पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट पर चैनल को भरपूर राजस्व मिलता है।
- फोटो : Instagram
अनेक बार तो यह 80 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। भारतीय कंटेंट पर चैनल को भरपूर राजस्व मिलता है। हाईकोर्ट की ओर से लगाईं गई पाबंदी के विरोध में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण के मुखिया सलीम बेग सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका लेकर पहुंचे थे। उनकी दलील थी कि भारतीय कार्यक्रमों में विशुद्ध मनोरंजन होता है। यह कोई दुष्प्रचार नहीं करता। इस पर सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि जो भी हो,इससे पाकिस्तानी संस्कृति को क्षति पहुंचती है। अब इस मामले की सुनवाई फरवरी में होगी।
क्यों खतरा महसूस करते हैें पाकिस्तान के हुक्मरान
दरअसल, पाकिस्तान की हुक़ूमतों को हिन्दुस्तान की साझा विरासत से हरदम ख़तरा बना रहता है। उन्हें आशंका रहती है कि अगर पाकिस्तान का समाज हिन्दुस्तान के समाज से घुल मिल गया ( जो वास्तव में एक ही था ) तो वे किस आधार पर अपनी नफ़रत की राजनीति करेंगे ?इसलिए समय समय पर उन्हें कोई भूत सवार हो जाता है और वे तुग़लक़ी फ़रमान जारी करती रहती हैं। इमरान ख़ान भी प्रधानमंत्री बनने के बाद फ़ौज़ और कटटरपंथियों की कठपुतली बन कर रह गए हैं।
अपने देश की ख़स्ता -जर्जर आर्थिक हालत से अवाम का ध्यान बंटाने के लिए कभी कश्मीर कार्ड तो कभी भारत से घृणा की राजनीति खेल रहे हैं। हाल ही में उन्होंने इस्लामी कठमुल्लाओं के दबाव में टीवी चैनलों पर सख़्ती दिखानी शुरू कर दी है। अब चैनलों में बैडरूम - दृश्य ,प्रेम के अंतरंग दृश्य,विवाहेत्तर रिश्तों ,शराब,ड्रग्स ,आधुनिक पहनावे और बोल्ड थीम वाले धारावाहिकों तथा कंटेंट पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई है। यहां तक कि वहां के समाज में महिलाओं की बदतर स्थिति और अपने अधिकारों को लेकर उनके संघर्ष दिखाने वाले कथानकों पर बनी फिल्मों और धारावाहिकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
दो हज़ार उन्नीस में दाख़िल हो चुके विश्व में पाकिस्तानी सोसायटी पचास बरस वाले सोच और सिस्टम का मुक़ाबला कर रही है। यह मुल्क़ के लिए और वहां की नई नस्लों के लिए कितनी घातक है- इमरान ख़ान की सरकार को इसका अंदाज़ा नहीं है। आने वाले दिन इस लिहाज़ से और भी कठिन हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.