इस बीच चीन और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध तेज हो गया है। इसका भी लाभ ब्राजील कमाना चाहता है। ब्राजील ने बीते कुछ समय में मांस और सोयाबीन का निर्यात में बढ़ोतरी की है। चीन और अमेरिका के बीच चल रहे व्यापार युद के कारण चीन ने ब्राजील से सोयाबीन आयात शुरू किया है।
ब्राजील ने 2018 में रिकार्ड आठ करोड़ तीस लाख टन सोयाबीन निर्यात किया। पर्यावरणविदों के एक वर्ग का अनुमान है खेली योग्य भूमि बढाकर निर्यात को बढावा देने के चक्कर में अमेजन के जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जंगलों को जलाकर खेती योग्य भूमि का विकास किया जा रहा है। खेती योग्य जमीन बढ़ाने के लिए अमेजन के जंगलों में आग लगवायी जा रही है। इसके पीछे बड़ी शक्तियां है। ब्राजील में जंगल का वाणिज्यिक दोहन बढ़ा है।
वर्तमान दक्षिणपंथी सरकार पर्यावरण विरोधी
चूकिं ब्राजील की दक्षिणपंथी सरकार के मुखिया जायर बोलसोनारो के कार्यकाल में आग लग़ने की घटना सबसे ज्यादा हुई है, इसलिए बोलसोनारो सरकार पर सवाल उठना लाजिमी है। बोलसोनारो इस साल जनवरी में सत्ता में आए थे। उनके सत्ता में आते ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ी।
ब्राजील के राष्ट्रीय अंतरीक्ष अनुसंधान संस्थान के आंक़ड़े के अनुसार जनवरी 2019 के बाद ब्राजील के इलाके मे आमेजन जंगल के अंदर 3 हजार वर्ग किलोमीटर का जंगल क्षेत्र आग के कारण नष्ट हो गया। जबकि बोलसोनारो इस सच्चाई को स्वीकार करने के बजाए इसे गलत ठहराते है। एक तरफ वो जंगलों में आग के लिए स्वयंसेवी संगठनों को दोषी ठहरा रहे है, वहीं अफवाह के लिए भी वे स्वयंसेवी संगठनों को जिम्मेवार ठहरा रहे है। वही दूसरी तरफ बोलसोनारो ने ब्राजील के पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी के बजट में इसी साल अप्रैल में 24 प्रतिशत कटौती कर दी।
बजट में कटौती के बाद पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी के पास आमेजन क्षेत्र की निगरानी के लिए संसाधनों की कमी आ गई है। जायर बोलसोनारो दवारा बजट कम करने के फैसले के बाद उन पर संदेह ज्यादा बढ़ गया। संदेह व्यक्त किया गया कि खनन और खेती की जमीन बढ़ाने वाले लॉबी के प्रभाव में उन्होंने पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित बजट की कटौती का फैसला लिया। बोलसोनारो वैसे लगातार अमेजन के जंगलों के नुकसान को लेकर उल्टे-सीधे बयान दे रहे है। उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति को ही सिर्फ खरी खोटी नहीं सुनायी, बल्कि ब्राजील के पर्यावरणविदों को भी खरी खोटी सुनायी है।
अमेजन के जंगलों में लगी आग
- फोटो : PTI
दरअसल इसके पीछे बोलसोनारो की विचारधारा है जो खुलकर खेती आधारित उधोग का समर्थन करती है। बोलसोनारो आमेजन के जंगलों मे रहने वाले स्थानीय देशी समुदायों की सुरक्षा को भी विकास विरोधी बताते है।
योजनागत तरीके से आग पहले भी लगायी जाती रही है
हालांकि अमेजन के जंगलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश बोलसोनारो के कार्यकाल में ही हुआ है, यह कहना गलत है। हां उनके कार्यकाल में आग लगने की घटना में तेजी आयी। जबकि अमेजन के जंगलों में आग पहले भी लगायी जा रही थी।
इसमें कई तरह की शक्तियां सक्रिय रही है। लेकिन बोलसोनारो की नीतियों के कारण जंगल को नुकसान पहुंचाने वाली शक्तियां खासी सक्रिय हो गई है। पर्यावरण एजेंसियों के आंक़ड़े बताते है कि पहले भी जंगल में मानवजनित आग लगायी जाती रही है। 2013 में ब्राजील के आमेजन जंगल में 39584 आग लगने की घटना हुई थी। 2014 में आग लगने की 62691 घटना सामने आयी। 2015 में 57545, 2016 में 76185, 2017 में 57870 और 2018 में 45086 आग लगने की घटना आमेजन के जंगलों में हुई। लेकिन जायर बोलसोनारो के कार्यकाल में आग लगने का रिकार्ड टूट गया।
2019 में जनवरी से जुलाई तक 80626 आग लगने की घटना ब्राजील क्षेत्र के आमेजन जंगलों में घट चुकी है। अगर पिछले साल के आग की घटनाओं से इस साल की आग की घटनाओं की तुलना की जाए तो इसमें 84 प्रतिशत की वृदि दर्ज की गई है।
अमेजन के जंगलों में लगी आग
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आने वाली पीढ़ियां आक्सीजन के लिए तरसेंगी
विकास दर प्राप्त करने के अंध दौड़ में अगर अमेजन के जंगलों का भारी नुकसान हुआ तो आने वाली पीढ़ियां कारपोरेट शक्तियों के प्रभाव में काम करने वाली ताकतों और शासकों को माफ नहीं करेगी। आने वाली पीढ़ियां आक्सीजन के लिए तरसेंगी। जैसे इस समय साफ पानी का व्यापार पूरी दुनिया में हो रहा है, भविष्य में आम आदमी को जीने के लिए आक्सीजन खरीदना होगा।
इसमें भी दुनिया के बड़े कारपोरेशन मानव सभ्यता के विकास के नाम पर लोगों को आक्सीजन बेचेंगे। यह आक्सीजन जीने के लिए जरूरी होगा। नव उदारवाद का मुनाफा संस्कृति अगर मानव सभ्यता के विनाश को ही न्योता देगा तो इस मुनाफे का आने वाली पीढ़ी क्या करेगी? अगल लोगों को जल और आक्सीजन ही नहीं मिलेगा तो विकास के इस अंध दौड़ का क्या फायदा है? अगर मानव सभ्यता का ही विनाश हो जाएगा, संपूर्ण मानव जाति के अस्तित्व पर ही खतरा होगा, तो कारपारेशनों के भारी लाभ और पूंजी का उपयोग कौन करेगा? जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के भीषण मार को झेलने के कागार पर है, वैसे मे जानबूझ कर आमेजन के जंगल को नुकसान पहुंचाना पूरे विश्व के लिए खतरा है।
9 देशों में फैला जंगल वैश्विक वातावरण को 20 प्रतिशत ऑक्सीजन देता है
अमेजन के जंगल का महत्व इसी से समझ सकते है कि 55 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला अमेजन का विस्तार लैटिन अमेरिका के 9 देशों ब्राजील, बोलविया, पेरू, इक्वाडोर, कोलंबिया, वेनजुएला, सुरीनाम, फ्रेंच गुइआना और गुयाना तक है। अमेजन जंगल के इलाके से बड़ी नदियां गुजरती है।
अमेजन क्षेत्र में 3 करोड़ लोगों का निवास है। अमेजन में निवास करने वाले लोगों में 20 लाख लोग स्थानीय 400 देशज समुदाय से भी संबंधित है। इस इलाके में जानवरों की लगभग 2000 प्रजातियों का निवास है। पूरी पृथ्वी की जैवविविधता का 10 प्रतिशत आमेजन के जंगल में मौजूद है। अमेजन का जंगल पूरे वैश्विक वातावरण में 20 प्रतिशत आक्सीजन का उत्पादन करता है। अगर सही शब्दों मे कहा जाए तो आमेजन के जंगल जलवायु परिवर्तन के प्रतिरोधक है। इसलिए मानव सभ्यता को बचाए रखने के लिए इस आमेजन को बचाए रखना जरूरी है। जलवायु परिवर्तन के प्रतिरोधक के रुप में अमेजन क्यों महत्वपूर्ण है, इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के एक अध्ययन से समझा जा सकता है। अकादमी के अध्धयन के मुताबिक आमेजन के जंगल 90 से 140 साल तक का मानव उत्पादिक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता रखता है।
आर्कटिक और दक्षिण पूर्व एशिया के जंगलों में भी आग लगी
हालांकि आग के शिकार सिर्फ अमेजन के जंगल ही नहीं हुए है। विश्व भर में कई जंगलों में आग लगने की घटना बढ़ी है। यह जलवायु के लिए चिंता का विषय है। इससे मानव जाति का असत्तित्व ही खतरे में आ सकता है। दिलचस्प बात यह है कि इस साल आर्कटिक क्षेत्र के जंगलों में आग लगी है, जो आश्चर्यजनक है। इस इलाके जंगलों में सामान्य रूप से पहले आग नहीं लगती थी। साइबेरिया के जंगलों में लगी आग के कारण 60 लाख एकड़ जंगल तबाह हो गए। अलास्का के इलाके में लगी आग के कारण 25 लाख एकड़ जंगलभूमि तबाह हो गई। इसका सीधा प्रभाव आर्कटिक क्षेत्र पर पड़ा है। कुछ इसी तरह की समस्या दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में भी आयी है। मलेशिया और इंडोनेशिया के जंगलों में भी 1990 से 2015 के बीच लगी आगों ने पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंचाया है।
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