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राष्ट्रीय पक्षी सप्ताह: कहानी प्रसिद्ध भारतीय पक्षी-विज्ञानी डॉ. सलीम अली की

सार

पक्षियों के अध्ययन में अपने महान योगदान के लिए प्रसिद्ध भारतीय पक्षी-विज्ञानी डॉ. सलीम अली, ऐसे पहले शख्स थे जिन्होंने ने भारत में पहली बार व्यवस्थित पक्षी सर्वेक्षण करवाया था।
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Bird Man Of India Salim Ali - फोटो : V. Santharam
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विस्तार
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जब आप 'बर्डमैन ऑफ इंडिया' शब्द सुनते हैं तो आपके दिमाग में कौन आता है? इस नाम से जानने वाले डॉ. सलीम मोइज़ुद्दीन अब्दुल अली, एक ऐसे व्यक्ति थे जिनकी गहन टिप्पणियों और पंछियों के बारे में किए गए अध्ययन ने हर किसी के दृष्टिकोण को बदल दिया है, चाहे वह पक्षी विज्ञानी, पर्यावरणविद, प्रकृतिवादी या कोई भी व्यक्ति हो जो पक्षी-पालन के क्षेत्र से थोड़ा भी जुड़ा है।

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पक्षियों के अध्ययन में अपने महान योगदान के लिए प्रसिद्ध भारतीय पक्षी-विज्ञानी डॉ. सलीम अली, ऐसे पहले शख्स थे जिन्होंने ने भारत में पहली बार व्यवस्थित पक्षी सर्वेक्षण करवाया था। 'द बुक ऑफ इंडियन बर्ड्स' सहित उनकी कई पुस्तकों ने कई पक्षी विज्ञानी और प्रकृति प्रेमियों में पंछियों के बारे में दिलचस्पी पैदा की है और हमारे आसपास के पंख वाले दोस्तों के बारे में गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान की है।


क्या आप जानते हैं कि बचपन में डॉ. अली को स्पोर्ट-शूटिंग में गहरी रुचि थी? बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बी एन एच एस) के पूर्व सचिव डब्ल्यू.एस. मिलार्ड ने उन्हें पक्षियों के अध्ययन से परिचित कराया था, जिन्होंने एक असामान्य रंग की गौरैया (बाद में पीतगला गौरैया के रूप में पहचानी गई) को पहली बार देखा, जिसे युवा सलीम ने अपने खिलोने वाली बन्दूक (एयर गन) के साथ खेल के लिए शूट किया था। डॉ. सलीम अली की रुचि तब बढ़ने लगी जब मिलार्ड ने उन्हें बीएनएचएस के खिलोने-पक्षियों का संग्रह दिखाया और उन्हें कुछ पक्षियों की किताबें उधार दीं।

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हर साल 5 से 12 नवंबर के बीच हम राष्ट्रीय पक्षी सप्ताह मनाते हैं। यह सप्ताह का महत्त्व न केवल डॉ. अली के जन्मदिन (12 नवंबर) को मानाने या उनकी विरासत और योगदान को श्रद्धांजलि देने से है, बल्कि कई बर्डिंग वॉक, पंछियों के बारे में जागरूक करने वाली प्रस्तुतियां पेश करके और पक्षी-गणना जैसे कई प्रयास से जुड़ा है जो की भारत की समृद्ध एवियन जैव विविधता की सराहना और इसके संरक्षण की आवश्यकता को बढ़ावा दे सकती हैं। ये पक्षी-दर्शन और पक्षी-गणना कार्यक्रम पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने और पक्षी प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस वर्ष बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी डॉ. सलीम अली द्वारा लिखे गए पत्र, उनकी डायरी, फील्ड नोट्स, टाइपराइटर, कैमरा, दूरबीन, पासपोर्ट और पुरस्कार सहित उनके व्यक्तिगत सामानों का संग्रह प्रदर्शित करेंगे जिससे उनकी विरासत का सम्मान हो सके और इससे लोगों में भी पंछियों के प्रति रूचि बढ़ सके। इतना ही नहीं, देश भर में कई बर्डिंग समुदायों द्वारा कई बर्ड-वॉचिंग और बर्ड-काउंट फील्ड यात्राएं आयोजित की जा रही हैं।

यह सप्ताह श्री मारुति चितमपल्ली जी की जन्म का भी स्मरण करता है जिन्होंने हमारी प्रकृति और वन्य जीवन के संरक्षण में अद्वितीय योगदान दिया है। महाराष्ट्र के उप मुख्य वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त, चितमपल्ली जी ने जंगल और उसके आसपास की दुनिया के कई तत्वों को साहित्य के रूप में अपने शब्दों में पिरोया है। पक्षी हों या पौधे, मराठी साहित्य में कई नए नाम उन्हीं की वजह से दर्ज हुए हैं।

यह सप्ताह उन सभी पक्षी विज्ञानियों, प्रकृतिवादियों, पर्यावरणविदों और प्रकृति प्रेमियों के सम्मान में भी मनाया जाता है जिहोने पंछी जगत को समझने और अपनी इस शिक्षा को सबमे बाँट कर व् पंछियों को बचाने के लिए अनेक प्रयास और विभिन्न योगदान दिए हैं। बर्ड काउंट इंडिया हर साल की तरह पक्षी-गणना कार्यक्रम आयोजित करता है और सभी को इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस तरह के आयोजन वर्ष भर किसी क्षेत्र/इलाके में खोजी जा सकने वाली विविधता में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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