14 साल पहले नासा ने एक क्षुद्र गृह का नाम ही पंडित जसराज के नाम पर रखा था- फाइल फोटो
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- वल्लभाचार्य द्वारा रचित पंडित जसराज की सबसे प्रिय मधुराष्टकम् रचना:-
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं ।
हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ।।
वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरं ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ।।
वेणुर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ ।
नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ।।
गीतं मधुरं पीतं मधुरं भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरं ।
रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ।।
करणं मधुरं तरणं मधुरं हरणं मधुरं रमणं मधुरं ।
वमितं मधुरं शमितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ।।
गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा ।
सलिलं मधुरं कमलं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ।।
गोपी मधुरा लीला मधुरा युक्तं मधुरं मुक्तं मधुरं।
दृष्टं मधुरं सृष्टं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ।।
गोपा मधुरा गावो मधुरा यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा ।
दलितं मधुरं फलितं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं ।।
14 साल पहले नासा ने एक क्षुद्र गृह का नाम ही पंडित जसराज के नाम पर रखा था। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय संगीतज्ञ थे। उल्लेखनीय है कि नासा द्वारा इस क्षुद्र ग्रह का नंबर पंडित जसराज की जन्मतिथि से उलट रखा गया।
नासा और इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन के वैज्ञानिकों ने बृहस्पति और मंगल के बीच 300128 नंबर का क्षुद्र ग्रह 11 नवंबर 2006 को खोजा था और इसका नाम पंडित जसराज के नाम पर रखा। इस क्षुद्र ग्रह की खोज मंगल और बृहस्पति के बीच हुई थी।
इसके पहले मोजार्ट, बीथोवन और टेनर लूसियानो पावारोत्ति के नाम पर थे क्षुद्र ग्रहों के नाम रखे गए थे। पंडित जसराज की जन्मतिथि 28 जनवरी 1930 है जो कि इस क्षुद्र ग्रह के नंबर के उलट है। नामकरण के समय नासा ने कहा था- पंडित जसराज क्षुद्रग्रह हमारे सौरमंडल में गुरु और मंगल के बीच रहते हुए सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।
पंडित जसराज को संगीत के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्म विभूषण, पद्मभूषण, पद्मश्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, मास्टर दीनानाथ मंगेशकर अवॉर्ड, लता मंगेशकर पुरस्कार और महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार से अलंकृत किया गया। आज हमारे बीच पंडित जसराज सशरीर भले ही मौजूद न रह गए हों, पर उनकी आवाज और उनका अस्तित्व हमेशा रहेगा।
- उत्तराखंड से आध्यात्मिक रिश्ता
देवभूमि उत्तराखंड से पंडित जसराज का सदा ही आध्यात्मिक संबंध रहा। मधुरा जसराज ने फिल्म डिविजन के लिए जसराज प्रोडक्शन की ओर से संगीत मार्तण्ड पंडित जसराज पर एक डाॅक्यूमेंट्री भी बनाई जिसकी सूटिंग 1998 में बदरीनाथ, केदारनाथ और रुद्रप्रयाग आदि विभिन्न स्थानों पर हुई। चूंकि शूटिंग उन्हीं पर होनी थी इसलिए वह सभी स्थानों पर उपस्थित रहे।
वर्ष 2013 की महाविनाशकारी केदारनाथ आपदा के बाद जब उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर एक तरह से ग्रहण लग गया था तो अगले साल 4 मई 2014 को केदारनाथ के कपाटोद्घाटन पर पंडित जसराज को भजन गायन के लिए आमंत्रित किया गया। यद्यपि पंडित जी उस कार्यक्रम में नहीं आ सके मगर उन्होंने अपनी शिष्या तृप्ति को भगवाल केदारनाथ की आराधना के लिए भेजा।
मुझे भी कई साल पहले पंडितजी को सुनने और उनके साथ भोजन का सौभाग्य मिला। वह देहरादून के बलबीर रोड पर अपनी एक शिष्या रश्मि नम्बूरी के घर 2008 में पधारे थे।
महानता और सादगी-सहजता का ऐसा विलक्षण संगम के साक्षत् दर्शन मुझे उस दिन हुए। जिस व्यक्ति के नाम का डंका अंतरिक्ष में तक बजता हो वह निवेदन सुनते ही बिना वाद्ययंत्रों के ही मधुराष्टकं वाली श्रीकृष्ण की स्तुति सुनाने लगे। उस दिन उन्होंने दो या तीन भजन सुना कर हम सबको मुंत्रमुग्ध कर दिया था।
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