मम्मूट्टि को गंभीर भूमिका में देखना एक भिन्न अनुभव है
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हास्य और गंभीर दोनों भूमिकाओं में खतरे उतरते हैं-
फ़िल्मी जीवन में उतार-चढ़ाव के बावजूद मम्मूट्टि की कुछ भूमिकाएं सदैव याद की जाएंगी। जिस सहजता से वह हास्य भूमिकाएं करते हैं उसी कुशलता से वे गंभीर भूमिकाएं भी कर सकते हैं। ब्राह्मण की भूमिका कर सकते हैं तो पुलिस की वर्दी में भी जंचते हैं। ‘एऴकिय रावणन’ में उनका काम काफ़ी कठिन था, यहां उन्हें गंभीर रहना था साथ ही हास्य उत्पन्न करना था।
‘कोट्टयम कुंजाचन’, ‘राजधि राजा’, ‘नंदी वींदम वारीका’, ‘अंकल मनु’, ‘कुट्टेतन’ कुछ ऐसी ही फ़िल्में हैं जहाँ उन्होंने हास्य भूमिकाएं की हैं। हंसते-हंसते पेट में बल पड़ जाने की बात आती है तो मम्मूट्टि की ‘राजमाणिकम’ देखनी चाहिए। ट्रिवेंद्रम बोली बोलने वाले बेल्लारी राजा (मम्मूट्टि) ने लोगों को पागल कर दिया था। ‘तुरुप्प गुलाम’ और ‘प्रांचिएट्टन एंड द सेंट’ को जब दर्शक याद करता है तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इसी तरह ‘कामत एंड कामत’ में उनकी मुद्रा और पार्श्व संगीत मिलकर जो कॉमेडी उत्पन्न करते हैं, वह लाजवाब है।
मम्मूट्टि को गंभीर भूमिका में देखना एक भिन्न अनुभव है। उन्हें सीबीआई ऑफ़ीसर की भूमिकाओं में देखें। ‘उरु सीबीआई डायरी कुरिप्पु’ की सफ़लता से प्रेरित होकर ‘जगराता’, ‘सेतुराम अय्यर सीबीआई’, ‘नेरियन सीबीआई’ तथा इसी साल आई ‘सीबीआई 5: द ब्रेन’ फ़िल्म बनीं। बुद्धिमान ऑफ़ीसर सेतुराम अय्यर नम्र मगर जरूरत पर कठोर है। महाभारत से साम्य रखती मलयालम के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक साजी कैलास की फ़िल्म ‘वलीएट्टन’ जिसे कन्नड भाषा में सुरेश कृष्णा ने ‘ज्येष्ठ’ नाम से बनाया उनकी एक अन्य फ़िल्म है।
उनके अभिनय का चरम छ: पुरस्कार पाने वाली फ़िल्म ‘ओरु वडक्कन वीरगाथा’ में नजर आता है। एम. टी. की कहानी (कहानी में ऐतिहासिक खलनायक चरित्र को नायक बनाया गया है) पर टी हरिहरन निर्देशित इस ऐतिहासिक ड्रामा फ़िल्म में चंदु तथा उनियारच (माधवी) की कहानी के विषय में समीक्षकों का कहना है कि इसे विश्व की सर्वोत्तम फ़िल्म में शामिल किया जाना चाहिए। अगर आज चंदु खुद आ जाए तो मम्मूट्टि को अपनी भूमिका में देख कर गर्व से भर उठे। इस फ़िल्म का ‘कलरी दृश्य’ अविस्मरणीय है।
मम्मूट्टि ने मलयालम के अलावा तमिल, तेलगु, इंग्लिश में भी काम किया है। मम्मूट्टि और उनकी फ़िल्मी भूमिकाओं पर किताब लिखी जा सकती है। स्वयं उनका मानना है अभी उन्हें बहुत दूर जाना है, उनका स्वप्न बड़ा है और जुनून बहुत गहरा। उनका स्वप्न साकार हो यही कामना है।
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