पश्चिम बंगाल की राजनीति
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पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक हालत के मद्देनजर अगर कांग्रेस को वाममोर्चा और तृणमूल में से किसी एक को चुनना है तो कांग्रेस क्या फैसला लेगी? जाहिर है कि उनके लिए 2024 के पहले सेमीफाइनल में कौन कितना फायदा दे सकता है इस पर गौर किया जाएगा।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की विधानसभा के चुनाव 2023 के आखिर में होने हैं। अब सवाल उठता है कि क्या ममता बनर्जी इन राज्यों के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित कर सकती हैं? जाहिर है कि जवाब होगा नहीं, क्योंकि इन राज्यों में तृणमूल कांग्रेस की कोई राजनीतिक जमा पूंजी नहीं है। ऐसे में वाममोर्चा ही ज्यादा मददगार साबित हो सकता है।
कहीं उनका साथ एक बोझ तो नहीं बन जाएगा
इसके साथ ही एक और सवाल है कि विपक्ष के साझा मोर्चा के लिए कहीं ममता बनर्जी एक बोझ तो नहीं बन जाएंगी? इसकी वजह यह है इन दिनों ममता बनर्जी की सरकार घोटालों से जूझ रही है। टीचर नियुक्ति घोटाले में इन दिनों ममता बनर्जी सरकार के एक मंत्री और दो विधायक जेल में है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के आधा दर्जन आला अफसर भी जेल में है।
पालिकाओं में नियुक्ति घोटाले की खुलासा हुआ है और इसकी जांच सीबीआई को सौंपी दी गई है। कोयला और गो-तस्करी के मामले में तृणमूल कांग्रेस के भरी भरकम नेता इन दिनों तिहाड़ जेल में है। इसी मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी निशाने पर हैं। इसके अलावा मनरेगा और पीएम आवास योजना का घोटाला भी है।
भाजपा कांग्रेस और वाम मोर्चा के नेता इन दिनों पंचायत चुनाव में इनका जम कर प्रचार कर रहे हैं। आखिरी सवाल है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में तोलमोल करने की कितनी हैसियत ममता बनर्जी में रह जाएगी यह पंचायत चुनाव के परिणाम पर भी निर्भर करता है। इसके साथ ही सीबीआई जांच का नतीजा भी इस प्रभावित करेगा।
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