सैन्य ड्रोन उद्योग में निजी क्षेत्र का योगदान बहुत सामयिक है, जो भारतीय रक्षा को सामरिक लाभ और नई ऊंचाई प्रदान करेगा। कई सरकारी और निजी संस्थानों में ड्रोन से जुड़े हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी ने फरवरी 2021 में भारत की पहली ड्रोन फ्लाइंग साइट पर DGCA प्रमाणित प्रशिक्षण शुरू किया। आत्मनिर्भर भारत नीति के अंतर्गत भारत सरकार ने ड्रोन और ड्रोन उपकरण के लिए 120 करोड़ रूपये के लागत की PLI स्कीम को मंजूरी दी है।
2022-23 के बजट में ड्रोन शक्ति योजना की भी घोषणा की गई थी, इसके तहत ड्रोन-एस-ए-सर्विस (DrAAS) के लिए स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ सभी राज्यों में चुनिंदा ITI में कौशल विकास के लिए ड्रोन से जुड़े हुए पाठ्यक्रम भी शामिल होंगे। इस समय भारत में ड्रोन के निर्माण के लिए 333 स्टार्ट-अप स्थापित हो चुके हैं, और देश के नौजवानों और उधमियों द्वारा और नी तेजी से विकसित किये जा रहे हैं।
पड़ोसी देशों में बढ़ती चुनौतियों और भू-रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत इस क्षेत्र में जल्द से जल्द आत्मनिर्भरता हासिल करे। इसके लिए स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं और नई टेक्नोलॉजी को विकसित करना जरूरी है। जैसे-जैसे दुनियाभर में प्रगति हो रही है भारत पीछे रहने का जोखिम नहीं उठा सकता। इस दृष्टि से भारत में जहां आत्मनिर्भरता के लिए DRDO और पब्लिक सेक्टर में ड्रोन निर्माण और टेक्नोलॉजी में तेजी से विकास किया जा रहा है, वहीं प्राइवेट सेक्टर द्वारा इस क्षेत्र में बहुत तेजी से काम हो रहा है। इसके साथ ही मित्र देशों से भी उच्च तकनीक और संयुक्त निर्माण के लिए करार किये जा रहे हैं। कुछ समय पहले अमेरिका के साथ रक्षा समझौते में भारत ने 30 MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन खरीदने का समझौता किया था।
इस वर्ष भारत अपने गणतंत्र की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। गणतंत्र दिवस के मौके पर समारोह में देश के सैन्य बल और सुरक्षा उपकरणों का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ। इस अवसर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुख्य अतिथि थे। उनकी दो दिवसीय यात्रा पर भारत और फ्रांस सरकार के बीच कई मुद्दों पर समझते हुए। इसमें एक रक्षा समझौते (डिफेंस डील) के अंतर्गत दोनों देशों ने महत्वपूर्ण सैन्य साजो सामान साथ विकसित करने का एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक रोडमैप जारी किया है।
आज जब हमारे देश को कुछ पड़ोसी देशों और अन्य तत्वों से सुरक्षा और तनावपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, यह अपरिहार्य है कि हमारे सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण, जिनमें उच्च-स्तरीय ड्रोन का विशेष महत्व है, उपलब्ध कराए जाएं और यह संतोष का विषय है कि हमारी सरकार और प्राइवेट क्षेत्र दोनो मिलकर इस बारे में तेजी से काम कर रहे हैं।
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नोट- धनेन्द्र कुमार भारत सरकार के भूतपूर्व रक्षा उत्पादन सचिव, विश्व बैंक में भूतपूर्व भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और भूटान के कार्यकारी निदेशक, और प्रथम चेयरमैन सीसीआई रहे हैं।
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