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Manipur Election 2022: मणिपुर में खेला करने को तैयार नीतीश की जदयू और कोनराड की एनपीपी, भाजपा कैसे पाएगी पार?

सार

भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही सामने 19 और 20 की स्थिति आ सकती है। इसके बाद रातों-रात पाला बदलने का खेल शुरू हो सकता है। बहुत कुछ इस पर भी निर्भर है कि केंद्र का पूरा जोर लगाकर भी भाजपा कितने विधायक जिताकर ला पाती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मणिपुर के मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सहित राज्य के तमाम पार्टी प्रभारी आगामी विधानसभा चुनावों में जीत के लंबे- चौड़े दावे कर रहे हैं। अपने से ज्यादा भरोसा उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व और प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के बिखराव पर है। यहां पहले चरण का मतदान 27 फरवरी और दूसरे चरण का तीन मार्च को है। भाजपा के टिकट से वंचित नेता कांग्रेस गठबंधन के दलों के अलावा एनडीए की सहयोगी पार्टियों जदयू और एनपीपी आदि में समायोजित हो चुके हैं। उधर, कांग्रेस के मणिपुर प्रभारी जयराम रमेश का कहना है कि उनकी पार्टी का एकमात्र लक्ष्य फिलहाल अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करना है, ताकि नतीजों के बाद किसी का मुंह न देखना पड़े।

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दरअसल, मतदाता अब बहुत समझदार हो गए हैं। उन्हें नेताओं के चुनावी जुमलों की पहचान हो गई है। फिर भी चुनावों में होने वाले धनबल और बाहुबल का कोई भी जवाब उनके पास अब तक नहीं है। विकल्प सीमित हैं। लोगों का कहना है कि मौजूदा शासन में राज्य के भीतर बेशक उग्रवादी और विद्रोही गतिविधियों में ठहराव आया है, लेकिन ड्रग्स के धंधे में वृद्धि हुई है। राज्य की आर्थिक प्रगति रुकी है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में भी कोई उल्लेखनीय सुधार देखने को नहीं मिला। ज्यादातर मामलों में पूर्ववर्ती सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ऐसे में राज्य के भीतर हर किसी की निगाहें 10 मार्च को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं।

जानकारों के मुताबिक, भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही सामने 19 और 20 की स्थिति आ सकती है। इसके बाद रातों-रात पाला बदलने का खेल शुरू हो सकता है। बहुत कुछ इस पर भी निर्भर है कि केंद्र का पूरा जोर लगाकर भी भाजपा कितने विधायक जिताकर ला पाती है। अथवा फिर यह कि नाराज कांग्रेसी नेताओं को अपने खेमे में लाने और उन्हें टिकट देने का कितना नुकसान उसे भोगना पड़ता है।
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मणिपुर में चुनाव कमान संभाल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश भी मणिपुर को काफी जटिल राजनीतिक संभाव्यताओं का राज्य मानते हैं। उनके मुताबिक, भाजपा की डबल इंजन सरकार वस्तुतः 'नरेंद्र-बीरेंद्र की ट्रबल इंजन सरकार' है। फिर भी राज्य में भाजपा ही अपने 'अलग-अलग अवतार' में कांग्रेस की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है। रमेश के मुताबिक, एनपीपी और जदयू जैसी पार्टियां उसकी अलग अवतार हैं।

देश के कई अन्य भागों की अपेक्षा मणिपुर के मतदाता अधिक जागरूक हैं। वे खुद को पार्टी विशेष की विचारधारा से जोड़ने की जगह प्रत्याशियों के साथ जोड़ना पसंद करते हैं। ऐसे में चौंकाने वाले परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

इस बीच मणिपुर के चुनावी कैनवस पर नीतीश कुमार की जदयू और कोनराड संगमा की एनपीपी त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में किंगमेकर के रूप में उभरने की तरफ बढ़ रही हैं। भाजपा और कांग्रेस के टिकट वंचितों के आशियाने बन चुके हैं। 

जदयू के कुछ दिलचस्प प्रत्याशियों में पूर्व पुलिस अधिकारी टी बृंदा और ख्वैराकफम लोकेन, कांग्रेस केके बीरेन और खुमुच्छम जयकिशन प्रमुख हैं। जदयू ने अभी अपने 36 प्रत्याशियों की सूची जारी की है। उसका दावा 75 से 80 फीसदी सीटों पर लड़ने का है। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि उनकी पार्टी सरकार बनाने की सबसे अधिक संभावना वाली पार्टी को अपना समर्थन देगी। दरअसल मणिपुर में ऐसा पहले भी हो चुका है।

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