फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: बहुत याद आओगे, अलविदा नाना पाटेकर

सार

हिन्दी फिल्म में नायक बनने के लिए जिस खास रूप-रंग की मांग होती है, उसमें नाना कहीं फिट नहीं होते हैं। मगर जब फिल्मों में आए तो न केवल सर्वोत्तम सहायक अभिनेता, सर्वोत्तम खलनायक वरन सर्वोत्तम अभिनेता का खिताब भी अपने नाम किया। 
विज्ञापन
नहीं रहे नाना पाटेकर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

‘मेरी आवाज ही मेरी पहचान है’, भले ही ये गीत हेमा मालिनी पर फिल्माया गया है और इसे लता मंगेशकर की पहचान, उनके अमर स्वर के लिए प्रयोग किया जाता है। मगर यदि यह गाना किसी अभिनेता केलिए सटीक बैठता है, तो वो हैं, नाना पाटेकर।

विज्ञापन


जी हां, नाना पाटेकर की प्रभावशाली रोबदार आवाज में गहनता थी। वे अपनी आवाज से भी पहचाने जाते हैं। मगर यह आवाज आज यानी 8 अक्तूबर की सुबह सदा-सदा के लिए खामोश हो गई। मगर यह गुम नहीं हुई है। सिनेमा के परदे और दर्शकों के दिल में सदैव गूंजती रहेगी। नाना पाटेकर ने नाटक, हिन्दी, मराठी फिल्मों में काम किया और अपने विशिष्ट अभिनय की छाप दर्शकों पर छोड़ी।

महाराष्ट्र में 1 जनवरी 1951 को संजनाबाई पाटेकर और दिनकर पाटेकर के घर जन्मे नाना (मूल नाम विश्वनाथ) का जन्म हुआ। चरित्र में यथार्थवाद को प्रमुखता देने वाले नाना फिल्म में बाद में आए, उन्होंने अपने अभिनय की शुरुआत नाटकों से की। वे मराठी नाटकों में सक्रिय थे, उन्होंने विजया मेहता, विजय तेंदुलकर जैसे नाटक निर्देशकों के साथ काम किया।
विज्ञापन


विजय तेंदुलकर के प्रसिद्ध नाटक ‘जाति ही पूछो साधु की’ में वे बबना की भूमिका करते थे। आप सोच सकते हैं, विजय तेंदुलकर और विजया मेहता के नाटकों में काम करने केलिए अभिनय के किस रेंज की आवश्यकता होती है और नाना ने इनके साथ लम्बे समय तक काम किया।

वे रंगायन नाटक समूह में विजया मेहता के साथ थे, एक समय उन्होंने विजया के मराठी नाटक ‘हमीदाबाईची कोठी’ (हमीदाबाई की कोठी) में अभिनय किया। उन्होंने अयशा जुल्का के साथ 2000 में नाटक ‘पुरुष’ किया। जिसका मंचन इंग्लैंड, अमेरिका और केनेडा के शहरों में हुआ।

हिन्दी फिल्म में नायक बनने के लिए जिस खास रूप-रंग की मांग होती है, उसमें नाना कहीं फिट नहीं होते हैं। मगर जब फिल्मों में आए तो न केवल सर्वोत्तम सहायक अभिनेता, सर्वोत्तम खलनायक वरन सर्वोत्तम अभिनेता का खिताब भी अपने नाम किया।

उन्हें फिल्म ‘क्रांतिवीर’ केलिए न केवल राष्ट्रीय फिल्म का सर्वोत्तम अभिनेता का पुरस्कार प्राप्त हुआ, वरन इसी साल उन्हें इसी फिल्म के लिए फिल्मफेयर का भी सर्वोत्तम अभिनेता का पुरस्कार मिला। इसी तरह उन्हें सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार फिल्म ‘अग्नि साक्षी’ और फिल्म ‘परिन्दे’ केलिए मिला, तो फिल्मफेयर ने फिल्म ‘परिन्दे’ केलिए इसी श्रेणी का पुरस्कार उन्हें दिया।

‘अपहरण’ फिल्म में उन्होंने कमाल कर दिया। नकारात्मक भूमिका इतने आधिकारिक तरीके से की, तो न केवल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पाया बल्कि सर्वोत्तम नकारात्मक भूमिका का जी-सिने अवार्ड तथा अवार्ड्स ऑफ दि इंटरनेशनल इंडियन फिल्म अकादमी का यह पुरस्कार भी उनकी झोली में आया। फिल्मफेयर ने उन्हें एक बार और बेस्ट नेगेटिव रोल करने केलिए फिल्म ‘अंगार’ केलिए पुरस्कृत किया

