बाल ठाकरे, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे
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चाल, चेहरा और चरित्र की समझ
उद्धव ठाकरे ने अपनी ढाई साल पुरानी सरकार खोई, विधायक खोए और यहां तक कि अपने कैबिनेट मंत्री भी खोए। उद्धव ने अपने राजनीतिक फैसलों के लिए शरद पवार में गुरु पा लिया। हालांकि सभी जानते हैं कि शरद पवार और बाल ठाकरे में भी गाढ़ी दोस्ती थी। मगर बाल ठाकरे की प्रवृत्ति शरद पवार से अलग थी और उनकी अपनी बुद्धि भी थी।
बीजेपी के साथ 2019 का महाराष्ट्र चुनाव जीतने के बावजूद उद्धव ने बीजेपी की बजाए एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई। लेकिन एक बात वह समझ नहीं पाए।
शिवसेना का चाल, चरित्र और चेहरा - तीनों हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा से आता है। मोदी की बीजेपी का चाल, चरित्र और चेहरा भी हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद से आता है। बीजेपी और शिवसेना एक म्यान में दो तलवारों की तरह हैं, एक ही लोहे से बने और एक जैसे ही धारदार।
लेकिन बाल ठाकरे और वाजपेयी इतने समझदार थे कि वह जानते थे कि यह दुनिया की एक मात्र ऐसी दो तलवारें हैं जो सिर्फ एक ही म्यान में रहने के लिए बनी हैं। उद्धव ठाकरे ने शिवसेना की यह तलवार साझा म्यान से निकाल कर अपने ही पैर मारी।
अब नतीजा सामने है - मगर भविष्य खत्म नहीं हुआ है।
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