कोरोना के कारण देश में चल रहे लॉकडाउन ने लोगों के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा किया, भूख का। देश की राजधानी समेत बड़े शहरों से बड़ी संख्या में मजदूर पलायन को मजबूर हुए। ट्रेनों और सार्वजनिक परिवहनों की बंदी के बीच लोग पैदल ही अपने घर की ओर निकलने को मजबूर हुए।
सड़कों पर मुसीबतों में फंसे प्रवासी मजदूरों की हृदयविदारक तस्वीरें सामने आ रही हैं। लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही देश के विभिन्न शहरों में सैकड़ों स्वयंसेवी समूह, सामाजिक संगठन, युवा समूह आदि मददगार के रूप में सामने आए। दिल्ली, उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, बंगाल तक और मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत तक ऐसे कई सामाजिक संगठन सामने आए, जिन्होंने भूख और लाचारी से लड़ रहे प्रवासी मजदूरों की मदद करनी शुरू की।
बात चाहे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में रियाज हाशमी के नेतृत्व में चल रहे 'कोविड: हेल्प फॉर नीडी' अभियान की हो, पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में प्रेरणा संस्था की ओर से चलाए जा रहे सहयोग रथ की हो या फिर मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में अलग-अलग संस्थाओं द्वारा राशन-पानी की व्यवस्था करने की, सबने जहां जो बन पड़ा, मदद करने में लगे रहे। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जनसंपर्क समूह ने भी कुछ ऐसा ही किया, जो सक्षम लोगों के लिए अनुकरणीय है।
भोपाल में विभिन्न सामाजिक संगठनों, युवा समूह, संस्थाओं के सदस्यों समेत करीब 70 से अधिक सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, फोटोग्राफर, युवा, वकील, उद्यमी, कलाकार आदि ने यह 'जनसंपर्क समूह' तैयार किया और 22 सामुदायिक किचन के जरिये जरूरतमंदों के हाथों तक खाना पहुंचाते आ रहे हैं।
विदिशा बाईपास रोड पर प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए मजदूर सहयोग केंद्र की शुरुआत की, जिनके जरिये बिहार, उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों की ओर जा रहे श्रमिकों को खाना, मेडिकल सहायता वगैरह मुहैया कराई।
जनसंपर्क समूह की ओर से इस समय भोपाल में 22 किचन चलाए जा रहे हैं और 10 हजार से ज्यादा लोगों को हर दिन भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इनमें जम जम किचन, एडवा किचन, काजी कैंप किचन, नूर महल किचन, बच्चा रसोई, भारत ज्ञान विज्ञान समिति किचन, अन्नपूर्णा और मोती मस्जिद किचन, कोह ए फिजा किचन, रोहित नगर सेंटर, मानव सेवा समिति किचन, जनता नगर के किचन आदि शामिल हैं।