महाराष्ट्र में महज एक रात में भाजपा-एनसीपी की सरकार भारतीय राजनीति में विश्वास के संकट का सबसे अनुपम उदाहरण है। कुछ भी हो जाने का एक महान राजनीतिक इतिहास। एक राज्य में सरकार बनाने की कला का यह अनूठा उपक्रम भारत के राजनीतिक इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
महाराष्ट्र की जनता ढलते 2019 के नवंबर को अपनी जुबान पर नमक की तरह बनाए रखेगी। राज्य का राजनीतिक इतिहास नवंबर महीने की 23 तारीख को अपनी स्मृतियों में चुटकुलों की तरह याद रखेगा।
पत्रकार महाराष्ट्र को इस रूप में दर्ज करेंगे कि यह समय मीडिया और पत्रकारों के लिए खबरों के संकट से भरा समय है कि उनके वॉट्सग्रुप में साझा हुईं सूचनाएं और कुछ नहीं थी सिवाए डिलीट करने के।
वे उन बाइट और नेताओं के बयानों को हमेशा झूठ मानेंगे जिन्हें लेने के लिए वे घंटों खड़े रहे और वे तस्वीरें-बयान भी जिन्हें कार की विंडो से झांकते हुए मीठी मुस्कान के साथ नेताओं ने उन्हें दिए थे।
मीडिया और पत्रकार ये भी सोचेंगे कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजनीति करवट ले रही है और ये संवैधानिक नियमों, कायदे कानूनों को ताक पर रखने का समय है।
देश की जनता सोचेगी
कि अचानक, औचक, हतप्रभ और हैरत कर देने वाले समय में सरकारें भी शॉकिंग तरह से बन सकती हैं, सीएम बहुत ज्यादा अचानक भरा हो सकता है और शपथों के इतिहास में सीएम फडणवीस की शपथ भारतीय राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी शपथ है।
अलबत्ता महाराष्ट्र की नई सरकार पर कई तरह से और कई एंगल से लिखा जाएगा। लेकिन फिर भी एक सरकार का रातोंरात गठन कैसे हुआ यह पाठ्यक्रम में शामिल होगा, जिसकी संभावित कल्पना खुद राजनेताओं ने नहीं की होगी।
इतिहास की आंखों में महत्वकांक्षाएं भी दर्ज होंगी। वे फोन कॉल्स, मैसेज और मेल मुलाकातों का ब्योरा आत्मकथाओं में आएगा और न्यूज चैनलों की सनसनी बनता रहेगा।