पार्वती थिरोवोतु: हेमा कमीशन रिपोर्ट को आंदोलन बनाने में पार्वती का विशेष हाथ है।
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आखिर कौन है इस अन्याय और शोषण के खिलाफ
अम्मा के खिलाफ़ मुहीम मुख्य रूप से एक अभिनेत्री पार्वती के चलते संभव हो रही है। वह डब्ल्यूसीसी की स्थापना के समय से ‘अम्मा’ के अत्याचारों और शोषण को उजागर करने के लिए कटिबद्ध हैं। उनकी यह निर्भीकता काबिले तारीफ़ है। हां, ‘अम्मा’ ने अवश्य अघोषित फ़तवा जारी किया हुआ था, जो डब्ल्यूसीसी से जुड़ा है, उसका कोई नाम नहीं लेगा, उससे संपर्क नहीं रखेगा और न ही उसे कोई काम दिया जाए। शायद इसीलिए कई साल से प्रतिष्ठित पुरस्कार पाने के बावजूद पार्वती तिरुवोतु मलयायलम की मुख्यधारा सिनेमा में नहीं के बराबर नजर आई हैं।
‘अम्मा’ की पुरुषसत्तात्मक कार्यप्रणाली से नाखुश होकर पार्वती ने काफ़ी पहले उससे इस्तीफ़ा दे दिया था। वे कुशल और सक्षम हैं, मात्र मलयालम सिनेमा पर ही निर्भर नहीं हैं। वे मलयालम के अलावा तमिल, तेलगु, कन्नड, हिन्दी फ़िल्मों में काम करती और सराही जाती हैं।
अब डब्ल्यूसीसी को हेमा कमिटी के खुलासे के लिए जिम्मेदार तथा अपराधी ठहराया जा रहा है। हां, सही है, हेमा कमीशन रिपोर्ट को आंदोलन बनाने में पार्वती का विशेष हाथ है। हालांकि WCC की ही उनकी कुछ ‘सो कॉल्ड’ शुभचिंतकों ने कहा, यदि इंडस्ट्री में रहना है, तो सोच-समझ कर कदम उठाएं। उनके लिए यह बहुत निराशाजनक था। पर वे पूरी तरह निराश नहीं हैं, पार्वती ने मलयालम फ़िल्म उद्योग में स्त्रियों की सुरक्षा केलिए कमर कसी हुई है।
पार्वती तिरुवोतु ने न केवल विभिन्न मलयालम चैनल को इंटरव्यू दिए हैं वरत् इंग्लिश चैनल पर भी अपनी बात कही है। पत्रकार बरखा दत्त से बात करते हुए वे कहती हैं-
हेमा कमीशन की रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से वे तकरीबन निराश हो चुकी थीं। मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अब रिपोर्ट का कुछ हिस्सा सार्वजनिक होने पर वे कह रही हैं-
मलयालम फ़िल्म उद्योग के जिन सत्ताधारी पुरुषों को सामने आकर स्त्रियों को न्याय दिलाने का काम करना चाहिए, वे कायरों की भांति मुंह छिपाए हुए हैं। कम-से-कम उन्हें स्त्रियों के साथ खड़ा होना चाहिए था। सरकार जो स्त्रियों की सुरक्षा और सम्मान का दावा करती है, ‘ऐसा तो सब जगह होता है’, कह कर सरकार के कई लोगों ने इसे हल्का बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
और-तो-और संस्कृति मंत्री तक ने कहा-
‘शक्ति संरचना सब स्थान पर है।’ मतलब यह मुद्दा कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। कुछ का कहना है, जिनके साथ अत्याचार-शोषण हुआ है, उन्होंने रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की। सदा की तरह कुछ लोग स्त्रियों को उनके व्यवहार-पहनावे को दोष दे रहे हैं। वे भूल जाते हैं स्त्री का ऐसा कर पाना कितना कठिन होता है। और पूरी हेमा समिति का एक गठन एक स्त्री के केस दायर करने से ही प्रारंभ हुआ है।
