ट्रांसजेंडर्स के लिए अब लिंग परिवर्तन सर्जरी कराना होगा आसान
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ऐसे बनेंगे किन्नर मर्द से औरत
चिकित्सकीय प्रकियानुसार लिंग परिवर्तन सर्जरी के मामले में जननांगों के ऊतकों को फिर से आकार देने के लिए एक खास सर्जरी प्रक्रिया की जाती है। यदि कोई पुरुष ट्रांसजेंडर चाहता है, तो उसे एक वैजिनोप्लास्टी, स्तन वृद्धि सर्जरी, चेहरे की स्त्रीकरण और अन्य प्रक्रियाओं से भी गुजरना पड़ता है।
जेंडर चेंज सर्जरी से पहले, व्यक्ति को लगभग एक साल तक हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एचआरटी) से गुजरना पड़ता है। महिला बनने के लिए हार्मोनल थेरेपी से पुरुषों की दाढ़ी, बाल और मूंछें गायब होने लगती हैं।
लेकिन फिर भी सन्तानोत्पत्ति नहीं कर सकेंगे
विशेषज्ञों के अनुसार सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी भी दो से तीन चरणों में की जाती है। पुरुष से महिला की सर्जरी करने के लिए लिंग और वृषण जैसे बाहरी अंगों को हटा दिया जाता है और लिंग की त्वचा को इनवेजिनेट किया जाता है और इस त्वचा का उपयोग स्त्री जननांग के निर्माण के लिए किया जाता है।
इसके अलावा ब्रेस्ट इम्प्लांट स्तन का निर्माण करने के लिए किया जाता है। महिलाओं में गर्भाशय और स्तनों को दो चरणों में हटा दिया जाता है। अगले चरण में, लिंग के निर्माण के लिए शिश्न का पुनर्निर्माण किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार सर्जरी के बाद परिवर्तित पुरुष न तो पिता बन सकता है और महिला भी मां नहीं बन सकती।
ट्रांसजेंडरों के लिए पोर्टल भी खुला
इससे पहले सामाजिक न्याय मंत्रालय ने नवंबर, 2020 में एक राष्ट्रीय पोर्टल की शुरूआत की थी, जहां ट्रांसजेंडर व्यक्ति संबंधित जिला अधिकारी से पहचान प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए पोर्टल किसी भी तरह की शारीरिक उपस्थिति की मांग नहीं करता।
2019 में बन गया था ट्रांसजेंडरों को सामाजिक न्याय के लिए कानून
देश में ट्रांसजेंडरों को लैंगिक विकार के कारण अपमान और तिरस्कार से मुक्ति दिलाने के लिए इससे पहले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक 2019 संसद द्वारा पारित हुआ था। इस कानून में लैंगिक आधार पर किन्नरों को परिभाषित भी किया गया है।
इसके अनुसार अगर किसी व्यक्ति का जेंडर (लिंग) उस जेंडर से मेल नहीं खाता जिसके तहत उसे जन्म के समय रखा गया था, तो वह ट्रांसजेंडर कहलाएगा। वहीं इस विधेयक के मुताबिक ऐसे किसी व्यक्ति को अपनी पुरुष, स्त्री या किन्नर पहचान रखने का अधिकार होगा। साथ ही इसमें प्रावधान है कि किसी व्यक्ति को ट्रांसजेंडर तभी माना जाएगा जब जिला स्तर पर बनी एक समिति यह प्रमाणित कर देगी।
ट्रांसजेंडर अधिनियम 2019 के प्रावधान
(1) किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ शैक्षणिक संस्थानों, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं आदि में भेदभाव नहीं किया जाएगा।
(2) ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान को मान्यता और उन्हें स्वयं के कथित लिंग की पहचान का अधिकार प्रदान करना
(3) माता-पिता और परिवार के नजदीकी सदस्यों के साथ रहने का प्रावधान।
(4) ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रम बनाने का प्रावधान।
(5) ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें सलाह देने, उनकी देख-रेख और मूल्यांकन उपायों के लिए राष्ट्रीय परिषद का प्रावधान है।
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