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Psychedelic Explained: क्या मनोचिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं साइकेडेलिक ड्रग्स?

सार

आज जब दुनिया अधुनिकीकरण की राह पर सरपट भाग रही है। ऐसे में साइकेडेलिक ड्रग्स जैसे MDMA और कैटामीन पर फिर से पुनर्विचार किया जा रहा है। कई बड़े मनोचिकित्सकों के मुताबिक साइकेडेलिक ड्रग्स के सहारे गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं को दूर किया जा सकता है।
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Psychedelic Explained - फोटो : Istock
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विस्तार
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यह कहानी स्टीव शोर्नी की है। स्टीव अपने जीवन में लंबे समय तक तनाव और डिप्रेशन भरे दौर से गुजरते हुए आए थे। इस दौरान उन्होंने लंबे समय तक एंटी डिप्रेशन दवाइयों के सेवन के साथ अपनी काउंसलिंग भी करवाई। हालांकि, नतीजा कुछ खास नहीं निकला।

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ऐसे में स्टीव ने इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंडन में सिलोसाइबिन (Psilocybin) ड्रग के ट्रायल में हिस्सा लिया। इसके बाद जो हुआ वह वाकई हैरान करने वाला था। सिलोसाइबिन की डोज लेने के बाद स्टीव की हंसी रोके नहीं रुक रही थी।

सिलोसाइबिन के अपने एक्सपीरियंस को साझा करते हुए स्टीव कहते हैं - "मुझे शायद ही ऐसा अनुभव और इतनी खुशी पहले कभी हुई हो। यह काफी हैरतअंगेज था। मैं अपनी आश्चर्य से भरी हंसी में कहीं खो सा गया था। जीवन और ब्रह्मांड से जुड़े सभी सवालों के जवाब मुझे बेहद ही रंगीन और साइकेडेलिक अंदाज में मिल रहे थे।" स्टीव अपने 6 घंटे की इस ट्रिप में एक अलग दुनिया में चले गए थे। 


साइकेडेलिक का जब भी नाम सामने आता है, तो हिप्पी का संबंध इससे जुड़ने लगता है। 1960 के दशक में परंपराओं के विरोध में एक बेहद ही खास तरह का संगठन खड़ा हुआ, जिसे हिप्पी नाम से जाना गया। इस संगठन में शामिल लोग बड़े पैमाने पर LSD, MDMA, सिलोसाइबिन जैसे ड्रग्स का सेवन करते थे।

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ये लोग काफी खुले विचारों के थे। गौरतलब बात है कि बाद में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने War on Drugs को शुरू किया। 1970 के दशक की शुरुआत में साइकेडेलिक्स को बैन कर दिया गया। LSD, MDMA जैसे खतरनाक ड्रग्स पर बैन लगाए जाने के बाद इनका प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा पर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। लोग अभी भी परमानंद (ecstasy) पाने के लिए इन ड्रग्स का गुपचुप सेवन कर रहे थे।

साइकेडेलिक ड्रग्स और मनोचिकित्सा

आज जब दुनिया अधुनिकीकरण की राह पर सरपट भाग रही है। ऐसे में साइकेडेलिक ड्रग्स जैसे MDMA और कैटामीन पर फिर से पुनर्विचार किया जा रहा है। कई बड़े मनोचिकित्सकों के मुताबिक साइकेडेलिक ड्रग्स के सहारे गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

कई बड़े रिसर्च संस्थानों में इन ड्रग्स को लेकर ट्रायल किए जा रहे हैं। एक खास तरह के क्लीनिकल ट्रायल, जिसमें लोग (Post-traumatic stress disorder - PTSD) से ग्रसित थे। उनको ट्रायल के दौरान MDMA की सीमित डोज दी गई। 67 प्रतिशत पार्टिसिपेंट ने बताया कि MDMA ड्रग्स ने उनको PTSD समस्या से बाहर निकलने में काफी मदद की है। साइकेडेलिक के क्षेत्र में की जा रही खोजों में यह पता चला है कि इससे ब्रेन इंजरी और मनोविज्ञान से जुड़ी गंभीर समस्याओं को ठीक करके व्यक्ति की रचनात्मकता को बढ़ाया जा सकता है।

गौरतलब बात है कि साइकेडेलिक ड्रग्स के जरिए किया जा रहा इलाज अभी प्रयोगिक है। यह इलाज सभी लोगों के लिए नहीं है। केवल ट्रायल और एक्सपेरीमेंट के लिए ही ये ड्रग कुछ चुनिंदा लोगों को दिए जा रहे हैं। साइकेडेलिक ड्रग्स काम कैसे करता है? इसके पीछे की व्यवस्था को लेकर अभी तक कोई विकसित समझ नहीं है।

Psychedelic Explained - फोटो : Istock
वर्तमान समय में कई बड़े उद्दमी, कलाकार, संगीतकार, टेक ब्रोज और बड़े इन्वेस्टर्स साइकेडेलिक की माइक्रोडोजिंग ले रहे हैं। उनके मुताबिक साइकेडेलिक उनकी रचनात्मकता और प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने का सबसे कारगर विकल्प है। गौरतलब बात है कि साइकेडेलिक अभी भी गैर कानूनी और काफी ज्यादा कंट्रोवर्शियल है।

मनुष्य लंबे समय से साइकेडेलिक का सेवन करता आ रहा है। वहीं बात अगर आधुनिक साइकेडेलिक की करें, तो इसकी शुरुआत साल 1943 में हुई। स्विस कैमिस्ट डॉक्टर अलबर्ट हॉफमैन रेसपाइरेटरी सिस्टम से जुड़े एक बेहद ही खास ड्रग पर काम कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पाया कि इस ड्रग का काफी अलग प्रभाव मानव शरीर पर पड़ता है। 

ट्रायल के दौरान अचानक ड्रग का कुछ हिस्सा हॉफमैन की उंगलियों पर जा गिरा, जिसमें से ड्रग की माइक्रो क्वांटिटी उनके ब्लड स्ट्रीम में चली गई। इसके बाद जो हुआ वह वाकई हैरान करने वाला था। हॉफमैन एक ड्रीम स्टेट में चले गए। इस दौरान उन्होंने अपने आप को एक राक्षस से घिरा हुआ पाया। इस ट्रिप के समय हॉफमैन ने एक डायन (Witch) को भी देखा।

ट्रिप के बाद जब हॉफमैन वापस आए, तो उन्हें प्रकृति के साथ एकात्म जुड़ाव की अनुभूति हुई। हॉफमैन ने जिस ड्रग का सेवन किया था। उसे बाद में लाइसर्जिक एसिड डाईथेलेमाइड (Lysergic Acid Diethylamide - LSD) के नाम से जाना गया। यही से मॉडर्न साइकेडेलिक की शुरुआत होती है। 
 
एलएसडी एक बेहद ही खास प्रकार का ड्रग है। इसका दिमाग के सेरोटोनिन पर काफी ज्यादा असर पड़ता है। सेरोटोनिन एक खास प्रकार का कैमिकल मैसेंजर होता है, जो हमारे मूड को ठीक करने का काम करता है। हमारे दिमाग में 14 प्रकार के सेरोटोनिन रिसेप्टर होते हैं।

यही हमारी भवनाओं और अनुभूतियों को नियंत्रित करने का काम करते हैं। एलएसडी इनमें से एक सेरोटोनिन रिसेप्टर को प्रभावित करके हमारे मूड को पूरी तरह बदल देता है। ऐसे में हमारी वास्तविकता और समय को लेकर समझ पूरी तरह बदल जाती है।

व्यक्ति जब एलएसडी का सेवन करता है। उसके बाद वह एक ड्रीम स्टेट में चला जाता है। इसी प्रक्रिया को एलएसडी ट्रिप के नाम से जाना जाता है। ट्रिप के दौरान जिन अनुभवों से व्यक्ति गुजरता है। वह कई बार काफी खूबसूरत होते हैं, तो कई बार काफी ज्यादा डरावने। ट्रिप डरावनी होगी या खूबसूरत यह व्यक्ति की मानसिक अवस्था पर निर्भर करती है।
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Psychedelic Explained - फोटो : Istock
साल 1960 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी के प्रोफेसर टीमोथी लियरी (Timothy Leary) मैक्सिको में एक बेहद ही खास तरह का रिसर्च कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने एक मशरूम का सेवन किया, जिसमें सिलोसाइबिन (Psilocybin) नामक कैमिकल था।

अपने इस एक्सपीरियंस को साझा करते हुए टीमोथी कहते हैं - इन मशरूम का सेवन करने के बाद मेरा पहला अनुभव यह था कि इससे मेरी रचनात्मकता और चीजों को लेकर समझ पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ गई। मैंने मनोविज्ञान (Psychology) के क्षेत्र में जितना पिछले 16 सालों में पढ़ा और सीखा था। मशरूम का सेवन करने के बाद इसको लेकर मेरी समझ पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा बढ़ गई।

ऐसे में सवाल उठता है क्या साइकेडेलिक ड्रग्स (LSD, Psilocybin etc) को पार्टी ड्रग्स की बजाए मनोचिक्तसा और व्यक्ति की मानसिक अवस्था को सुधारने के क्षेत्र में उपयोग किया जा सकता है? इसका जवाब है हां, इसको लेकर बड़े बड़े रिसर्च संस्थानों में कई तरह के ट्रायल्स को अंजाम दिया जा रहा है।

मनोचिकित्सा के क्षेत्र में साइकेडेलिक को लेकर अभी कोई विकसित समझ स्थापित नहीं हुई है। इसको लेकर अभी क्लीनिकल ट्रायल ही किए जा रहे हैं। हालांकि, इन क्लीनिकल ट्रायल में साइकेडेलिक थैरेपी के नतीजे काफी शानदार हैं। आज दुनिया भर में जब एक बड़ी आबादी अवसाद, डिप्रेशन और तनावग्रस्त जीवन जी रही है। ऐसे में साइकेडेलिक के क्षेत्र में की जा रही ये खोजें आने वाले समय में मनोचिक्तसा के क्षेत्र में एक क्रांति ला सकती हैं। 

डिस्कलेमर - यह लेख साइकेडेलिक का किस तरह से साइकोथैरेपी में इस्तेमाल किया जा सकता हैै। उसको लेकर लिखा गया है। इस लेख में अमर उजाला किसी भी प्रकार के ड्रग्स के सेवन को बढ़ावा नहीं देता है। मेडिकल साइंस की दिशा में इन ड्रग्स को लेकर जो खोज और ट्रायल किए जा रहे हैं उन तथ्यों का जिक्र इस लेख में किया गया है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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