इस रिपोर्ट खुलते केरल, विशेष रूप से मलयालम फ़िल्म उद्योग में तूफ़ान आ गया। 17 स्त्रियों ने सामने आकर फ़ॉर्मल शिकायत दर्ज की है। कई कलाकार स्त्रियां ‘अम्मा’ के सचिव एवं अभिनेता सिद्दिक, एक्टर-एमएलए मुकेश के खिलाफ़ सामने आई हैं। हेमा रिपोर्ट जाहिर होने के बाद ‘अम्मा’ के प्रेसीडेंट मोहनलाल की अगुआई में पदाधिकारियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है। उनके तहत जांच पैनल बना था, उसे भी भंग कर दिया है।
थम ही नहीं रहा आरोपों का सिलसिला
सोनिया मल्हार, श्रीलेखा, रेवती संपत आदि स्त्री कलाकारों ने प्रड्यूसर रंजीत का नाम लेकर आरोप लगाए हैं। रंजीत का रेवती सम्पत के प्रति दुर्व्यवहार चर्चा में है। रेवती सम्पत ने स्वयं एक वेबसाइट पर अपनी बात कही है। एक पुरुष कलाकार ने भी रंजीत द्वारा अपने यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। अभिनेत्री तथा डब्ल्यूसीसी से जुड़ी रीमा कल्लिंगल ने इन अत्याचार भुगती स्त्रियों के ट्रॉमा तथा उनके साथ खड़े होने की बात टीवी पर कही है।
केरल फ़िल्म इंडस्ट्री के इस आपातकाल में ऐसे भी लोग हैं, जिनके खिलाफ़ अभी तक इसी कोई शिकायत सामने नहीं आई है। जयराम, पृथ्वीराज सुकुमारन आदि कुछ ऐसे ही कलाकार हैं। फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े पृथ्वीराज सुकुमारन, जगदीश, टोविनो थॉमस जैसे पुरुष सामने आए हैं और उन्होंने हेमा रिपोर्ट में दोषी लोगों के साथ कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है। सब अत्याचारियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए है ऐसा अग्रणी-पुरस्कृत (इस साल की सर्वोत्तम अभिनेत्री का भी पुरस्कार पाने वाली) अभिनेत्री उर्वशी ने भी कहा है।
इसमें शक नहीं, केरल की हेमा रिपोर्ट के दूरगामी परिणाम होंगे। केरल के इस भूचाल ने कोलकाता को जगा दिया है। टाइम्स एंटरटेनमेंट ने 30 अगस्त 2024 को लिखा है, पश्चिमी बंगाल में मीनू मुनीर ने मलयाली एक्टर-पोलिटीशियन मुकेश एवं एक्टर जयसूर्या तथा एडवेला बाबू के विरुद्ध एक एफ़आईआर दर्ज की है। 100 स्त्री लेखक तथा एक्टिविस्ट ने नैतिकता के आधार पर मुकेश के इस्तीफ़े की मांग की है। कई अन्य सिने-संसार में लोगों को बोलने की हिम्मत मिलेगी।
अभी तक ‘अम्मा’ पदानुक्रम व्यवस्था के अंतर्गत काम कर रही थी। वहां भय का वातावरण था। इस खुलासे से कई लोग जनता के बीच नंगे हो गए हैं, कई लोगों के मुखौटे गिर गए हैं। स्त्री जब ठान लेती है तो पहाड़ उखाड़ फ़ेंकती है, उसकी दहाड़ से जंगल कांप उठता है।
पार्वती तिरुवोतु के अनुसार-
वे आशा करती है, इन अत्याचारियों की कराल जकड़न से विमुक्त हो कर ‘अम्मा’ को जल्द नई लीडरशिप मिलेगी और भविष्य में यह संस्था अपने सदस्यों की बेहतरी, सिने-स्त्रियों की सुरक्षा-सुविधाओं केलिए काम करेगी। मलयालम सिने-जगत को ‘अम्मा’ एक नई ऊर्जा, नई ऊंचाई पर जाएगी।
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