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Vijay Kumar Malhotra Passes Away: वाजपेयी-आडवाणी युग के स्तंभ थे प्रो. विजय मल्होत्रा

सार

1980 में भाजपा के गठन में वे संस्थापक सदस्य थे और दिल्ली इकाई के पहले अध्यक्ष बने। राम जन्मभूमि आंदोलन में आडवाणी के नेतृत्व में सक्रिय योगदान दिया, जबकि वाजपेयी सरकार में राष्ट्रीय एकता और विकास योजनाओं में सहयोग किया।
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नहीं रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा। - फोटो : PTI
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विस्तार
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दिल्ली भाजपा के प्रथम अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा का 30 सितंबर 2025 को 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया।  एम्स दिल्ली में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम साँस ली। जनसंघ काल से लेकर भाजपा के उदय तक, प्रो. मल्होत्रा भाजपा और दिल्ली की राजनीति का अहम किरदार रहे।

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अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गजों के साथ उनका नाता गहरा था। संगठन विस्तार करना हो या बात वैचारिक प्रतिबद्धता की हो, वह अटल-आडवाणी युग के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बने रहे।

वे पांच बार सांसद और दो बार विधायक चुने गए, तथा लोकसभा में भाजपा संसदीय दल के उपनेता के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। 

वाजपेयी-आडवाणी की साथ

मल्होत्रा जी की राजनीतिक शुरुआत 1960 के दशक में भारतीय जनसंघ से हुई, जब उन्होंने दिल्ली में संघ की विचारधारा को जमीनी स्तर पर फैलाया। वे वह आरएसएस छोड़कर जनसंघ में शामिल हुए, जहां वाजपेयी की काव्यात्मक दृष्टि और आडवाणी की संगठनात्मक कुशलता के बीच एक मजबूत स्तंभ बने। 
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एक यादगार घटना 1960-70 के दशक की है, जब दिल्ली मेट्रोपोलिटन कौंसिल से जुड़े मल्होत्रा जी के सरकारी बंगले में आडवाणी जी फ्रंट ऑफिस में बैठते थे। उनके घर पर हुई एक महत्वपूर्ण मीटिंग में केदारनाथ साहनी और मदनलाल खुराना के साथ डीएमसी एल्डरमैन की लिस्ट तैयार की गई, जिसने आडवाणी के राजनीतिक उदय की नींव रखी।

1980 में भाजपा के गठन में वे संस्थापक सदस्य थे और दिल्ली इकाई के पहले अध्यक्ष बने। राम जन्मभूमि आंदोलन में आडवाणी के नेतृत्व में सक्रिय योगदान दिया, जबकि वाजपेयी सरकार में राष्ट्रीय एकता और विकास योजनाओं में सहयोग किया।

युवा अवस्था में तीनों ने घंटों चर्चा, फिल्म देखना, चाट खाना और होली मनाने जैसे सामाजिक पल साझा किए।  लोकसभा में उपनेता के रूप में उन्होंने भाजपा की विपक्षी भूमिका को प्रभावी बनाया, विशेषकर 2004 के बाद, जहां सार्वजनिक लेखा समिति के अध्यक्ष भी रहे। 

जीवन के अन्य बहुआयामी पहलू

राजनीति के अतिरिक्त, मल्होत्रा जी हिंदी साहित्य में पीएचडी धारक थे और दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़कर युवाओं को प्रेरित किया। खेल प्रशासन में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में 1974 के एशियाई खेलों में भारतीय दल का नेतृत्व किया, तथा आर्चरी और चेस फेडरेशन को मजबूत बनाया।

सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल को बढ़ावा दिया, जिससे लाखों युवाओं को दिशा मिली।

प्रो. मल्होत्रा जी का निधन हमें याद दिलाता है कि सच्ची विरासत संगठन निर्माण, वैचारिक संघर्ष और सामाजिक दायित्वों में निहित होती है। वाजपेयी-आडवाणी की त्रयी में वे एक अनमोल कड़ी थे, जिनकी सादगी और समर्पण की मिसाल दी जाती रहेगी।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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