्जियां या हल्के मसाले भरे होते हैं, जबकि उत्तरी कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में तीखे मसालेदार समोसे का चलन है। गुजरात और महाराष्ट्र में समोसे में मीठा और खट्टा स्वाद मिलाया जाता है। 

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से आलू भरा त्रिकोणीय समोसा मिलता है। हैदराबाद और उसके आसपास के क्षेत्र में चौकोर या आयताकार समोसा मिलता है, जिसे लुचमी कहते हैं। इसे स्थानीय रूप से लुखमी भी कहा जाता है, जिसमें आमतौर पर मटन या कीमा भरा होता है।

पश्चिम बंगाल और बिहार में समोसा अर्धचंद्राकार भी बनता है। यह पूरी तरह से सील किया होता है। दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में समोसा गोल आकार का बनाया जाता है। इसकी बनावट उत्तर भारतीय कचौड़ी जैसी होती है। कुछ स्थानों पर पतले त्रिकोण आकार के समोसे भी बनते हैं। इन्हें मिनी या पंजाबी कॉकटेल समोसा कहते हैं।

रतलाम में समोसे पर सेव नमकीन डालकर खाने का चलन है। प्रयागराज के छोटे आकार के हींग के समोसे प्रसिद्ध हैं। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के इगलास का समोसा बड़े आकार का होता है, यह सामान्य रूप से मिलने वाले समोसे से डेढ़ गुना अधिक बड़ा होता है।

हरिद्वार में कुछ दुकानों पर 8 इंच, 15 इंच और 20 इंच तक बड़े समोसे बनाए जाते हैं। इन्हें भारत का सबसे बड़ा समोसा कहा जाता है। इन समोसों में पनीर, आलू मटर और ड्राई फ्रूट्स होते हैं। कई जगह दही या छोले डालकर समोसा खाया जाता है।

आज समोसा वैश्विक हो गया है। इंग्लैंड में भारतीय रेस्टोरेंट्स में आमतौर पर वेजिटेबल समोसा मिलता है। अफ्रीकी देशों में समोसे को समोसा ही कहा जाता है, लेकिन इसमें मीट प्रमुख रूप से भरा होता है। मध्य एशियाई देशों में समोसा ओवन में बेक किया जाता है।

कैरेबियाई देशों, जहां भारतवंशी समुदाय बड़ी संख्या में रहता है, में अपने स्वादानुसार समोसे को ढाल लिया गया है। वैसे, समोसा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज कर चुका है। लंदन में एक चैरिटी संस्थान ने वर्ष 2017 में 153.1 किलोग्राम का समोसा बनाया था। 

दुनिया की जुबान पर जहां समोसे का स्वाद चढ़ चुका है, वहीं यह एक बड़े कारोबार का स्वरूप भी ले चुका है। भारत में वर्ष 2025 में स्नैक फूड मार्केट करीब 1.45 लाख करोड़ रुपए का रहने वाला है, इसमें समोसा प्रमुख रूप से शामिल है। ऐसा माना जाता है कि भारत में रोजाना 6 करोड़ समोसे-कचौड़ी बिकते हैं। यह 10 से 30 रुपए तक सामान्य रूप से मिलता है।

इसकी सालाना बिक्री 22,000 करोड़ से 33,000 करोड़ रुपए के बीच बताई जाती है। आज समोसे को लेकर कई नए ब्रांड उभरे हैं। कई स्टार्टअप शुरू हुए हैं। जयपुर के एक स्टार्टअप ने समोसे को लेकर कई नायाब प्रयोग किए हैं, यहां समोसे में नूडल्स, पनीर टिक्का आदि सामग्री भरी जाती है। सांसद महोदय ने संसद में समोसे के आकार और कीमत को लेकर जो मांग उठाई है, उसका पूरी होना तो मुश्किल लगता है, लेकिन समोसे का क्रेज जरूर दुनिया में बढ़ता जा रहा है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें