डॉ. विजय सिंगला दस साल पहले आम आदमी पार्टी में शरीक हुए थे। पेशे से वो डेंटिस्ट और साढ़े 6 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं।
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डॉ. विजय सिंगला दस साल पहले आम आदमी पार्टी में शरीक हुए थे। पेशे से वो डेंटिस्ट और साढ़े 6 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं। डॉ. होने के कारण ही उन्हें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री का अहम पद दिया गया था। लेकिन लालच और भ्रष्टाचारी कल्चर का कोई ‘दि एंड’ नहीं होता। इस हिसाब से देखें तो विजय सिंगला ने बतौर कमीशन विभागीय खरीद और ठेकों का 1 फीसदी ही मांगा था, जो कमीशन की प्रचलित दरों के हिसाब से नगण्य ही कहा जाएगा। कहते हैं कि सिंगला ने 58 करोड़ के कामों के बदले सिंगला ने 1.16 की रिश्वत ठेकेदार व अफसरों से मांग थी।
राजनेताओं का चरित्र यह है कि वो पूरी बेशरमी के साथ झूठ बोल सकते हैं। भ्रष्टाचार करते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण दे सकते हैं। विजय सिंगला ने भी कुछ दिन पहले मंत्रालय की कमान संभालते हुए दावा किया था कि वो भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। हो सकता है कि उनकी नजर में 1 परसेंट कमीशन ‘भ्रष्टाचार’ की श्रेणी में न आता हो।
भ्रष्टाचार से कमाया पैसा
इस देश में अमूमन राजनेताओं और भ्रष्टाचार का चोली दामन का साथ रहा है। खासकर बीते कुछ सालो में तो भ्रष्टाचार से कमाया हुआ पैसा राजनीति में किए गए इन्वेस्टमेंट का अपेक्षित डिविडेंड ही माना जाता है। कई राजनेता और अफसर भ्रष्टाचार को कोसते हुए अरबों की संपत्ति अर्जित करते जाते हैं और जनता उनकी इस मासूम अदा को हतप्रभ होकर देखती रहती है।
उल्टे कई जगह तो वो भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नेताओं को जिता भी देती है। सरकार में ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार का यह कारोबार बेखटके चलता रहता है। अलबत्ता निजी तौर पर कुछ राजनेता जरूर बेदाग दिखते हैं, लेकिन वो अपवाद हैं।
बचाने की होती है कोशिश
अगर उनके सहयोगी भ्रष्टाचार करते पकड़े जाते हैं तो उन्हें बचाने का खेल शुरू हो जाता है। यह बचाव अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप राजनीति से प्रेरित होने, विपक्ष का षड्यंत्र होने, करप्शन के ठोस सबूत पेश करने की चुनौती देने या फिर किसी जांच कमेटी से जांच कराकर रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डालने के रूप में होता है। कुछेक मामले कोर्ट में चले जाते हैं। उन पर बरसो सुनवाई चलती है। बिरले मामलों जैसे लालू प्रसाद यादव, ओमप्रकाश चौटाला, पी. शशिकला जैसे मामलों में सजाएं भी हो जाती हैं। लेकिन इससे भ्रष्टाचारियों का हौसला कम नहीं होता। केवल करप्शन के रेट रिवाइज होते रहते हैं, जो रूपये की ताकत नापने का एक नकारात्मक जरिया होते हैं।
भ्रष्टाचार की स्वीकृति और एसीबी द्वारा अपनी गिरफ्तारी के बाद विजय सिंगला ने भी वही सफाई दी, जो अमूमन ऐसे मामलो में दी जाती है। सिंगला ने कहा कि ‘मुझे फंसाया गया है।‘ जबकि सीएम मान के मुताबिक सिंगला ने खुद उनके सामने कबूला कि उन्होंने ठेकों में 1 परसेंट रिश्वत मांगी थी। बतौर सबूत सिंगला का ऑडियो टेप भी है।
आप का कांग्रेस पर आरोप
जहां तक भ्रष्टाचार के आरोपों का सवाल है तो आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी भाजपा व कांग्रेस ऐसे आरोप लगाती रही है। कहा गया कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाले अरविंद केजरीवाल भी कोई दूध के धुले नहीं है। बावजूद इसके करप्शन के आरोप में घिरे किसी अपने सहयोगी मंत्री को ताबड़तोड़ चलता कर देना कोई आसान बात नहीं है।
भले ही यह मामला पंजाब का हो, लेकिन संदेश सभी सरकारों और उसमें शामिल मंत्रियों के लिए है। हालांकि इससे सरकार और प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा, यह मान लेना मासूमियत भरा होगा, लेकिन आम आदमी पार्टी और भगवंत मान ने उस गुजरात को स्पष्ट संदेश जरूर दिया है, जहां वह सत्ता में आने के ख्वाब देख रही है।
राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि आप गुजरात में सत्ता में भले न आ पाए, लेकिन वो वहां प्रतिपक्षी कांग्रेस को हाशिए पर धकेल कर विपक्ष का स्पेस हथिया सकती है। हार्दिक पटेल के कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद अब वहां कोई चमकदार नाम कांग्रेस में नहीं बचा है।
ऐसे में आप दशकों से सत्तारूढ़ भाजपा के प्रति एक स्वाभाविक असंतोष का सियासी फायदा उठा सकती है। यह इसलिए भी अहम है कि गुजरात ही सत्तर के दशक में राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ जन्मे ‘नवनिर्माण आंदोलन’ की जन्म भूमि रही है। वहां 1974 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चिमन भाई पटेल की भ्रष्ट सरकार के खिलाफ छात्रो ने आंदोलन शुरू किया था।
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