कई लोग यकीन करते हैं और पश्चिमी दुनिया के मिथक में लाल बाल शैतान के माने जाते हैं।
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अपने दसवें उपन्यास ‘द रेड हेयर्ड वुमन’ में पामुक जिन मिथकों का प्रयोग करते हैं उनमें भी मां के बालों का रंग लाल है, बल्कि उनमें तो माता-पिता दोनों के लाल रंग के बाल होने की बात आती है। लाल बाल वाली के न केवल बाल लाल हैं वह स्टेज पर लाल रंग की बदन दिखाती लंबी पोशाक पहनती है। जब इन मिथकों पर बना नाटक करती है तो उसके बालों का रंग लाल होता है।
इन मिथक पर बन रही फिल्म में भी लाल बाल वाली का जिक्र उपन्यास करता है। कई लोग यकीन करते हैं और पश्चिमी दुनिया के मिथक में लाल बाल शैतान के माने जाते हैं। पहली औरत लिलिथ के बाल लाल होने की बात भी कही जाती है।
ओरहान पामुक ने अपनी नायिका गुलजहां को ऐसा गढ़ा है कि वह खुद-ब-खुद आजादी, बराबरी के दर्जे का संकेत देती है। उसका दूसरा आदमी तुर्गे यकीन करता है कि लाल बाल वाली औरतें चरित्रहीन होती हैं। ये किसी से भी रिश्ता कायम कर सकती हैं, कोई भी उनसे रिश्ता कायम कर सकता है। गुलजहां ‘वीमेन अकॉर्डिंग टू मेन’ नाम का एक मजमून पढ़ा था। इस मजमून के साथ एक खूबसूरत लाल बाल वाली औरत की तस्वीर थी।
तस्वीर के नीचे लिखा था: ‘आतिश मिजाज और राजदां’। तस्वीर की तेज दिमाग औरत के होठों की शक्ल और उसका इजहार गुलजहां को बहुत अपना-सा लगा। वह उस तस्वीर को काट कर दीवाल पर चिपका लेती है। तस्वीर को अनवर एक दिन दो टुकड़ों में फाड़ डालता है जिसे वह फिर से जोड़ कर दीवाल पर लगा लेती है। बाद में वह तस्वीर अनवर को देती हुई कहती है, ‘मेरे प्यारे बेटे! मैं खुश हूं कि अब तुम अपना अफसाना लिखना शुरु करने वाले हो।’ आगे कहती है, ‘जब खतम करना तो इस तस्वीर को कवर पर रखना।’
स्वयं पामुक ने इसे (हत्या) अपने उपन्यास, ‘माई नेम इज रेड’ में दिखाया है। लाल रंग का प्रयोग आग, अंगारे, चिंगारी, मशाल के लिए भी किया जाता है।
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ओरहान पामुक के इस आत्मकथात्मक उपन्यास में कवर से ले कर अंतिम सफे तक लाल रंग बिखरा हुआ है। यह प्यार-प्रेम, रहस्य, मादकता, यौनिकता, मौत सब की तस्वीर है। नकारात्मक और सकारात्मक दोनों रूप में है। गुल शब्द खास फूल गुलाब के लिए काम में लाया जाता है। फारसी शब्द गुल का एक मतलब सुर्ख रंग की चिंगारी होता है। जहां का मतलब दुनिया होता है। गुलजहां जिन्दगी और जला कर सब बरबाद करने वाली दोनों के अर्थ में प्रयुक्त है।
उपन्यास दो और औरतों की बात करता है, उन्हें नायिका के बरक्स खड़ा करता है। जेम की पत्नी आयशा उसकी मां आसमां दोनों आदर्श पत्नियां हैं। जेम की होने वाली बीवी के बारे में उसका पिता कहता है, ‘तुमने ठीक अपनी मां जैसी लड़की पाई है।’ ये दोनों औरतें परम्परागत परिवार से आती हैं।
एक फर्क है जेम की मां का बच्चा हुआ, आयशा को औलाद नहीं हुई। फिर भी जेम और आयशा खुश है। जेम की मां आसमां को जब जेम का पिता छोड़ जाता है तब भी वह उसके प्रति वफादार बनी रहती है और बेटे तथा परिवार की फिकर करती है। उपन्यास दिखाता है कि आयशा बांझ है। जेम केवल एक बार लाल बाल वाली के साथ सो कर उससे औलाद पैदा कर चुका है।
इन दोनों औरतों में फर्क है। आसमां अनपढ़ है, आर्थिक रूप से पूरी तरह अपने पति पर निर्भर। पति उसे छोड़ जाता है तो उसकी माली हालत खराब हो जाती है, जेम को काम की खोज में निकलना पड़ता है। आयशा पढ़ी-लिखी है। कॉलेज में पढ़ते समय वे मिले थे, धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती होती है। जेम उससे संबंध बनाना चाहता है, आयशा शादी के पहले जिस्मानी नजदीकी नहीं बनाती है। बाद में दोनों की सगाई और शादी होती है।
आर्थिक रूप से स्वतंत्र आयशा घर संभालती है, पति की रूचि और कारोबार में साथ देती है। पति के प्रति वफादार रहती है। जेम उसे लाल बाल वाली औरत से अपने संबंध को तब तक नहीं बताता है जब तक कि पानी सिर के ऊपर नहीं आ जाता है। लाल बाल वाली ऐसी औरत है जिसका संबंध जेम के पिता से था। जब जेम उससे संबंध बनाता है तब भी वह जानती थी कि जेम कौन है। वह कुआं खोदने वाले उस्ताद महमूद को भी जानती है।
वह किशोर जेम से एक बार जिस्मानी संबंध बनाती है। गुलजहां जेम से कहती है, ‘डरो मत, मैं तुम्हारी मां की उम्र की हूं।’ हमबिस्तर होने के वक्त वह केवल 17 साल का था जबकि लाल बाल वाली 33 साल की एक शादीशुदा औरत थी। उसकी दो बार शादी हो चुकी थी, उस समय उसका दूसरा पति जीवित था। पिता-पुत्र एक तरह की औरत, परम्परागत औरत से शादी और एक ही औरत, लुभाने वाली औरत, लाल बाल वाली, गुलजहां से प्रेम करते हैं।
‘द रेड हेयर्ड वुमन’ कहानी है परिवार की, मोहब्बत की, जवानी-बुढ़ापे की, रिवायत-आधुनिकता की। यह कहानी है तुर्की के बदलते सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक परिवेश की। तुर्की के समाज में औरत की।
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