119 फिल्में और 16 पुरस्कार

ऐसा अब तक केवल एक अन्य अभिनेता के साथ हुआ है, जिसे इन श्रेणियों केलिए इतने पुरस्कार फिल्मफेयर और सर्वोत्तम अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। वैसे नाना पाटेकर को फिल्म के कुल 16 पुरस्कार मिले और आएमडीबी के अनुसार उन्होंने 119 फिल्मों में काम किया। उनके फिल्म अभिनय की गुणवता को पहचानते हुए 2013 में भारत का महत्वपूर्ण सम्मान पद्म श्री भी दिया गया है।

1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपना फिल्मी कैरियर का प्रारंभ करने वाले नाना पाटेकर ने उपरोक्त फिल्मों के अलावा ‘खामोशी: द म्युजिकल’, ‘नट सम्राट’, ‘अब तक छप्पन’ आदि फिल्मों में काम किया। आजकल तो ‘छप्पन’ शब्द का प्रयोग दूसरे अर्थ में होने लगा है। नाना पाटेकर अपने मनोविकृति की प्रवृति वाले अभिनय के लिए प्रसिद्ध रहे, उनके बारे में जब भी बात होती है, लोग उनके बदलते मूड की चर्चा अवश्य करते हैं।

संवाद अदायगी की भी उनकी अपनी खास अदा रही है। इस कारण कई बार वे स्वयं को दोहराते हुए भी लगते हैं। बॉलीवुड की यह कमजोरी भी है, वह अक्सर अभिनेता को टाइप्ट्ड बना देते हैं, एक खास भूमिका तय कर देते हैं, हालांकि नाना के पास अभिनय की काफी बड़ी रेंज थी। एक ओर जहां वे नेगेटिव भूमिकाएं सजहता और ऑथेंटिसिटी के साथ करते थे, वही उन्होंने कुछ हास्य भूमिकाएं भी कुशलतापूर्वक निबाही। फिल्म ‘वेलकम’ इसका उदाहरण है। कौन भूल सकता है, यह डॉयलॉग ‘कंट्रोल उदय...कंट्रोल’?

फिल्म ‘टैक्सी नंबर 9211 नो दो ग्यारह’, ‘राजू बन गया जेंटलमैन’, ‘तुम मिलो तो सही’, ‘हम दोनों’, ‘तड़का’, ‘कमाल धमाल’, ‘कोहराम’, ‘बफमास्टर’, ‘वेलकम बैक’ आदि उनकी कुछ फिल्में हैं, जहां उन्होंने दर्शकों केलिए हास्य उत्पन्न किया है। ‘कोहराम’ में उनकी और इंस्पेक्टर (लेडी) किरण पाटकर और बीबीसी बने (नाना पाटेकर) की केमिस्ट्री देखते बनती है।

याद कीजिए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कृत फिल्म ‘दीक्षा’ (1991) में उनका अभिनय। कौन कहेगा, ‘कंट्रोल उदय...कंट्रोल’ कहने वाले, ‘कोहराम’ के पत्रकार और ‘दीक्षा’ का कोगा (नाना) एक ही अभिनेता हैं। और हां, अभिनय के अलावा उन्होंने फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया था और इसका परिणाम है, फिल्म ‘प्रहार’।

ये तो हुई नाना पाटेकर की फिल्मी बातें मगर इसके इतर उनका कई और रूप थे। सर जे. जे. इंस्टिट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट से पढ़े, वे मुंबई पुलिस के लिए स्केच आर्टिस्ट का काम करते थे। साथ ही समाज कल्याण के काम में बिना शोर-शराबे के तन, मन और धन  जुड़े हुए थे।

'किसानों' के नाना

2015 में उन्होंने ‘नाम’ (NAAM) संस्था की स्थापना की। यह फाउंडेशन उन्होंने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के सात मिल कर बनाया। इसके तहत वे सूखे एवं अन्य कारणों से परेशान महाराष्ट्र के किसानों की सहायता करते थे। जब उन्हें राज कपूर पुरस्कार में 10 लाख रुपए नगद मिले तो उन्होंने असली राशि इन लोगों के बीच बाट दी। मगर नाना पाटेकर ने अपने इस पक्ष का कभी ढ़िढ़ोरा नहीं पीटा, जबकि लोग एक पिआऊ खोलते हैं, तो अपने प्रचार-प्रसार में कितना हंगामा करते हैं। उनके अपने हर काम करने की एक खास अदा थी, इसीलिए वे अनोखे थे, उनकी हंसी भी अनोखी थी।

कलाकार की सृजनात्मक यात्रा पर उनका कहना था, बातों को प्रभाव डालने दो, आपके हृदय में स्थान बनाने दो, उसे कुछ वहां समय पड़ा रहने दो। जब मस्तिष्क तक पहुंचे, पक जाएं, तब उन विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करें।

यही कारण है, जब वे गुजरे तो फिल्म जगत, सत्ता-विपक्ष राजनीति से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कई अभिनेताओं ने उनके साथ काम करने को स्मरण किया, उनके जाने पर दु:ख व्यक्त किया।  ऐसे बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न व्यक्तित्व को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि!


-------------------------

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें