अकेलापन, प्रतिस्पर्धा व असफलता का डर जीवन का संत्रास बनता जा रहा है।
- फोटो : pixabay
मानसिक द्वंद्व से जूझता समाज
सामाजिक, आर्थिक दबाव ने बच्चों के पैदा होने के साथ ही उसमें अच्छा, बहुत अच्छा और सबसे अच्छा होने का भाव भर दिया है। वह इस भाव को ताउम्र अपने साथ लिए जीता है और अपनी आगे की पीढ़ी को हस्तांतरित करता है। हम मानसिक दबावों से भरे ऐसे समाज में पैदा हो रहे हैं जहां हमारे आस-पास अथाह तनावों व दबावों के घेरे हैं। बचपन से परिवार व समाज इन घेरों में प्रवेश लेने की शिक्षा तो देता है लेकिन वह इन घेरों से बाहर निकलने की शिक्षा देना भूल जाता है।
वह सफलता कैसे प्राप्त करें? यह शिक्षा अवश्य देता है लेकिन असफलता में कैसे स्वयं को मानसिक रूप से मजबूत बनाए? यह नहीं सिखाता है। आज हमारे आसपास का प्रत्येक व्यक्ति मानसिक द्वंद्व से जूझता, कभी ख़ुद से लड़ता तो कभी दूसरों से झगड़ता देखा जा सकता है। इन्हें ईलाज अर्थात काउंसलिंग और सबसे अधिक संवाद की आवश्यकता है।
अपनी मानसिक स्थितियों से किसी को परिचित न करा सकने की मानसिकता ही सबसे अधिक मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को जन्म दे रही है। मानसिक स्वास्थ्य को हमारी बीमारी न मानने की मानसिकता ही आत्महत्या की घटनाओं को बढ़ा भी रही है। हम जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं व समय-समय पर उसका निरीक्षण व परीक्षण करवाते रहते हैं उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य का भी करवाना चाहिए।
पश्चिमी देशों ने इस समस्या को गंभीरता से समझा है, यही कारण है कि इन देशों में लगभग हर व्यक्ति का अपना काउंसलर होता है। किंतु भारत में अभी भी मानसिक स्वास्थ्य को समस्या के रूप में देखने की मानसिकता का ही अभाव देखने को मिलता है। आज युवाओं में रोजगार की चिंता ने उनको अपने परिवार से दूर कर दिया है।
अकेलापन, प्रतिस्पर्धा व असफलता का डर उनके जीवन का संत्रास बनता जा रहा है। ऐसे में आवश्यक है कि नौकरीपेशा लोगों को अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करने का उचित समय दिया जाए जिससे कि वह अपने मानसिक द्वंद्व को अपनों से साथ साझा कर अपने मन में जन्म लेती नकारात्मक वृति का समन कर अपने ऊपर नकारात्मकता को हावी होने से बचा सके। अन्यथा युवाओं में बढ़ती मानसिक अस्वस्थता की स्थिति में आत्महत्या जैसा कदम हमारे, समाज, राष्ट्र के लिए हितकर नहीं होगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।