ब्रिटिश कलाकार और पर्यावरणविद एंडी गोल्डस्वर्थी वर्षों से प्राकृतिक वस्तुओं से अस्थायी ‘लैंड आर्ट’ बनाते रहे हैं। उनकी बनाई कलाकृतियां प्रकृति में ही रहती हैं और समय के साथ धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं। गोल्डस्वर्थी मानते हैं कि ऐसी कला हमें प्रकृति को नए नजरिये से देखने और उसके साथ अपने गहरे रिश्ते को महसूस करने का अवसर देती है।
ड्रेक्सेल यूनिवर्सिटी की हेल्थ, आर्ट्स, लर्निंग एंड इवैल्यूएशन रिसर्च लैब की संस्थापक गिरिजा कैमल कहती हैं कि लैंड आर्ट बनाना बेहद आसान है। इसके लिए किसी विशेष प्रशिक्षण या महंगे सामान की जरूरत नहीं होती। बस किसी पार्क, बगीचे या खुले स्थान पर जाएं और वहां मौजूद सूखी पत्तियां, पत्थर, टहनियां, पेड़ की छाल या अन्य गिरी हुई प्राकृतिक चीजें इकट्ठा करें। अब इनसे गोलाकार आकृतियां, सर्पिल डिजाइन (नेचर मंडला) या अलग-अलग आकार बनाएं। मोनमाउथ यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की प्रोफेसर मेगन डेलाने कहती हैं कि अगर यह कला खुले वातावरण में बनाई जाए, तो इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं। शोध भी बताते हैं कि कला का सृजन तनाव कम करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और मन को सकारात्मकता प्रदान करता है। वहीं, प्रकृति के बीच समय बिताने से मानसिक शांति, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है। जब ये दोनों गतिविधियां एक साथ होती हैं, तो उनके लाभ भी दोगुने हो जाते हैं। डेलाने के अनुसार, पत्थरों को सजाना और पत्तियों को व्यवस्थित करना ध्यान (मेडिटेशन) की तरह काम करता है। आप इस गतिविधि को परिवार या दोस्तों के साथ भी कर सकते हैं। इससे रचनात्मकता के साथ आपसी जुड़ाव मजबूत होता है।
स्क्रीन से दूर रहकर रचनात्मक बनने के कई और तरीके भी हैं। किसी पार्क में बैठकर स्केच बनाइए, संग्रहालय या कला प्रदर्शनी में जाइए या प्रकृति को ध्यान से देखिए। कभी-कभी दिमाग को सबसे बड़ी राहत किसी डिजिटल डिटॉक्स से नहीं, बल्कि मिट्टी, पत्तियों और पत्थरों के बीच बिताए गए कुछ शांत पलों से मिलती है।