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दूसरा पहलू: याद बहुत आते हैं वो दूरदर्शन वाले दिन... 2024 में डीटीएच सेवाओं के सब्सक्राइबर करीब 40 लाख घटे

Thu, 10 Jul 2025 08:08 AM IST
ज्योति भास्कर मुकुल श्रीवास्तव

सार

याद है वह वक्त जब एक टीवी पर पूरा मोहल्ला सीरियल देखता था। अब मोबाइल में सब कुछ होने पर भी वह आनंद नहीं है। 2024 में डीटीएच सेवाओं के सब्सक्राइबर करीब 40 लाख कम हो गए। ओटीटी उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब 54 करोड़ पहुंच गई।
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मुकुल श्रीवास्तव ने बताईं टीवी की यादें (फाइल / प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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दूरदर्शन का वह दौर याद करें, जब घरों में एक ही टीवी होता था और रिमोट के लिए बच्चों में खींचतान आम बात थी। बच्चे स्कूल से आते ही शक्तिमान को देखने के लिए टीवी स्क्रीन के सामने जुट जाते थे, चित्रहार की धुन का पूरा परिवार मिलकर लुत्फ उठाता था और रामायण, महाभारत के प्रसारण के समय तो मोहल्लों की गलियां तक खाली हो जाया करती थीं। वे पल अब यादों में रह गए हैं। अब हर हाथ में अपनी एक छोटी स्क्रीन है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने टीवी को अब जेब में समेट दिया है।

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दर्शक अब पारंपरिक टीवी को छोड़कर ज्यादा निजी और इंटरैक्टिव अनुभव के लिए सोशल मीडिया और ओटीटी एप का रुख कर रहे हैं। ट्राई की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में डीटीएच सेवाओं के सक्रिय सब्सक्राइबर करीब 40 लाख कम हो गए। साल 2024 में भारत में ओटीटी उपयोगकर्ताओं की संख्या करीब 54 करोड़ पहुंच गई है। 

नैल्सेन के मुताबिक, भारत सबसे तेजी से बढ़ता हुआ स्ट्रीमिंग बाजार है। इस वर्ष फरवरी में लॉन्च हुए जियो हॉटस्टार प्लेटफॉर्म ने 28 करोड़ पेड सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। जियो हॉटस्टार ने भारत में अमेजन प्राइम (दो करोड़) और नेटफ्लिक्स (एक करोड़)  को पीछे छोड़ दिया है। आज का दर्शक कंटेंट सिर्फ देखने भर के लिए नहीं देखता, वह उसे अपने समय, सुविधा और मन:स्थिति के अनुसार चुनना चाहता है। 
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ओटीटी प्लेटफॉर्म दर्शकों की प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर विज्ञापन मुक्त वाले सब्सक्रिप्शन पेश कर रहे हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने चुनने की आजादी तो दी है, मगर ऑटो प्ले नेक्स्ट एपिसोड, सजेस्टेड फॉर यू जैसे मनोवैज्ञानिक ट्रिगर का उपयोग करके हमें बिंज वॉच में फंसा लेते हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल फ्लोरिडा में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, बिंज वॉचिंग से चिंता, अवसाद और नींद की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। नेल्सैन के कंज्यूमर इंटेलिजेंस सर्वे के मुताबिक, करीब 66 प्रतिशत प्रतिभागी लगातार पांच घंटे से अधिक बिंज वॉचिंग करते हैं। 

अब किसी एप पर आपको क्रिकेट मिलेगा, तो किसी पर सास-बहू सीरियल, तो वहीं कोरियन ड्रामा देखना है, तो वो अलग ओटीटी पर मिलेगा। तो सवाल यही है कि क्या हम फिर उसी जगह आ गए, जहां से चले थे। फर्क बस इतना है कि पहले रिमोट से चैनल को बदलने की आजादी थी, अब एप बदलने की है। दूसरी ओर, ये बदलाव हमारे पुराने टीवी देखने के उस मजेदार दौर को भी पीछे छोड़ आया है, जब परिवार साथ बैठकर एक ही स्क्रीन पर कहानी का हिस्सा बनता था। 

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